व्यंग

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    स्मार्ट शहर की स्मार्ट बाइक और मेरी फजीहत – ओपी शर्मा
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    स्मार्ट शहर की स्मार्ट बाइक और मेरी फजीहत ओपी शर्मा मेरा भोपाल स्मार्ट सिटी बन रहा है। शुरुआत हो गई है। जर्मनी से 500 स्मार्ट सायकलें आयात कर ली गई है। एक साल से भी अधिक समय हो गया है इन्हें जनता को समर्पित किये हुए। इंडियन एक्सप्रेस अखबार में पढ़ा था कि 2 करोड़ […]

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    भुक्खड़ नहीं होते ईमानदार
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    भुक्खड़ नहीं होते ईमानदार ——-अशोक मिश्र——– केजरी भाई लाख टके की बात कहते हैं। अगर आदमी भूखा रहेगा, तो ईमानदार कैसे रहेगा? भुक्खड़ आदमी ईमानदार हो सकता है भला। हो ही नहीं सकता। आप किसी तीन दिन के भूखे आदमी को जलेबी की रखवाली करने का जिम्मा सौंप दो। फिर देखो क्या होता है? पहले […]

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    सेल्फी वाला पत्रकार नहीं हूं
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    ——-अशोक मिश्र——- घर पहुंचते ही मैंने अपने कपड़े उतारे और पैंट की जेब से मोबाइल निकालकर चारपाई पर पटक दिया। मोबाइल देखते ही घरैतिन की आंखों में चमक आ गई। दूसरे कमरे से बच्चे भी सिमट आए थे। घरैतिन ने मोबाइल फोन झपटकर उठा लिया और उसमें कुछ देखने लगीं। मोबाइल को इस तरह झपटता […]

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    रूसी भाषा में शपथ लूं, तो चलेगा?
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    रूसी भाषा में शपथ लूं, तो चलेगा? —–अशोक मिश्र—— बंगाल में बड़े भाई को कहा जाता है दादा। ऐसा मैंने सुना है। उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में दादा पिताजी के बड़े भाई को कहते हैं। बड़े भाई के लिए शब्द ‘दद्दा’ प्रचलित है। समय, काल और परिस्थितियों के हिसाब से शब्दों के अर्थ बदलते […]

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    राजनीति के चीयरलीडर्स
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    ——अशोक मिश्र——- आज सुबह स्पोट्र्स पेज पर छपी एक चियरलीडर की तस्वीर बड़े गौर से देख ही रहा था। तस्वीर थी भी इतनी मादक कि नजर पड़ते ही वहीं की वहीं ठिठक जाती थी। मैं तस्वीर की मादकता पर लहालोट हो ही रहा था कि बारह वर्षीय बेटे गॉटर प्रसाद ने सवाल दाग दिया, ‘पापा! […]

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    मुंगेरी लाल के पांव में बंधी बिलार
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    ——-अशोक मिश्र——- बचपन में जब मैं दिन भर घूमने के बाद शाम को घर आता था, तो मेरी मां कहती थीं कि इसके पैर में बिलार (बिल्ली) बंधी है। घर में पैर रुकता ही नहीं है। तब मैं उनकी इस कहावत का ठीक-ठीक अर्थ नहीं जानता था। मगर अब अपने पड़ोसी मुसद्दीलाल के सुपुत्र मुंगेरी […]

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    गउमाता मेरे सपने में !!!
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    ——-संजीव परसाई——– आजकल गउमाता का जमाना है। अचानक रातों रात गउमाता महत्वपूर्ण हो चली हैं। हर कोई गउमाता को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे पहले व्यक्त करने को आमादा है। सड़क से लेकर संसद तक गउमाता की ही चर्चा हो रही है। गाय छाप नेता, गाय छाप राजनीति करने में अपने आप को भली प्रकार व्यस्त […]

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    मेढक तौलने की कवायद
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    —–अशोक मिश्र—— आपने कभी मेढक को तुलते देखा है। एक तो बड़ी मशक्कत के बाद पकड़ में आता है। चलो, किसी तरह पकड़ में भी आ गया, तो उस पर काबू रखना तो और भी कठिन। इतना चिकना कि जरा सा हाथ ढीला पड़ा, तो फिसल जाता है। फिर उसे तौलने के लिए तराजू पर […]

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    धीरज रखो, सबका विकास होई
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    —–अशोक मिश्र—— गांव पहुंचा, तो रास्ते में मिल गए मुसई काका। मैंने उन्हें देखते ही प्रणाम किया, तो उन्होंने किसी लोक लुभावन सरकार की तरह आशीर्वाद से लाद दिया। मैंने देखा कि  जिंदगी भर गटापारचा (प्लास्टिक) की चप्पल पहनने वाले मुसई काका स्पोट्र्स शूज पहने मुस्कुरा रहे हैं। मैंने मजाक करते हुए कहा, ‘नथईपुरवा तो […]

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    विकास का फट गया ढोल
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    ——-अशोक मिश्र——- आपने ढोल देखा है! अरे वही जिसे औरतें शादी-ब्याह, मूडऩ, छेदन या तीज-त्योहारों पर बड़ी उमंग और उत्साह के साथ बजाती थीं। अब तो औरतों को ठीक से ढोल बजाना ही नहीं आता। शादी-ब्याह में भी अब तो सिर्फ रस्म अदायगी होती है, वह भी गांव-देहातों में। शहरों में तो ढोल का अब […]

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    कोहिनूर जैसा प्याज
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    ——-अशोक मिश्र——— सन 2019 में भारत के किसी मोहल्ले का एक दृश्य। एक घर में मोहल्ले की चार-पांच महिलाएं बैठी पारंपरिक ढंग से गपिया रही हैं। गपियाने के लिए उन्हें न किसी मुद्दे की तरकार थी, न किसी किसी प्रसंग की। उनकी गपगोष्ठी तो राह चलते भी हो जाया करती थी। दो या तीन महिलाओं […]

  • Cartoon 02.07.2015
    अब तो भैंस भी हो जाएगी डिजिटल
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    ——अशोक मिश्र—— नथईपुरवा गांव में लुंगाड़ा ब्रिगेड (फालतू किस्म के आवारा लड़के) परचून की दुकान के सामने बैठी बतकूचन कर रही थी। उनमें से एक के हाथ में उसी दिन का अखबार था। वह अटक-अटक कर अखबार की हेडलाइंस पढ़ता जा रहा था, ‘परधानमंतरी ने डिजि..टल इनडिया का किया उद..घाटन..। बोले, अब देश भर के […]

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