सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से पसरता आतंकवाद

12:01 am or December 22, 2014
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– डॉ. महेश परिमल –

भारत में अपने पांव पसारता आतंकवाद के पीछे स्लीपर यूनिट्स जवाबदार है, ऐसा बार-बार कहा जाता है। पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद ऐसे स्लीपर यूनिट्स के कारण उसके हमले सफल हुए हैं, यह भी देखने में आया है। अब इस स्लीपर यूनिट्स नए स्वरूप में हमारे सामने आया है। प्रो. इस्लामिक स्टेट (आईएस) के ट्वीटर एकाउंट को चलाने वाला बंगलुरु का एक युवा इंजीनियर है, यह जानकार लोगों को सदमा लगा। काफी समय से कहा जा रहा है कि भारत में आतंकवाद अब एक नए रूप में अपने पांव पसार रहा है, लेकिन इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया। मुृम्बई में हुए हमले में कितने भारतीयों का सहयोग था, यह अभी तक सामने नहीं आया है। इस तरह के छद्म आतंकवाद ने हमारे देश को बहुत ही नुकसान पहुंचाया है। पहले हमें घर में घुसे आतंकियों को पकड़ना है, उसके बाद हम विदेशी आतंकवादियों को पकड़ने में अपनी ऊर्जा लगाएं, तो ही बेहतर होगा।

भारत में मुस्लिम खुश है, ऐसा सरकारी प्रचार भी काफी समय से हो रहा है। बेंगलुरु की घटना इसकी पोल खोेलती है। सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से वैश्विक प्लेटफार्म का गलत उपयोग हो रहा है। देश के कोने में कुछ ऐसा हो रहा है, िजसे भारत विरोधी हरकत कहा जा सकता है। सरकार अब तक सीमा पर होने वाली घुसपैठ को रोकने में असमर्थ रही है, तो सोशल नेटवर्किंग पर होने वाले आतंकवाद को किस तरह से पहचान पाएगी? इंटरनेट माध्यम से मिलने वाली आजादी का दुरुपयोग करने वाले अनेक तत्व हैं, जिन पर सरकार ने अभी तक दृष्टि ही नहीं डाली है। इंटरनेट पर दिखाए जाने वाली पोर्नोग्राफी के खिलाफ आवाज उठाने वाले आतंकी हरकतों के खिलाफ आवाज नहीं उठा रहे हैंं। इंटरनेट पर हेकर्स और धोखाधड़ी करने वाले जितने अधिक सफल हुए हैं, उतना ही सफल आतंकवादी भी रहे हैं। इंटरनेट इनके लिए एक खिलौना है, जिसके बल पर आज आतंकवाद पसर रहा है। देश में इस समय इंटरनेट के ज्ञाता इतने अधिक हैं कि उनकी प्रतिभा का गलत इस्तेमाल भी होने लगा है। इसके पीछे युवाओं की बेरोजगारी भी शामिल है।

स्लीपर यूनिट्स कें कारण पहचान मुश्किल होती है, ये कथित रूप से राष्ट्रभक्त बनकर भीड़ में शामिल हो जाते हैं और चुपचाप आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम करते रहते हैं। आतंकवादियों के पास ऐसे स्लीपर यूनिट्स की सूची होती है, आतंकवाद के प्रचार-प्रसार के लिए इनका भरपूर दुरुपयोग होता है। आतंकी संगठनों से इन्हें धनराशि भी मिलती है। कई बार आतंकवादी इन स्लीपर यूनिट्स का इस्तेमाल हमला करने के पहले रेकी करने के लिए करते हैं। स्लीपर यूनिट्स का आशय ही है, सुसुप्त अवस्था में पड़े हुए कीटाणु होता है। जब बारिश होती है, तभी ये सक्रिय हो जाते हैं। फिल्म ‘द वेडनेस डे’ में नसीर कहते हैं कि आज इंटरनेट पर बम बनाने की कई विधियां एक क्लिक से मिल जाती हैं। एक साबुन भी बम बनाने में काम आ सकता है। दूसरी ओर अब तो लोग और भी आगे बढ़ गए हैं, वे अब अणु बम बनाने की तकनीक भी इंटरनेट पर ढूंढने लगे हैं। वह भी उन्हें मिल जाती है।

24 साल का मेहदी समरु विश्वास पकड़ा गया, तब उसके साथी भी इसे सच को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। किराए के एक कमरे में रहने वाला इस युवा के पिता भी यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनका बेटा आतंकी गतिविधियों में संलिप्त है। इस युवा की हरकतों पर गौर किया जाए, तो इसे जो काम सौंपा गया था, उसे वह बखूबी अंजाम देता था। घंटों तक वह ट्वीटर पर ही उलझा रहता था। ईराक और सीरिया में आईएस को मिलने वाली सफलता की वह प्रशंसा करता। बेंगलुरु पुलिस ने जब मेहदी की गिरफ्तारी की, तो उसके माता-पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को फंसाया गया है। वह धार्मिक हो सकता है, पर कट्‌टरपंथी कतई नहीं। वह मदरसा भी नहीं जाता। ऐसा हर माता-पिता कहते हैं। उन्हें पता ही नहीं रहता कि उनकी संतान कब आतंकवाद के शिकंजे में फंस चुकी है। गिरफ्तारी के बाद ही पता चलता है कि संतान ने क्या गुल खिलाए हैं?

@shamiwitness के ट्वीटर पर वह अपना एकाउंट चलाता था। जब पुलिस काे पता चला कि यह एकाउंट भारत से आपरेट किया जा रहा है, तब ट्वीटर से इस एकाउंट की जानकारी मांगी गई। परंतु ट्वीटर ने तुरंत ही कोई सहायता नहीं दी। दूसरी तरफ हमारे देश की साइबर पुलिस ने इस समस्या का समाधान करते हुए मेहदी को खोज निकाला। इस संबंध में सबसे पहले ब्रिटेन के एक चैनल फोर ए ने कहा था कि इस्लामिक स्टेट की जानकारी देने वाले ट्वीटर को चलाने वाले को रोज 20 लाख लोग देखते हैं। जेहादियों और उनके समर्थकों के बारे में जानकारी भी ये ट्वीटर एकाउंट देता है। चैनल फोर ए ने यह जानकारी नहीं दी कि यह एकाउंट भारत का है, पर इस एकाउंट को भारत से हेंडल किया जाता है, यह भी सच है। इसे चलाने वाले का नाम मेहदी है। साइबर पुलिस ने मेहदी नाम से ही सक्रिय होकर उस तक पहंुचने में सफलता प्राप्त की।

बेंगलुरु से गिरफ्तार मेहदी कट्‌टरपंथी समर्थकों की भावनाओं को दूसरों तक पहुंचाने में मदद करता था। आखिर वह किससे जानकारी प्राप्त करता था, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है, पुलिस इसकी जांच कर रही है। आश्चर्य की बात यह है कि जिसका फेसबुक एकाउंट पित्जा और जोक्स से पूरम्पूर हो, उसका ट्वीटर एकाउंट इतना अधिक विस्फोटक किस तरह से हो सकता है? अफसोस इस बात का है कि आईएस का ट्वीटर एकाउंट चलाने वाले की धरपकड़ का विरोध हो रहा है। धरपकड़ करने वाली बेंगलुरु पुलिस को धमकियां मिल रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि युवा इंजीनियर मेहदी का साथ देने वाले बहुत से लोग हमारे ही देश में हैं। हमें ऐसे लोगों पर नजर रखनी होगी। जो देश के भीतर रहकर देश के खिलाफ काम करते हैं। ऐसे लोगों का ट्वीटर एकाउंट की भी जांच होनी चाहिए, ताकि इस षड्यंत्र में कौन-कौन शामिल हैं, यह पूरा देश जान सके।

आईएस की कारगुजारियों से जुड़े हुए महाराष्ट्र के युवा सशरीर सीरिया गए थे, यह दर्शाता है कि भारतीय युवाओं को आतंकवाद में झोंकने के लिए कतिपय शक्तियां सक्रिय हैं। युवाओं के जोश और उत्साह का कुछ लोग पोषण कर रहे हैं। यह समस्या अब हर देश की हो गई है। हर देश में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो आतंकी गतिविधियों में छद्म रूप से संलग्न होते हैं। अपनी तरफ से ये पूरी मदद भी करते हैं। ऐसे लोगों के चेहरे बेनकाब होने ही चाहिए। ट्वीटर पर असामाजिक लोगों का वर्चस्व बढ़ रहा है, ऐसे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जानी चाहिए। भारतीय प्रजातंज के नाम पर बहुत कुछ ऐसा भी हो रहा है, जिसे नहीं होना चाहिए।

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