फिल्म समीक्षा

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    वर्ग भेद की पहचान कराती फिल्म ‘हिन्दी मीडियम’ – वीरेन्द्र जैन
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    वर्ग भेद की पहचान कराती फिल्म ‘हिन्दी मीडियम’ —– वीरेन्द्र जैन —— जो लोग फिल्मों की कथा वस्तु और कथा कथन में ताज़गी को पसन्द करते हैं, उनके लिए हिन्दी मीडियम एक बेहतरीन फिल्म है। हमारे जैसे अर्ध-सामंतवादी, अर्ध-पूंजीवादी समाज में अंतर्विरोधों के स्वरूप भी भिन्न भिन्न प्रकार के हैं, जिसमें से एक की कथा […]

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    बेगमजान “यह बेगम जान बेजान है”
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    फिल्म समीक्षा- बेगमजान यह बेगम जान बेजान है —— वीरेन्द्र जैन —— यह वह कहानी है, जो कही नहीं जा सकी। यह वह फिल्म है जो बनायी नहीं जा सकी। एक बुन्देली कहावत को संशोधित कर फिल्म ‘वो सात दिन’ में एक गीत था- अनाड़ी का खेलना, खेल का सत्यानाश। लगता है इस फिल्म के […]

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    डिकोडिंग “रईस”
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    डिकोडिंग “रईस”  —— जावेद अनीस ——- हिंदी सिनेमा देश के मुस्लिम समाज को परदे पर पेश करने के मामले में कंजूस रहा है और ऐसे मौके बहुत दुर्लभ ही रहे हैं जब किसी मुसलमान को मुख्य किरदार या हीरो के तौर पर प्रस्तुत किया गया हो. “गर्म हवा”,“पाकीज़ा”,“चौदहवीं का चांद”,“मेरे हुज़ूर”,“निकाह”,“शमा”, “नसीम”, “चक दे इंडिया”, “इक़बाल”, “माय […]

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    दंगल – लैंगिक भेदभाव पर एक और बेहतरीन फिल्म
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    दंगल – लैंगिक भेदभाव पर एक और बेहतरीन फिल्म —— वीरेन्द्र जैन ——- पिछले दो दशकों से साहित्य में महिला विमर्श को केन्द्र में लाया गया था जिसके प्रभाव में पिछले दिनों लैंगिक भेदभाव को चुनौती देने वाली कई फिल्में बनी हैं जिनमें से कुछ बैंडिट क्वीन, गुलाबी गैंग, नो वन किल्लिड जेसिका, क्वीन, पिंक, […]

  • 'निल बट्टे सन्नाटा’ और घरेलू कामगार महिलायें
    ‘निल बट्टे सन्नाटा’ और घरेलू कामगार महिलायें – जावेद अनीस
    Posted in: फिल्म समीक्षा, मजदूर, महिला

    विदेशों में सभी परिवार “घरेलू सहायक” अफोर्ड नहीं कर पाते हैं क्योंकि उनकी पगार बहुत ज्यादा होती है, लेकिन भारत में “काम वाली बाई” रखना बहुत सस्ता है. शायद इसी वजह से यहाँ घरेलू कामगार महिलायें अदृष्य सी हैं. उनके काम को आर्थिक और सामाजिक रूप से महत्त्व नहीं दिया जाता है, हालाँकि इन दोनों […]

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    हिंसा के परतों के बीच “तितली”
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    ———जावेद अनीस———– जौहर,चोपड़ा और बड़जात्या की फिल्मों में अमूमन सुखी और संपन्न परिवारों के बारे में बताया जाता है,जहाँ नैतिकता व संस्कारों का ध्यान हद दर्जे तक रखा जाता है.वहां कोई टकराहट नहीं होती है और ये हर तरह से एक आदर्श परिवार होते हैं जहाँ सभी लोग खुश रहते हैं. यह सब दर्शकों को […]

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    ‘किस किसको प्यार करूं’:- कॉमेडी किंग की ट्रेजेडी गाथा
    Posted in: फिल्म समीक्षा

    ——जावेद अनीस——- हमारे यहाँ कॉमेडी का मतलब औरतों, ट्रांसजेंडर्स, मोटे लोगों, बुजर्गों, काले–सावंले लोगों और विकलांगों का मजाक उड़ाना सा बन गया है. पिछले कुछ सालों से कपिल शर्मा यही सब कर-करके काफी नाम और दाम कम चुके हैं. उन्हें हमारे समय के कॉमेडी के बादशाह के तौर पर पेश किया जा रहा है .टीवी […]

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    फंतासी में तालियां बजवाती है ‘फैंटम’
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    ——-सिद्धार्थ शंकर गौतम——— कलाकार: सैफ अली खान, कैटरीना कैफ, मोहम्मद जीशान अयूब निर्देशन: कबीर खान निर्माता: साजिद नाडियाडवाला, सिद्धार्थ रॉय कपूर लेखक: कबीर खान, कौसर मुनीर संगीत: प्रीतम स्टार: 2.5 ‘काश’ एक ऐसा शब्द है जो कल्पनाओं के असीम संसार को आंखों के सामने जीवित कर देता है। हुसैन एस जैदी की किताब ‘मुंबई एवेंजर्स’ […]

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    साहस को पहाड़ से ऊंचा दिखाती है ‘मांझी- द माउंटेन मैन’
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    ——सिद्धार्थ शंकर गौतम——- कलाकार: नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राधिका आप्टे, तिग्मांशु धूलिया, गौरव द्विवेदी, प्रशांत नारायण निर्माता: नीना लथ गुप्ता, दीपा साही निर्देशक: केतन मेहता लेखक: केतन, अंजुम रजबअली, महेन्द्र जाखड़ संगीत: संदेश शांडिल्य, हितेश सोनिक स्टार: 4 अपने मुख्यमंत्री रहते जीतन राम मांझी ने जब यह स्वीकार किया था कि वे मुहसर जाति से हैं और अपनी […]

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    वक्त के साथ सिनेमा में बदलती गई देशभक्ति
    Posted in: फिल्म समीक्षा

    —–सिद्धार्थ शंकर गौतम—— फिल्में समाज का आईना होती हैं और काफी हद तक वह सब दिखाती हैं जो सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं पारिवारिक स्तर पर घटित होता है। हालांकि हिन्दुस्थान में अब सिनेमा की परिभाषा बदल गई है और अब जो बिकता है, उसी को आकर्षक पैकेजिंग के द्वारा दर्शकों के समक्ष परोस दिया जाता […]

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    परिवार की मजबूती का एहसास कराएगी ‘दृश्यम’
    Posted in: फिल्म समीक्षा

    ——सिद्धार्थ शंकर गौतम——- कलाकार: अजय देवगन, श्रेया सरन, तब्बू, रजत कपूर, इशिता दत्ता, कमलेश सावंत निर्माता: कुमार मंगत पाठक, अभिषेक पाठक, अजीत अंधारे निर्देशक: निशिकांत कामत कहानी: जीतू जोसफ गीत-संगीत: विशाल भारद्वाज एक आम इंसान जिसकी दुनिया उसके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, कैसे परिवार पर आए अनचाहे संकट से उसे उबारता है, इसी की […]

  • Review of Masaan by Siddhart Shankar Gautam
    अंतर्मन को टटोलती है ‘मसान’
    Posted in: फिल्म समीक्षा

    ——सिद्धार्थ शंकर गौतम—— कुछ फिल्में होती हैं जो दर्शकों की संख्या को तो तरसती हैं लेकिन जो इन्हें देखते हैं वे बता सकते हैं कि उन्होंने क्या अनुभव किया? यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं कि क्योंकि मैं जिस सिनेमाघर में ‘मसान’ देखने गया, वहां पहले तो मुझे टिकट देने से ही मना कर […]

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