वाराणसी चुनाव हर हाल में जीत लेने के लिए जुटी मोदी की सेना

1:58 pm or April 7, 2014
070420147

शेष नारायण सिंह-

लोकसभा चुनाव 2014 अब वास्तविक दौर में पंहुच गया है। और किसी पार्टी ने प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित नहीं किया है इसलिए इस पद के इकलौते दावेदार नरेंद्र मोदी पूरे देश में घूम रहे हैं और तरह तरह के आंकड़े दे रहे हैं , तरह तरह की बातें कह रहे हैं। उनमें से कुछ बातें सच भी हैं। लेकिन चुनाव सभाओं में कही गई बातों को आम तौर पर सच की कसौटी पर नहीं कसा जाता। पिछले छ: महीने से नरेंद्र मोदी की धुंआधार सभाओं का मकसद उनके पक्ष में लहर बनाना था जो नहीं बन पाई है। क्योंकि अगर लहर बन गयी होती तो एक एक सीट पर जो जाति और धर्म के आधार पर हिसाब किया जा रहा है ,वह न होता। लहर के चुनाव में जाति और धर्म का कोई महत्व नहीं रह जाता। मुश्किलें यहाँ तक हैं कि खुद वाराणसी की सीट के लिए जातियों का हिसाब किताब किया जा रहा है। करीब सवा लाख कुर्मी मतदाताओं के वोट लेने के चक्कर में कुर्मी नेता स्व. सोने लाल पटेल की पार्टी अपना दल से समझौता किया गया है। बदले में उनकी बेटी को दो लोकसभा सीटें दी गयी हैं। इस तरह से ओबीसी वर्ग की एक प्रमुख जाति का समर्थन वाराणसी समेत कई पूर्वी जिलों में अपने पक्ष में करने की कोशिश की गई है। पता चला है कि वाराणसी सीट से बाहुबली मुख्तार अंसारी भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं । मुख्तार अंसारी के वाराणसी से चुनाव लड़ने का मुख्य लाभ बीजेपी उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को होगा क्योंकि वे मुसलामानों के वोट काटेगें।

सब को मालूम है कि मुसलमानों के करीब साढ़े तीन लाख रजिस्टर्ड वोटों में से भारी संख्या में वोट बीजेपी के खिलाफ पड़ने वाला है। अगर इन वोटों में से बड़ी संख्या में वोट किसी ऐसे उम्मीदवार के खाते में चले जाएँ जिसके जीतने की कोई सम्भावना न हो तो वह नरेंद्र मोदी की जीत के लिए सही होगा। अभी पता नहीं चला है कि मुख्तार अंसारी को चुनाव में उतारने के लिए किसने क्या काम किया है। यह पक्का है कि अगर मुख्तार अंसारी चुनाव में आखिर तक बने रहते हैं तो नरेंद्र मोदी के लिए वाराणसी से चुनाव जीतना बहुत आसान हो जाएगा क्योंकि सबसे बड़े वोट वर्ग के रूप में मुसलमान नरेंद्र मोदी के लिए बड़ी चुनौती हैं और उनके वोट को कई उम्मीदवारों में बाँट देने की रणनीति पर बीजेपी के रणनीतिकार गंभीरता से कोशिश कर रहे बताये जाते हैं। इस काम में नरेंद्र मोदी के मुख्य शिष्य अमित शाह ही लगे हुए हैं।

इस बात में दो राय नहीं है की वाराणसी की लड़ाई बहुत ही दिलचस्प होने वाली है। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने पिछले दिनों वाराणसी में सभा करके एक सन्देश साफ दे दिया है कि बीजेपी उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के लिए काशी की लड़ाई आसान नहीं होगी। केजरीवाल दिन भर पूरे शहर में घूमते रहे , मदिरों के दर्शन करते रहे, गंगा जी में स्नान किया और शाम को पौने छ: बजे बेनिया बाग के ऐतिहासिक मैदान में इकठ्ठा करीब 25 हजार लोगों के सामने कांग्रेस और बीजेपी के ऊपर जबरदस्त राजनीतिक हमला किया। उन्होने मीडिया को भी नहीं बख्शा और कहा कि मीडिया के लोग नरेंद्र मोदी की फर्जी छवि बनाने के लिए दिनरात प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी के उस विकास की पोल भी खोलने की कोशिश की जिसको नरेंद्र मोदी और बीजेपी वाले गुजरात माडल के रूप में प्रचारित कर रहे हैं।  नरेंद्र मोदी को भी अरविन्द केजेरीवाल के वाराणसी प्रवास की पूरी जानकारी थी। शायद उनको यह भी अंदाज था कि अरविन्द केजरीवाल उनके वोटों का नुक्सान भी कर सकते हैं। इसीलिये नरेंद्र मोदी ने जम्मू की अपनी सभा में अरविन्द केजरीवाल पर बहुत ही भारी हमला किया और उनको पाकिस्तान का एजेंट तक कह दिया ।यह बहुत ही गंभीर आरोप है और सौ फीसदी नरेंद्र भाई मोदी की खिसियाहट की जमीन से पैदा हुआ है क्योंकि अगर कोई व्यक्ति पकिस्तान के एजेंट के रूप में पहचान लिया जाएगा तो उनको जेल के बाहर रहने का अधिकार नहीं रह जाता। नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी धार्मिक धरुवीकरण की राजनीति के विशेषज्ञ माने जाते हैं। इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि किसी को पाकिस्तानी एजेंट कहकर धार्मिक धरुवीकरण की कोशिश की जा रही है । अगर यह सच है तो देश की न्यायप्रिय जनता को संभल कर रहना पडेगा ।

नरेंद्र मोदी के खिलाफ सभी पार्टियों की और से केवल एक मजबूत उम्मीदवार उतारने की चर्चा भी चल रही है । अगर मजबूत विपक्षी उम्मीदवार के रूप में अरविन्द केजरीवाल सामने आते हैं तो नरेंद्र मोदी की संभावित जीत में मुख्तार अंसारी का महत्वपूर्ण योगदान होगा ।उधर बीजेपी भी वाराणसी सीट पर अरविन्द केजरीवाल को कमजोर करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है । दिल्ली विधान सभा के सदस्य विनोद कुमार बिन्नी ने भी बताया कि वे भी वाराणसी से चुनाव लड़ सकते हैं । उनका कहना है की वे वाराणसी जाकर सबसे पूछेगें कि अरविन्द केजरीवाल के कथित झूठ का परदाफाश करने के लिए वे वाराणसी से चुनाव लड़ना चाहते हैं लेकिन अगर जनता चाहे तो वे चुनाव में उम्मीदवार बने बिना भी अरविन्द केजरीवाल को बेनकाब कर सकते हैं और उनके वोट कम करने में मदद कर सकते हैं। एक बहुत ही सम्माननीय राजनीतिक संवाददाता ने मुझे बताया है कि बिन्नी जी बीजेपी में शामिल होने वाले हैं और वे अरविन्द केजरीवाल को कमजोर करके अपनी भावी पार्टी का ही काम कर रहे हैं ।शहर बनारस के जानकार जानते हैं कि जाहिर है कि वाराणसी सीट पर बिन्नी जी को कुछ नहीं मिलने वाला है लेकिन जहां बहुत ही मामूली वोटों से हार जीत हो रही हो ,वहां थोड़े बहुत वोट खराब कर पाना भी बड़ी योग्यता मानी जायेगी । अरविन्द केजरीवाल के बारे में बीजेपी वाले कहते पाए जा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़कर उनको मीडिया में छाये रहने का मौका मिलेगा और चुनावी चंदा भी ज्यादा मिलेगा । एक खबर के मुताबिक जबसे केजरीवाल ने वाराणसी से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है ,उनको प्रतिदिन मिलने वाले चंदे में भारी वृध्दि हुयी है ।

अभी तक के संकेतों से तो नहीं लगता कि वाराणसी में नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए सभी पार्टियां अरविन्द केजरीवाल को समर्थन करेगीं। कांग्रेस वाराणसी सीट से अपने उम्मीदवार के बारे में गंभीरता से विचार कर रही है ।हालांकि कांग्रेस के एक वर्ग के नेता कोशिश कर रहे हैं कि वाराणसी सीट को मोदी बनाम केजरीवाल मुकाबला मानकर किसी लोकल उम्मीदवार को चुनाव में उतार दिया जाए और अपनी ताकत को अन्य सीटों पर लगाया जाए। लेकिन वहीं कांग्रेस के बड़े नेताओं का दूसरा वर्ग ऐसा भी है जिसकी राय है कि नरेंद्र मोदी को वाराणसी में जबरदस्त मुकाबला दिया जाए और उनको हराने के लिए चुनाव में मजबूत कांग्रेसी उम्मीदवार उतारा जाए। इस बात पर सवाल पूछे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि कुछ लोकल उम्मीदवारों पर भी चर्चा हो रही है लेकिन दिल्ली से भी किसी हाई प्रोफाइल उम्मीदवार को भेजा जा सकता है ।दिल्ली से जाने वाले कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का नाम चर्चा में है ।कांग्रेस के बड़े नेताओं का कहना है कि वाराणसी में मोदी को जबरदस्त टक्कर केवल दिग्विजय सिंह दे सकते हैं । वाराणसी में सबसे बड़ा वोट बैंक व्यापारियों की वैश्य जाति का है । करीब साढ़े तीन लाख वैश्य आम तौर पर नरेंद्र मोदी के पक्ष में हैं । अपना दल वाले सोने लाल पटेल की बेटी अनुप्रिया पटेल से बीजेपी ने चुनावी समझौता कर लिया है और अब उम्मीद की जा रही है कि उनकी बिरादरी के सवा लाख वोट नरेंद्र मोदी को मिल जायेगें । महान दल वाले से भी बात चल रही है और कोशिश है कि वाराणसी संसदीय क्षेत्र के मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड करीब 75 हजार मौर्य वोट भी उनको मिल जायेगें। कांग्रेस के नेताओं की सोच है कि दिग्विजय सिंह को वाराणसी के करीब चार लाख मुसलमानों का वोट मिलेगा। इसके अलावा उनको समाजवादी पार्टी का समर्थन भी मिल सकता है क्योंकि रायबरेली, अमेठी , कन्नौज और मैनपुरी में दोनों पार्टियों में समझौता है । इस बात की संभावना है कि वाराणसी में भी मुलायम सिंह यादव मुसलमानों के हीरो दिग्विजय सिंह को समर्थन कर देगें । वाराणसी में करीब डेढ़ लाख यादव मतदाता है । दिग्विजय सिंह के वाराणसी में उतर जाने के बाद मुख्तार अंसारी को भी सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा क्योंकि इस बात की पूरी संभावना है कि अगर दिग्विजय सिंह मैदान में हैं तो मुस्लिम समुदाय किसी ऐसे आदमी को वोट नहीं देगा जो नरेंद्र मोदी को जिताने के लिए ही चुनाव लड़ रहा हो।और मुख्तार अंसारी के बारे में यही माना जा रहा है कि वे नरेंद्र मोदी की मदद के लिए ही आगे बढ़ रहे हैं।

वाराणसी में दिग्विजय सिंह को एक और लाभ मिल सकता है ।उनके पूर्वज संत पीपा जी महाराज संत रामानंद के बारह चेलों में प्रमुख थे। पीपाजी महराज खीची चौहान थे और राजा थे। दिग्विजय सिंह उनके वंशज हैं। काशी में रामानंदी सम्प्रदाय का भारी असर है। जानकार बताते हैं कि रामानंदी परम्परा के अनुयायियों के एक वर्ग का समर्थन दिग्विजय सिंह को मिलेगा इसके अलावा उनके नाम पर कोई भी धार्मिक धृवीकरण नहीं किया जा सकता।द्वारका के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी भी दिग्विजय सिंह के करीबी हैं। उनकी हैसियत भी दिग्विजय सिंह को ताकत दे सकती है  वाराणसी में भूमिहारों के करीब डेढ़ लाख वोट हैं और उनके सबसे बड़ा स्थानीय राजनेता अजय राय वाराणसी से ही कांग्रेसी विधायक हैं और दिग्विजय सिंह के बड़े समर्थक हैं। उनका लाभ भी कांग्रेस के उम्मीदवार को मिल सकता है । कबीरपंथी सम्प्रदाय के मुखिया संत विवेक दास से भी दिग्विजय सिंह के अच्छे सम्बन्धहैं और वहां भी उनको सम्मान मिल सकता है ।ऐसी हालत में वाराणसी की लड़ाई बीजेपी और उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आसान बिलकुल नहीं होगी क्योंकि जिस मीडिया की मदद लेकर देश में मोदी की लहर बनाने की कोशिश की जा रही थी , उसी मीडिया ने अब बीजेपी की कमजोरियों को चर्चा का विषय बना कर वहां मोदी की उम्मीदवारी को लहर से वंचित कर दिया है

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