समाज

  • Sahara
    तिहाड़ जेल का वह अनोखा कैदी
    Posted in: आर्थिक जगत, उद्योग जगत, समाज

    डॉ. महेश परिमल बड़े-बूढ़े कह गए हैं कि कभी किसी गरीब की हाय नहीं लेनी चाहिए। वह कभी न कभी अपना असर दिखाती ही है। इसमें कई बार भले ही देर हो जाए, पर इसमें कभी अंधेर नहीं होता। सोचो, जिस व्यक्ति के नाम से सरकार चलती हो, जिसके बड़े-बड़े नेताओं से सीधा सम्पर्क हो। […]

  • Farmer
    किसानों का खेती से मोहभंग: बढाएगा जनसंघर्ष?
    Posted in: किसान, खेती, ग्रामीण भारत, समाज

    डॉ. सुनील शर्मा अनिल कुमार खेती  को छोड़ किसी दूसरे काम की तलाश में हैं क्योंकि उनके लिए अब खेती के सहारे परिवार चलाना कठिन होता जा रहा है। अनिल के खेतों की सोयाबीन की फसल पिछले साल ज्यादा बारिस के कारण नष्ट हो गई, चने को ओलों ने बर्बाद कर दिया और इस सत्र […]

  • MB
    मोहन भागवतजी हिन्दुओं से चाहते क्या हैं?
    Posted in: धर्म, समाज, सांप्रदायिकता

    – डॉ. एम.एन. बुच यह सत्य है कि विश्व में सबसे अधिक हिन्दू भारत में रहते हैं और इस देश के लगभग 82 प्रतिशत लोग अपने आपको हिन्दू समझते हैं। वैसे हमारे किसी भी शास्त्र में शब्द ‘हिन्दू’ उपयोग में लाया गया हो वह मेरी जानकारी में नहीं है। भारत के पश्चिम में अरब सागर […]

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    प्यार के तालिबानों का वक्त़
    Posted in: राजनीति, समाज, सांप्रदायिकता

    – सुभाष गाताडे साल पहले कर्नाटक के तटीय इलाकों एवं केरल के कुछ हिस्सों में अन्तधर्मीय विवाहों के खिलाफ शुरू की गयी मुहिम धीरे धीरे देश के बाकी हिस्सों में पहुंच जाएगी, यहां तक कि देश की सत्ताधारी पार्टी साम्प्रदायिक आधारों पर समाज में नए ध्रुवीकरण के कार्यक्रम के तौर पर उसका इस्तेमाल करेगी, इसका […]

  • 280720143
    अपराध के ऑंकड़े, राजनीति का हिसाब और अनियंत्रित वाणी
    Posted in: उत्तर प्रदेश, राजनीति, समाज

    –वीरेन्द्र जैन- सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या किसी भी तरह की दूसरी घटनाओं में मरने वालों से अधिक है और इसके लिए केवल ट्रैफिक विभाग में चल रही अवैध वसूली ही नहीं अपितु राज्यों में सत्तारूढ दल भी बराबर से जिम्मेवार होते हैं क्योंकि व्यावसायिक वाहनों की नियमित वसूली का तय हिस्सा अधिकांश […]

  • 280720145
    अल्पसंख्यक कल्याण : कहां तक पहुंचा है कारवां ?
    Posted in: समाज, सरकार

    – सुभाष गाताडे- अल्पसंख्यक कल्याण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का हाल पिछले दिनों संसद के सामने पेश हुआ। पता चला कि इस सिलसिले में आठ साल पहले शुरू की गयी प्रधानमंत्री की 15 सूत्रीय योजना के कई बिन्दुओं पर अभी काम भी नहीं शुरू हो सका है। इतना ही नहीं […]

  • 2807201411
    यह संवेदनशीलता है या प्रहसन!
    Posted in: समाज

    –वरुण शैलेश- इसे चालबाजी कहें या संवेदनशीलता? सवाल कठिन है। इसे नए दौर का बाजारु उपभोक्तावाद नाम देकर हल्के में भी तो नहीं लिया जा सकता। लखनऊ के बाहरी इलाके में बर्बर बलात्कार कांड के बाद पीड़ित महिला की खून से लथपथ निर्वस्त्र लाश की तस्वीर सोशल मीडिया पर जिस तरह प्रसारित हुई उस पर […]

  • 2807201412
    साहित्य सिर्फ साहित्य और साहित्यकार सिर्फ साहित्यकार होता है
    Posted in: महिला, समाज

    -अंजलि सिन्हा- हाल में नोबेल पुरस्कार विजेती दक्षिण अफ्रीकी साहित्यकार नादिन गोर्दिमेर का देहान्त हो गया। दक्षिण अफ्रीका के रंगभेदी शासन के खिलाफ न केवल अपने साहित्य के जरिए बल्कि अन्य सक्रियताओं के जरिए विरोध करनेवाली नादिन के बारे में यह बात मशहूर है कि उन्होंने लेखिकाओं के लिए आरक्षित पुरस्कार से अपना एक उपन्यास […]

  • 2807201413
    ‘प्रयत्न’ जैसी संस्थाएं संवार सकती हैं निर्धन बच्चों की तक़दीर
    Posted in: बच्चे, शिक्षा, समाज

    -डॉ. गीता गुप्त- भले ही भारत में चौदह वर्ष तक के बच्चों के लिए नि:शुल्क अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लागू हो, मगर अभी भी लाखों बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। रोज़ी-रोटी की तलाश में गांव से शहर की ओर प्रस्थान करने वाले श्रमिक परिवारों के ऐसे बच्चे हमें अपने आसपास ही देखने को मिल जाते हैं, […]

  • 210720149
    बिहार में जिंदा है जमींनदारी प्रथा
    Posted in: समाज, सरकार

    –डा. दुलार बाबू ठाकुर- आधी रात को एक जमींनदार ;तथाकथित की बहू दबे कदमों से चलती हुईं शादी में मिले घूंघट की साड़ी को बेचने के लिए किसी के घर पहुंचती है। वह डरी और सहमी हुई है। डर का कारण कोई देख न ले, और सहमने की वजह, साड़ी बिकेगी या नहीं, से है। […]

  • 2107201410
    बलात्कार और नाबालिग उम्र
    Posted in: कानून, समाज

    –प्रमोद भार्गव- महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने ‘किशोर आपराधिक न्याय’ ;देखभाल एवं बाल सरंक्षण कानून 2000 के स्थान पर नया कानून ‘किशोर न्याय विधेयक-2014’ लाने का संकल्प लिया है। उन्होंने इस बाबत समाचार चैनलों पर बयान भी दिए और प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप इंटरनेट पर भी लोगों के सुझाव के लिए डाल […]

  • 2107201412
    आमिर पर किसका अख्तियार?
    Posted in: जीवन शैली, समाज

    –शाह आलम- टीवी कार्यक्रम सत्यमेव जयते के जरिये सामाजिक विषयों पर सवाल खड़ा करने वाले बॉलीवुड के अभिनेता आमिर खान इन दिनों खासी चर्चा में हैं। आमिर के कैम्पेन वोट फार चेंज का असर देश के तमाम हलकों सहित खुद उनके पुश्तैनी गांव शाहबाद स्थित अख्तियारपुर में कितना है, यह देखना दिलचस्प है। उत्तर प्रदेष […]

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