Monthly Archives: August 2016

  • mandsaur
    कैसे रुकें “मंदसौर” जैसी घटनायें
    Posted in: दलित, सांप्रदायिकता

    हाल के दिनों में गौरक्षा के नाम पर दलितों और अल्पसंख्यकों पर हमले और उन्हें आतंकित के मामले बढ़े हैं. इसी कड़ी में पिछले दिनों मध्यप्रदेश के मंदसौर रेलवे स्टेशन पर तथाकथित गौरक्षकों की बेलगाम गुंडई एक बार फिर देखने को मिली जहाँ गौ-मांस ले जाने के आरोप में दो मुस्लिम महिलाओं को सरेआम पीटा […]

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    सेल्फी के खुमार में खोती जिंदगी
    Posted in: जीवन शैली

    94 मिलियन सेल्फी प्रतिदिन दुनिया में क्लिक होते हैं। सेल्फी यानी खुद की फोटो खींचना। भारत ही नहीं पूरे देश में इसके प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ी है लेकिन युवाओं में इसका खुमार सर चढक़र बोलता है। युवाओं के अलावा शायद ही कोई ऐसा वर्ग होगा जो इसके खुमार से अछूता हो। वर्ष 2013 में […]

  • गुजरात में दलितः असमानता और हिंसा के शिकार
    Posted in: दलित, सांप्रदायिकता

    गत 11 जुलाई को गुजरात के ऊना शहर में ‘मानव भक्षकों’ व ज़बरिया वसूली करने वालों के गिरोह ने-जो स्वयं को गौरक्षक बता रहे थे-एक दलित परिवार के सात सदस्यों की क्रूरतापूर्वक पिटाई की। उन्हें मोटा समधियाला गांव में एक मरी हुई गाय की खाल उतारने के लिए लोहे की छड़ों, लाठियों और चाकू से […]

  • rain1
    न मानसून बदला है और न हम
    Posted in: पर्यावरण

    बादल जब आते हैं, झमाझम या रिमझिम बरसते हैं, तब केवल वन-उपवन का मयूर ही नहीं, हमारा मन-मयूर भी नाच उठता है। दिल दुआ करता है, प्रार्थनाएं गूंज उठती हैं। काश, हर बार होती अच्छी बारिश और छोड़ जाती अपने पीछे अनगिनत हसीन किस्से हमारी खुशी और तरक्की के, लेकिन जब बारिश लाने वाला मानसून […]

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