बर्बादी के कगार पर किसान

2:56 pm or March 23, 2015
hailstorm

—शशांक द्विवेदी—

बेमौसम बारिश और ओले की मार से किसान बेहाल

पिछले दिनों आई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि किसानों के लिए  भारी आफत लेकर आई है।

इसकी वजह से देश के उत्तरी, मध्‍य और पश्चिमी क्षेत्र में फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है।

पूरे उत्तर भारत में गेंहू और रबी की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है । मार्च के महीने में देश के कई में हिस्सों मौसम का मिजाज बदला और इस बदले मौसम का सबसे ज्यादा खामियाजा किसानों को उठाना पड़ा है। देश के कई हिस्सों में ओले गिरने की वजह से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। पंजाब ,उत्तर प्रदेश ,जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश,हरियाणा, महाराष्ट्र आदि राज्यों में किसान बर्बादी के कगार पर पहुँच गया है । कृषि मंत्रालय का अनुमान है कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर , हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में 50 लाख हेक्टेयर भूमि में खड़ी फसल बर्बाद हुई है। करनाल स्थित गेहूं अनुसंधान निदेशालय के मुताबिक देश भर में गेहूं की करीब 20 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है। फसलों की बर्बादी के आंकलन के लिए राज्‍यों ने सर्वे शुरू कर दिया है। राज्‍यों से नुकसान के प्राथमिक आंकड़े भी आने लगे हैं। जो बारिश के चलते भारी नुकसान की ओर इशारा कर रहे हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार राज्‍यों में सर्वाधिक असर गेहूं, चना, सरसों और आलू की फसल को पहुंचा है। सिर्फ उत्‍तर भारत की बात की जाए तो यहां बारिश से आलू, सरसों और गेहूं की फसल सर्वाधिक प्रभावित हुई है। पंजाब में आलू का उत्पादन भी 50% प्रभावित होने की खबरें हैं। वहीं हरियाणा में गेहूं की 25%, सरसों की 20% और जौ को बड़ा नुकसान पहुंचा है । महाराष्‍ट्र में मराठवाड़ा, खानदेश और विदर्भ में गेहूं, प्याज और आम को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा गुजरात के सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात में कैरी एवं जीरे की अधिकांश फसल खराब हो गई । इसके अलावा आलू, प्याज, सौंफ, धनिया और इसबगोल की फसलें भी बर्बाद हुई ।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र में तो कई फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई है जिसकी वजह से कई किसानों ने आत्महत्या तक कर ली । बुंदेलखंड के किसानों की दैवीय आपदा तकदीर बन गई है। कभी सूखा, कभी अतिवृष्टि तो कभी ओलावृष्टि ने की फसलों को हमेशा तबाह किया है। बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर किसानों को भुखमरी के मुहाने पर खड़ा कर दिया। यमुना पट्टी से लेकर पाठा तक पड़े ओले से रबी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। हालात यह तक हो गये कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के घरों में चूल्हे भी नहीं जले।  चित्रकूट जिलें में ओलावृष्टि और बारिश से काफी बड़े पैमाने में तबाही हुई है ,सैकड़ों गाँवों की फसल एक साथ खत्म हो गई । जिसकी वजह से तीन किसानों ने आत्महत्या तक कर ली । यहाँ के हालात काफी गंभीर हो गयें है लेकिन इतनी बर्बादी होने के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने अभी तक किसी भी मदत की घोषणा नहीं की । इतने बड़े पैमाने पर हुई फसल बर्बादी के बाद बुंदेलखंड क्षेत्र के चित्रकूट ,हमीरपुर, जालौन, बांदा और महोबा समेत कई जिलों के किसान सीधे सड़क पर आ गयें है । उनका गुस्सा प्रशासन पर फूट रहा है जबकि स्थानीय प्रशासन का रवैया पूरी तरह से असंवेदनशील है । कुछ जगहों पर प्रदर्शन करने पर किसानों पर लाठी चार्ज तक किया जा रहा है । जबकि किसान चौपट फसलों की भरपाई और कर्ज माफी की मांग कर रहे है ।

उत्तर प्रदेश के कई और जिलों में भी अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बारिश और ओलावृष्टि से किसान की गेहूं, अरहर ,मटर और आलू की फसल बर्बाद हो गई है। बिगड़ते और अनियमित मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेत में तैयार खड़ी फसल तबाह होने से किसान बर्बादी के कगार पर आ पहुंचा तो मौसम की दोतरफा मार पड़ रही है । उत्तर प्रदेश में गेहूं के कुल रकबे की करीब 50 फीसद फसल को बारिश व तेज हवाओं ने नुकसान पहुँचाया है ।

यूपी के साथ साथ उत्तर भारत के कई हिस्सों में पिछले दिनों हुई बेमौसम बरसात किसानों के लिए मुसीबत बनकर आई है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, में फसलों को बारिश से काफी नुकसान हुआ है। वहीं, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी और बारिश लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गई । मौसम का मिज़ाज पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है और फिलहाल मौसम का ठीक तरह से पूर्वानुमान भी लगा पाना भी संभव नहीं हो पा रहा है ।  मार्च के महीने में लगातार मौसम में हो रहे बदलाव के कारण सबसे ज्यादा गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है।

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक मौसम में इस बदलाव की वजह पश्चिमी विक्षोभ है, जो एक महीने के अंदर चौथी बार बना है। महाराष्ट्र में बेमौसम बरसात ने प्याज की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। आगे आने वाले समय में प्याज की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है और कीमतों में तेज वृद्धि भी हो सकती है क्योंकि प्याज की सबसे ज्यादा पैदावार महाराष्ट्र में ही होती है। प्याज फिलहाल 30 रुपये किलो बिक रहा है। अगर इसके दाम और बढ़े तो हाहाकार तय है। इससे पहले भी जब जब प्याज के दाम बढ़े हैं, इसका असर घर के बजट पर नजर आया है और इसकी गूंज देशभर में सुनाई पड़ी थी । पिछली गर्मियों में प्याज 100 रुपये किलो तक पहुंच गया था। अगर बेमौसम बारिश का कहर जारी रहा तो दोबारा ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं। ये तो सिर्फ प्याज की बात है। दूसरी सब्जियों के दामों में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यानि आने वाला वक्त ना सिर्फ आम आदमी के लिए बल्कि सरकार के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित होने जा रहा है।

इस बिगड़ते और अनियमित मौसम का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसका असर सब्जियों के दामों पर तो दिखने ही लगा है। इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है। मौसम का ये बिगड़ा हुआ मिजाज महंगाई को आसमान पर पहुंचा सकती है। जाहिर तौर पर इससे मोदी सरकार की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिशों को झटका लग सकता है। क्योंकि बीते साल  लोकसभा चुनाव के दौरान  महंगाई बड़ा मुद्दा थी।

भारत सहित पूरी दुनियाँ में पूँजीवाद का प्रभाव बढ़ रहा है अपने देश में अरबपतियों की संख्यां बढ़ रही है लेकिन किसान और किसानी बेहद खस्ता हालात में है किसान या तो कर्ज और तंगहाली में जी रहा है या फिर आत्महत्या कर रहा है आज कोई भी खेती किसानी नहीं करना चाहता ,आप अपने आस पास एक सर्वे करके देख लीजिए आपको खुद पता चल जाएगा कि कितने लोग खेती कर रहें है या करना चाहते है जो लोग किसानी कर भी रहें है उनमें अधिकांश बर्बादी के कगार पर है ऐसे में भारतीय कृषि एक बड़े संकट की तरफ बढ़ रही है जिसकी तरफ सरकारों को समय रहते तत्काल ध्यान देना पड़ेगा

कुलमिलाकर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि में देश भर के किसानों को जो भारी नुकसान हुआ है उसके लिए तत्काल केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर किसानों की मदत करनी चाहिए स्थानीय स्तर पर उनके लिए कुछ वैकल्पिक प्रबंध किये जाने की जरुरत है बड़े पैमाने पर हुई फसल बर्बादी पर किसानों को तत्काल उचित मुआवजा और कर्जमाफी की भी जरुरत है किसान इस देश के विकास की सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण कड़ी है और अगर किसान कमजोर और असहाय होगा तो इसका सीधा असर देश पर पड़ेगा इसलिए इस विपदा के समय सरकार के साथ साथ देश के आम नागरिकों को भी किसानों की यथा संभव मदत देने के लिए आगे आना होगा

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