क्या ऐसे ही शुद्ध होगी संसद…?

7:36 pm or November 17, 2014
Meghwal

– विवेकानंद –

सत्ता मिलने के बाद वादों से मुकर जाना राजनीति का नया पैंतरा नहीं है, इसलिए नरेंद्र मोदी सरकार जो कर रही है उसमें बहुत विस्मयकारी कुछ भी नहीं है, लेकिन सपनों को किस हद तक उभार दिया जाए और फिर उन्हें किस बेरहमी से और किस हद तक रौंदा जाए। चुनाव के पूर्व नरेंद्र मोदी और समूची बीजेपी ने उनके बताए मंत्रों पर चलते हुए जनता को सुशासन और अच्छे दिनों के बहुत से सपने दिखाए थे। लेकिन सत्ता मिलने के बाद सरकार उसके उलट चल रही है। अंतराष्ट्रीय कारणों से घट रहे डीजल और पेट्रोल के दामों को अपनी सफलता गिनाने और इसे ही अच्छे दिन करार देकर, इसी आड़ में वह सब कर रही है जिसे राष्ट्रवाद, संसद के शुद्धीकरण और ईमानदारी का ढोल पीटने वालों की बेशर्मी कहा जा सकता है। पिछले 9 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ही तमाम वादों को दरकिनार करते हुए ऐसे-ऐसे लोगों को मंत्री बना दिया जिनके खिलाफ हत्या से लेकर बलात्कार तक के मामले दर्ज हैं। जबकि पहली बार संसद की सीढिय़ों पर माथा झुकाकर चढऩे वाले ने पहले ही दिन संसद के शुद्धिकरण का दावा किया था।

चुनाव में नरेंद्र मोदी का नारा था सुशासन। तब कहा गया था कि संसद को दागियों से मुक्त बनाएंगे। लेकिन ऐसा लगता है कि मोदी हत्या की कोशिश, आपराधिक धमकी, धोखाधड़ी, बलात्कार और हत्या जैसे संगीन मामलों में आरोपी नेताओं से देश में सुशासन लाना चाहते हैं। यह आशंका इसलिए बड़ी है क्योंकि मोदी कैबिनेट में ऐसे मंत्रियों की संख्या एक दो नहीं बल्कि करीब एक तिहाई है। नौ नवंबर को जिन 21 मंत्रियों ने शपथ ली उनमें से सात मंत्रियों के खिलाफ भी अदालत में आपराधिक केस चल रहे हैं। यानी 66 सदस्यीयों वाली कैबिनेट में दागी मंत्रियों का अनुपात बढ़कर करीब एक तिहाई हो गया है।

मोदी कैबिनेट में कम से कम पांच मंत्रियों के खिलाफ  रेप और सांप्रदायिक हिंसा जैसे गंभीर मामले लंबित हैं। और उस पर तुर्रा यह है कि कैबिनेट में अपराधियों के शामिल होने की बात पूरी तरह निराधार है। ये मामले आरोप आधारित हैं, अपराध आधारित नहीं। प्रधानमंत्री ने स्वयं इन मंत्रियों की भली-भांति जांच की है। यह बात अरुण जेटली ने तब कही है जबकि कई सांसदों ने चुनाव पूर्व अपने हलफनामे में इन बातों को स्वीकार किया है। मोदी सरकार में नए मानव संसाधन राज्य मंत्री रामशंकर कठेरिया के खिलाफ  करीब 23 आपराधिक मामले हैं। इनमें हत्या की कोशिश और धार्मिक और जातीय विद्वेष बढ़ाने जैसे गंभीर आरोप भी हैं। यह बात कठेरिया ने खुद चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में स्वीकार की है। इसी तरह नए रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री हंसराज अहिर पर भी 20 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। इनमें राज्य के खिलाफ  युद्ध छेडऩे, धमकाने और विद्रोह को उकसाने जैसे गंभीर मामले भी हैं। बिहार के नवादा से सांसद मोदी भक्त गिरिराज सिंह जी, इन्हें मोदी का विरोध कतई पसंद नहीं है। इन्हीं ने चुनाव से पूर्व कहा था कि जो मोदी विरोधी हैं उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। तब मोदी ने इनकी बात का विरोध किया था, लेकिन अब बात ठंडी हो चुकी है, चुनाव जीत चुके हैं, इसलिए अब यह निष्पाप हो चुके हैं। इन्हीं गिरिराज जी ने अपने घर से 50 हजार रुपये चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन जब पुलिस ने चोरों को 1 करोड़ 14 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया तो इन्होंने बताया कि यह पैसा उनका नहीं, उनके भतीजे का था। मामला श्रीमान नितिन गडकरी द्वारा चुनाव पूर्व धमकाए गए आयकर विभाग के पास है, जांच कहां तक हुई और कितनी हुई कुछ पता नहीं। गिरिराज सिंह अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री बना दिए गए हैं। ऐसा ही एक और ईमानदार नाम है, जेपी नड्डा। हरियाणा के आईएएस खेमका का भरपूर समर्थन और उनके प्रति संवेदना जताने वाली बीजेपी के इस नेता ने एम्स के विजिलेंस अफसर संजीव चतुर्वेदी को हटवाने में पूरा जोर लगाया था। मीडिया रिपोर्ट में यह बात साफ हो चुकी है कि चतुर्वेदी ने आईएएस अफसर विनीत चौधरी जो पहले एम्स के डिप्टी डायरेक्टर थे, के खिलाफ  एक भ्रष्टाचार-विरोधी जांच भी शुरू की थी। चौधरी के खिलाफ  हेरा-फेरी के मामले में जनवरी में एक सीबीआई केस भी दर्ज हुआ था। चौधरी वही अफसर हैं, जो हिमाचल प्रदेश में नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए राज्य के स्वास्थ्य सचिव थे। जीत के बाद बेशर्मी केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानि एनसीपी को नैचुरल करप्ट पार्टी बताया था। अब उसी नैचुरल करप्ट पार्टी से स्टैटिजिक समर्थन लेकर विश्वासमत भी हासिल कर लिया। जबकि मुख्य विपक्ष शिवसेना और कांग्रेस वोटिंग की मांग कर रही थी। सत्ता के लिए किसी भी हद तक चले जाने का यह नया रिकॉर्ड है और यदि ऐसे ही चलता रहे तो बीजेपी सत्ता की लालच में एक और रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रही है। चुनाव पूर्व कई अपराधियों से हाथ मिलाने वाली बीजेपी अब जम्मू-कश्मीर में सत्ता पाने के लिए अलगाववादियों से भी गलबहियां करने को तैयार दिखाई दे रही है। राष्ट्रवाद का झंडा उठाने वाली यह वही पार्टी है जिसने पाकिस्तान के साथ वार्ता इसलिए रद्द की थी क्योंकि पाकिस्तान दूतावास ने कश्मीर के अलगाववादियों से मुलाकात की थी। लेकिन सत्ता के लिए अब अलगाववादियों की दोस्ती से उसे परहेज नहीं दिखाई देता। खैर: यथा राजा तथा प्रजा जैसा मामला है। जब पार्टी का कप्तान ही आरोपों के दायरे में है तो फिर उसकी फौज भी वैसी ही होगी। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ  भी फर्जी एनकाउंटर का केस चल रहा है और मामले में एक बार वह गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं। बावजूद इसके उन्हें पार्टी का सर्वेसर्वा बना दिया गया। चलते-चलते जरा बेशर्मी का भी एक नमूना देखते चलें। छत्तीसगढ़ में एक नसबंदी कैंप में 13 महिलाओं की मौत होती है। कई महिलाएं जिंदगी और मौत से अस्पताल में जूझ रही हैं और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जब इन महिलाओं को देखने, उनका हालचाल पूछने जाते हैं तो ऐसे मुस्कराते हैं जैसे कोई रोमांटिक फिल्मी सीन देख रहे हों। और उससे भी शर्मनाक यह कि राज्य के मुख्यमंत्री अपने स्वास्थ्य मंत्री का बचाव करते हैं। बहरहाल सवाल यह है कि यह बेशर्मी आखिर किस हद तक जाएगी। क्या अंतराष्ट्रीय हालातों के कारण घट रहे पेट्रोल डीजल के दामों की आड़ में यह और आगे भी चलती रहेगी? क्या जनता कभी इसे समझ भी पाएगी या फिर मामूली से राहतों को ही सबकुछ मान लेगी।

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