तिहाड़ जेल का वह अनोखा कैदी

6:33 pm or September 15, 2014
Sahara

डॉ. महेश परिमल

बड़े-बूढ़े कह गए हैं कि कभी किसी गरीब की हाय नहीं लेनी चाहिए। वह कभी न कभी अपना असर दिखाती ही है। इसमें कई बार भले ही देर हो जाए, पर इसमें कभी अंधेर नहीं होता। सोचो, जिस व्यक्ति के नाम से सरकार चलती हो, जिसके बड़े-बड़े नेताओं से सीधा सम्पर्क हो। जो देश के प्रधानमंत्री से सीधी बातचीत करता हो। राज्य के वित्तमंत्री जिससे मिलकर बजट तैयार करते हों, मुख्यमंत्री उनके बाएं हाथ की तरह हों, यदि वह सीखचों के पीछे चला जाए और सुप्रीमकोर्ट उसे जेल में ही सारी सुविधाएं मुहैया कराए, उसकी स्थिति क्या होगी? जी हां बात हो रही है सहारा प्रमुख सुब्रतो राय की। सारी सुविधाओं के बीच आज वे केवल एक कैदी ही हैं। अपनी सम्पत्ति बेचने के लिए उन्हें जेल में ही एक ऑफिस, जिसमें कंप्यूटर, इंटरनेट आदि की सुविधा है, दे रखी है। ताकि वे इस माध्यम से अपनी सम्पत्ति बेचकर गरीबों से लिया गया धन वापस कर सकें। एक अरबपति कैदी। कोई काम नहीं आई इतनी पहचान। काम आई तो गरीबों की हाय। इस हाय ने उसे कहां से कहां पहुंचा दिया।

जेल में रहकर माफिया अपनी धाक बाहर जमाता है। ऐसे लोगों के लिए जेल और घर में कोई फर्क नहीं होता। यदि कोई दो-तीन बार जेल हो आया, तो वह वहां के कर्मचारियों से भी अच्छी जान-पहचान कर लेता है। जेल में बैठकर राजनीति की शतरंज बिछाई जा सकती है और खेल में जीता भी जा सकता है। बिहार-उत्तर प्रदेश के नेताओं ने जेल में रहकर चुनाव लड़ा है और जीता भी है। इस मामले में वहां के नेता उस्ताद हैं। चारा घोटाले में फंसे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने कार्यकाल में जिस जेल का उद्घाटन किया था, उसी जेल में उन्होंने सजा भी भुगती है। वैसे भी अब जेल जाना कोई बड़ी बात नहीं है। अब वहां सभी तरह के लोग जाने लगे हैं। जेल से लौटे व्यक्ति के लिए समाज में रहना अब अपमानजनक नहीं रहा। अब तो बड़े-बड़े अपराधी यदि जेल पहुंच जाए, तो उन्हें अपने परिवार की चिंता ही नहीं रहती। अब जेल जाने के पहले अपराधी अपने परिवार के लिए बहुत-कुछ ऐसा करके जाते हैं, जिससे परिवार पल जाए। लेकिन देश के इतिहास में पहली बार तिहाड़ जेल में एक ऐसा कैदी आया है, जिसे अपनी ऑफिस के लिए हर तरह की सुविधाएं दी गई हैं। कार्यालय, फेक्स मशीन, मोबाइल-लेपटॉप के लिए वाई-फाई कनेक्शन, कोरियर की सुविधा, बिजनेस डिस्कशन के लिए विशेष व्यवस्था सुप्रीमकोर्ट के आदेश से दी गई है। ये कैदी है सहारा गु्रप के चेयरमेन सुब्रतो राय। उन्हें जमानत चाहिए, इसके लिए उन्हें अदालत में 15 अरब डॉलर की राशि जमा करनी होगी। जमानत के लिए इतनी बड़ी रकम चुकाने में समर्थ न होने के कारण उन्होंने जेल से बाहर निकलने की अनुमति मांगी, तो सुप्रीमकोर्ट ने यह व्यवस्था दी कि आप वे सारे काम जेल के भीतर ही रहकर कर सकते हैं, जो आप बाहर करना चाहते हैं। पर आपको जमानत नहीं मिलेगी।

आल इंडिया रिच एंड पावरफूल में जिनका समावेश होता है, उस सुब्रतो राय ने जेल में ही अपनी एक ऑफिस बना ली। इस ऑफिस से वे मेनहट्टन में स्थित सौ साल पुरानी प्लाजा होटल को बेचने की कोशिश कर रहे हैं। जब सुब्रतो लोगों की धनराशि से खेल रहे थे, तब उन्होंने प्लाजा होटल के 80 प्रतिशत शेयर खरीद लिए थे। बचत के नाम पर सुनहरे सपने दिखाकर उन्होंने गरीबों से अरबों रुपए वसूले। पर समय पर उसका भुगतान नहीं कर पाए। इसलिए उन पर गरीबों का आक्रोश फूट पड़ा। हमारे देश में चिटफंड चलाने वाली कई कंपनियों के संचालक अनेक बार जेल गए हैं। लोगों को सपने दिखाकर कम राशि लेकर अधिक राशि देने का वादा कर उनकी जमाराशि लेकर ठगने वाली कई कंपनियां बाजार में आई और चली गई। कई लोग विदेश भाग गए, कुछ लोग अपनी राजनीतिक पहुंच के चलते जेल जाने से बच गए। पर सुब्रतो राय नहीं बच पाए। देर से ही सही, पर वे कानून के हाथ में आ ही गए। नेताओं से अच्छे संबंध होने के कारण वे अब तक बचते रहे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी उनके अच्छे संबंध थे। पर अधिक धनराशि जमा करने की लालसा ने उन्हें कहीं का नहीं रखा। लोगों को लुभावने सपने दिखाकर उन्होंने खूब बटोरे। अंततरू उन्हें जेल जाना ही पड़ा। उत्तर प्रदेश में उन्होंने पहले रिकरिंग स्कीम चालू की थी, जिसकी राशि देने के लिए बांड स्कीम जारी की। इनकी राशि का भुगतान नहीं कर पाने के कारण वे कानून की गिरत में आ गए। जेल से छूटने के लिए उन्हें जितनी राशि चाहिए, उतनी राशि तो उनके पास है। पर आज उन सम्पत्तियों की कीमत उतनी अधिक नहीं मिल रही है। वजह साफ है। उनकी छवि ठीक न होने के कारण लोग उनसे सम्पत्ति आधे दामों में खरीदना चाहते हैं। चूंकि गरज सुब्रतो राय की है, इसलिए न चाहते हुए भी उन्हें अपनी सम्पत्ति कौडिय़ों के दाम पर बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। गरीबों के साथ जैसा उन्होंने किया, आज उनके साथ भी वैसा ही व्यवहार हो रहा है। लाखों लोगों को ठगकर आखिर आप कब तक चौन की नींद सो सकते हैं। खराब काम के नतीजे भी खराब ही होते हैं। यह इस मामले से जाना जा सकता है। यह भी सच है कि  कई नेताओं ने भी अपने काले धन से उन्हें सुशोभित किया। अब उन नेताओं के मुंह बंद हैं। इसलिए सुब्रतो राय की गिरफ्तारी का विरोध नेताओं ने नहीं किया। सभी जानते हैं कि बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई इतना बड़ा एम्पायर खड़ा नहीं कर सकता। फिर भी लोग उन पर विश्वास कर अपनी जमा-पूंजी देने लगे। जब यह पूंजी वापस नहीं हुई, तो गरीबों की श्हाय्य उन्हें लग गई। यही हाय आज उन्हें सीखचों के पीछे ले जाकर चौन से सोने नहीं दे रही है।

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