आर्थिक जगत

  • Foreign Tourist
    आर्थिक मंदी के मारे ये विदेशी पर्यटक बेचारे
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    ——जगजीत शर्मा——- डेढ़-दो साल पहले तक हर टीवी चैनल, हर अखबार और पत्र-पत्रिकाओं में ‘अतिथि देवो भवÓ  स्लोगन लिखे विज्ञापन आते थे जिनमें यह बताने की कोशिश की जाती थी कि भारत घूमने आने वाला पर्यटक हमारा अतिथि है, इसके मान-सम्मान और सामान की सुरक्षा करना हमारा नैतिक दायित्व है। सरकार बदली, तो मीडिया से […]

  • G20 Leaders
    जी-20 की उपलब्धियां और चुनौतियां
    Posted in: आर्थिक जगत, विश्व जगत

    जी-20 की उपलब्धियां और चुनौतियां —–अरविंद जयतिलक——– पेरिस आतंकी हमले के साए में दुनिया के 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के समूह जी-20 का शिखर सम्मेलन टर्की के अंतालिया में आतंकवाद के विरुद्ध आपसी गोलबंदी के संकल्प के साथ समाप्त हो गया। उम्मीद थी कि इस सम्मेलन में जी-20 के सदस्य देश ऐसे किसी ठोस […]

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    मोदी के लिए मूडी के सदविचार !
    Posted in: आर्थिक जगत, करेंट अफेयर्स

    ———शैलेन्द्र चौहान——— संप्रति भारत में गोमांस खाने और अन्य सांप्रदायिक राजनैतिक मुद्दों पर फैले तनाव के संदर्भ में वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ‘मूडीज’ की विश्लेषण इकाई ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी पार्टी के सदस्यों पर लगाम लगाना चाहिए नहीं तो उनके लिए घरेलू और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीयता खोने का खतरा […]

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    अमीरी के सपने के साइड इफेक्ट
    Posted in: आर्थिक जगत

    —–कृष्ण प्रताप सिंह—— लगता है कि अब वह समय एकदम सिर पर आ गया है, जब हमारे निजाम को अमीरी के उस हसीन सपने को आगे और बांटने से बाज आ जाना चाहिए, जिसे वह भूमंडलीकरण की शोषण व गैरबराबरी बढ़ाने वाली नीतियां अपनाने के बाद से ही देश के गरीबों को लगातार दिखाये जा […]

  • rural-poverty-in-india-village-1
    अमीरी बनाम गरीबी
    Posted in: आर्थिक जगत, गरीबी, ग्रामीण भारत

    —–शैलेन्द्र चौहान—— जनगणना के ताजा आंकडों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों के तीन चौथाई परिवारों की आमदनी पांच हजार रुपए महीने से ज्यादा नहीं है। गांवों में रहने वाले बानबे फीसद परिवारों की आय प्रतिमाह दस हजार रुपए से कम है। शहरी इलाकों के आंकड़े फिलहाल जारी नहीं किए गए हैं। पर वे जब भी सामने […]

  • greece crisis
    डूबते राष्ट्र, ग्रीस का संदेश
    Posted in: आर्थिक जगत, विश्व जगत

    —-प्रमोद भार्गव—– पूंजीवादी के प्रति शीर्षक से मुक्तिबोध की एक कविता है,‘तेरा घ्वंस,केवल एक तेरा अर्थ।‘ पूंजीवादी आर्थिक साम्राज्यवाद का विंध्वंस अब प्रकट रूप में देखने में आने लगा है। जिस यूरोप की धरती से इस साम्राज्य के विस्तार का तंत्र फैला,उसी यूरोप के एक छोटे देश ग्रीस ने पूंजीवादी आर्थिक उदारवाद की अजगरी गुंजलक […]

  • parlcanteen
    भरे पेट माननीयों को सब्सिडी
    Posted in: आर्थिक जगत

    —–प्रमोद भार्गव—— बनारस हिंदू विष्व विद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के आमंत्रण पर 1916 में महात्मा गांधी ने विवि के समारोह में भागीदारी की थी। समारोह के मुख्य अतिथि वाइसराय थे। वाइसराय के उद्बोधन के बाद महात्मा गांधी को बोलना था। वे बोले, ‘जिस देश  की ज्यादातर आबादी की तीन पैसा भी […]

  • Income inequality
    कल्पनातीत आर्थिक असमानता
    Posted in: आर्थिक जगत

    —-शैलेन्द्र चौहान—- विश्व बैंक की दक्षिण एशिया में असमानता से जुड़ी एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में असामान्य रूप में अरबपतियों की तादाद तो ज्यादा है ही सामान्य नागरिक की तुलना में उनकी संपत्ति का आनुपातिक असंतुलन बहुत विकराल है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अमीरों की संपत्ति का […]

  • gold at temples
    मंदिरों के सोने पर सरकार की नजर
    Posted in: आर्थिक जगत

    —-प्रमोद भार्गव—- भारत प्राचीन समय से सोने के भंडारण में अग्रणी देश रहा है। इसलिए भारत को सोने की चिडि़या कहा जाता है। इस समय भारतीय रिर्जब बैंक के पास करीब 18 हजार टन सोना है। इसके अलावा एक अनुमान के मुताबिक देश के मंदिरों में कुल मिलाकर करीब 3 हजार टन और भारतीय घरों […]

  • Modi Crony Capitalism
    शहीद-ए-आज़म ‘भगत सिंह’ के विचार और हमारा वर्तमान समय
    Posted in: आर्थिक जगत, विशेष

    — धीरज कुमार सोनी— वर्तमान सरकार ने वर्ष 2015 की शुरुआत देशी-विदेशी पूँजीपतियों के स्वागत में लाल गलीचे बिछा कर कर दी है। सरकार द्वारा सम्मेलनों का आयोजन कर पूँजीपतियों को लुभाने की कोशिशें हो रही हैं। श्रम कानूनों में मालिकों के मनमाफि़क बदलाव, पूँजीपतियों के तमाम प्रोजेक्टों के लिए किसानों-आदिवासियों की ज़मीन हड़पने के […]

  • jaitley-budget-ap-2_660_022815025340
    उम्मीदों की खाली टोकरी
    Posted in: आर्थिक जगत, शिक्षा

    केंद्रीय बजट में “विज्ञान” को उम्मीद के काफी कम मिला —शशांक द्विवेदी—   पिछले दिनों प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत रत्न प्रोफेसर सीएनआर राव ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास की बात तो बहुत की लेकिन विज्ञान और उच्च शिक्षा के लिए कुछ खास नहीं किया। यह सचाई है कि देश में वैज्ञानिक शोध […]

  • Budget
    बुरे दिन आने के संकेत
    Posted in: आर्थिक जगत

    —अरविंद जयतिलक— यह असंवेदनषीलता नहीं तो और क्या है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली के बजट पेष करने के चंद घंटे के अंदर ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल मूल्य में 3.18 रुपए और डीजल मूल्य में 3.09 रुपए की वृद्धि कर उनके इस दावे की धज्जियां उड़ा दी है कि बजट से महंगाई कम होगी और […]

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