Monthly Archives: July 2014

  • 280720141
    आईसीएचआर के अध्यक्ष का ‘इतिहास बोध’
    Posted in: राजनीति, शिक्षा

    -अनिल यादव  – नयी सरकार आने के बाद अकादमी क्षेत्र में सबसे त्वरित और केन्द्रीत हमला इतिहास पर हुआ है क्योंकि शासक और विजेता इतिहास को तलवार-बंदूक से अधिक कारगर हथियार मानते हैं। किसी भी समाज की मानसिकता बदल देने में इतिहास की बहुत बड़ी भूमिका होती है, इसलिए हर शासक अपने अनुकूल इतिहास लिखवाने […]

  • 280720142
    बीजेपी में जी हुजूरी करने वालों की जय जय संघ की कोशिश पकड़ भी बने रहे और मलाई भी मिलती रहे
    Posted in: राजनीति, सांप्रदायिकता

    –विवेकानंद- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भले ही बार-बार यह दोहराए कि उसका बीजेपी में कोई दखल नहीं है, लेकिन असलियत हर बार सामने आ जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही है। न न करते धार में संघ के अचानक लिए गए एक फैसले ने साफ कर दिया कि अब आरएसएस वालों के अच्छे दिन […]

  • 280720143
    अपराध के ऑंकड़े, राजनीति का हिसाब और अनियंत्रित वाणी
    Posted in: उत्तर प्रदेश, राजनीति, समाज

    –वीरेन्द्र जैन- सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या किसी भी तरह की दूसरी घटनाओं में मरने वालों से अधिक है और इसके लिए केवल ट्रैफिक विभाग में चल रही अवैध वसूली ही नहीं अपितु राज्यों में सत्तारूढ दल भी बराबर से जिम्मेवार होते हैं क्योंकि व्यावसायिक वाहनों की नियमित वसूली का तय हिस्सा अधिकांश […]

  • 280720144
    लोकतंत्र के लिए खतरनाक है यह आकर्षण
    Posted in: आंतंकवाद, विश्व जगत

    –हरे राम मिश्र- अभी कुछ दिन पहले की बात है, मुंबई के उप नगरीय इलाके कल्याण से कथित तौर पर चार मुस्लिम लड़को के इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एण्ड सीरिया यानी आईएसआईएस की ओर से ईराकी सेना के खिलाफ, ईराक में लड़ने के लिए घर से भाग जाने की खबरें अखबारों में छपीं। आरिफ एजाज […]

  • 280720145
    अल्पसंख्यक कल्याण : कहां तक पहुंचा है कारवां ?
    Posted in: समाज, सरकार

    – सुभाष गाताडे- अल्पसंख्यक कल्याण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का हाल पिछले दिनों संसद के सामने पेश हुआ। पता चला कि इस सिलसिले में आठ साल पहले शुरू की गयी प्रधानमंत्री की 15 सूत्रीय योजना के कई बिन्दुओं पर अभी काम भी नहीं शुरू हो सका है। इतना ही नहीं […]

  • 280720146
    शरियत पर अदालत का फैसला- सुधार की दिशा में बड़ा एक कदम
    Posted in: धर्म, न्यायपालिका

    –जावेद अनीस- 2005 की बात है 28 वर्षीय इमराना के साथ उसके ससुर ने बलात्कार किया, जब यह मामला शरियत अदालत के पास पहुंचा तो उन्होंने फतवा जारी करते हुए कहा,चूंकि इमराना के ससुर ने उससे शारीरिक संबंध स्थापित कर लिए हैं,लिहाजा वह ससुर को अपना पति माने और पति को पुत्र। शरीयत अदालतों द्वारा […]

  • 280720147
    विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करने वाला एक खतरनाक कदम
    Posted in: मध्य प्रदेश, शिक्षा, सरकार

    – एल. एस. हरदेनिया- मध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा में एक ऐसा विधेयक पारित किया है, यदि वह कानून का रूप ले लेता है तो उससे मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्वायक्तता पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने वे सारी शक्तियां जिनके कारण विश्वविद्यालय स्वायक्त होते हैं स्वयं में निहित […]

  • 280720148
    गंगा के विनाश की तैयारी
    Posted in: पर्यावरण

    –डॉ. महेश परिमल- सरकार ने गंगा को प्रदूषणमुक्त करने की दिशा में पहल करनी शुरु कर दी है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने प्रदूषण फैलाने वाली करीब 48 कारखानों को बंद करने का आदेश दिया है। गंगा नदी के इस मामले में ही पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में जल संसाधन, […]

  • 280720149
    अच्छे दिन आने एवम् सुशासन के नाम पर जन मानस से छलावा
    Posted in: राजनीति

    – विजय कुमार जैन- भारत की जनता ने नरेन्द्र मोदी को अच्छे दिन लाने,सुशासन देने के लोक लुभावन वायदे के आधार पर चुना है। देश के मात्र 31प्रतिशत मतदाताओं के मत से यह सरकार बनी है। विगत दो माह में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने ऐसा कोई ठोस निर्णय लेने का प्रयास […]

  • 2807201410
    कथित विकास पर सवाल
    Posted in: आर्थिक जगत, गरीबी

    -शशांक द्विवेदी  – पिछले दिनों सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के बेहद गरीब लोगों में से एक तिहाई भारत में रहते हैं तथा यहां पांच साल से कम उम्र में मौत के मामले सबसे अधिक होते हैं। इस रिपोर्ट ने देश के कथित विकास पर बड़े सवाल […]

  • 2807201411
    यह संवेदनशीलता है या प्रहसन!
    Posted in: समाज

    –वरुण शैलेश- इसे चालबाजी कहें या संवेदनशीलता? सवाल कठिन है। इसे नए दौर का बाजारु उपभोक्तावाद नाम देकर हल्के में भी तो नहीं लिया जा सकता। लखनऊ के बाहरी इलाके में बर्बर बलात्कार कांड के बाद पीड़ित महिला की खून से लथपथ निर्वस्त्र लाश की तस्वीर सोशल मीडिया पर जिस तरह प्रसारित हुई उस पर […]

  • 2807201412
    साहित्य सिर्फ साहित्य और साहित्यकार सिर्फ साहित्यकार होता है
    Posted in: महिला, समाज

    -अंजलि सिन्हा- हाल में नोबेल पुरस्कार विजेती दक्षिण अफ्रीकी साहित्यकार नादिन गोर्दिमेर का देहान्त हो गया। दक्षिण अफ्रीका के रंगभेदी शासन के खिलाफ न केवल अपने साहित्य के जरिए बल्कि अन्य सक्रियताओं के जरिए विरोध करनेवाली नादिन के बारे में यह बात मशहूर है कि उन्होंने लेखिकाओं के लिए आरक्षित पुरस्कार से अपना एक उपन्यास […]

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