घुटने के बल मोदी सरकार

5:37 pm or March 26, 2015
Gen VK Singh Pak

—अरविंद जयतिलक—

पाकिस्तान दिवस के मौके पर जिस तरह पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने अलगाववादी हुर्रियत नेताओं को अतिथि बनाने की ढि़ठाई दिखायी और उस समारोह में विदेष राज्यमंत्री वीके सिंह द्वारा षिरकत किया गया, वह कुलमिलाकर मोदी सरकार की राजनीतिक-कुटनीतिक विफलता को ही रेखांकित करता है। जरा याद कीजिए आम चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी के बातबहादूरों ने पाकिस्तान और अलगाववादियों को सबक ठिकाने का खूब खम ठोंका था। अब मोदी सरकार को जवाब देना चाहिए कि यह किस तरह की राश्ट्रभक्ति है जहां उनका एक मंत्री ऐसे समारोह में षामिल होता है जहां भारतीय संप्रभुता से खेलने वाले अलगाववादियों को आमंत्रित किया जाता है। विदेष राज्यमंत्री जो कभी जनरल रह चुके हैं वे पहले पाकिस्तान दिवस समारोह में षामिल हुए और बाद में ट्वीट के जरिए पष्चाताप का आंसू बहाते नजर आए। उन्होंने यह दर्षाने की कोषिष की कि उनसे भयंकर भूल हुई है लेकिन इसके लिए वे स्वयं नहीं सरकार जिम्मेदार है। जब मीडिया में उनके ट्वीट पर बहस तेज हुई तो उन्हें सामने आकर पार्टी और सरकार के प्रति निश्ठा जतानी पड़ी। बहरहाल इस ड्रामे से कुल मिलाकर यही निश्कर्श निकला है कि कष्मीर पर मोदी सरकार की नीति अपरिपक्व है और सरकार घुटने के बल पर है। मोदी की कुषल विदेषनीति का ढ़ोल पीटने वाले लोगों को अहसास हो जाना चाहिए कि मोदी सरकार के पास कुषल कुटनीतिक कौषल का अभाव है जिसे पाकिस्तान भांप गया है और बार-बार कष्मीर को लहूलुहान कर रहा है। उसे न तो भारत की संप्रभुता की फिक्र है और न ही संबंधों में मिठास घोलने की। अन्यथा कोई वजह नहीं कि एक ओर भारतीय प्रधानमंत्री पाकिस्तान के राश्ट्रीय दिवस पर उसे षुभकामना जाहिर करें और पाकिस्तानी उच्चायुक्त भारतीय संप्रभुता से खिलवाड़ करने वाले अलगाववादियों की मेहमाननवाजी करें। गौरतलब है कि गत वर्श पाकिस्तानी उच्चायुक्त के ऐसी ही एक हरकत के कारण भारत-पाकिस्तान वार्ता पटरी से उतर गयी थी। उस समय मोदी सरकार ने वार्ता से पीछे हटने का निर्णय लिया और पाकिस्तान को संदेष दिया कि उसे कुटनीतिक वार्ता और अलगाववादियों के साथ बातचीत में से किसी एक को चुनना होगा। लेकिन आष्चर्य कि अब मोदी सकरार की प्राथमिकता और देषभक्ति मापदंड बदल गया है। पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने कहा भी है कि भारत ने हुर्रियत नेताओं को न्यौतने पर ऐतराज नहीं किया। मतलब साफ है कि अब मोदी सरकार अलगाववादियों को लेकर नरम है। अगर भाजपा और मोदी सरकार में तनिक भी नैतिकता होती तो वह आतंकी मषर्रत को रिहा करने वाली जम्मू-कष्मीर सरकार से समर्थन वापस लेती। यह समझना कठिन नहीं है कि पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने हुर्रियत नेताओं को आमंत्रित क्यों किया? दरअसल इस मुलाकात का मकसद जम्मू-कष्मीर मसले को पुनः हवा देना है। अन्यथा कोई वजह नहीं कि पाकिस्तान अपने राश्ट्रीय दिवस पर जम्मू-कष्मीर के उन अलगाववादी और कट्टरपंथी नेताओं को आमंत्रित करे जो दषकों से जम्मू-कष्मीर को भारत से अलग करने की मुहिम छेड़े हुए हैं। दरअसल जम्मू-कष्मीर में सफल चुनाव और लोकतांत्रिक सरकार के गठन से पाकिस्तान हतोत्साहित है और उसकी विध्वंसक कुटनीतिक रणनीति विफल हो गयी है। अब उसका मकसद अप्रासांगिक हो चुके हुर्रियत नेताओं को बरगलाकर जम्मू-कष्मीर को अराजकता की आग में ढ़केलना है। जरा गौर कीजिए। पाकिस्तानी उच्चायुक्त से मुलाकात के बाद अब हुर्रियत नेता यह कहते सुने जा रहे हैं कि वे कष्मीर के जटिल मुद्दे के हल के लिए भारत और पाकिस्तान को मदद देने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि नेहरु के जमाने से ही स्पश्ट कर चुका है कि भारत-पाक मुद्दों के समाधान में किसी तीसरे पक्ष के लिए कोई जगह नहीं है। दरअसल पाकिस्तान अपनी अंदरुनी समस्याओं से देष-दुनिया का ध्यान बंटाने के लिए कष्मीर मसले को हवा दे रहा है। यह अलग बात है कि उसे इस मसले पर उसे दुनिया का समर्थन हासिल नहीं है और उसे बार-बार मुंह की खानी पड़ रही है। याद होगा पिछले वर्श प्रधानमंत्री नवाज षरीफ ने अमेरिकी दौरे से पहले कष्मीर मसले के समाधान के लिए अमेरिका से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि कष्मीर मसला नहीं सुलझा तो परिणाम खतरनाक हो सकते हैं। लेकिन अमेरिका ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया। नवाज षरीफ से भारत को बड़ी उम्मीदें थी। माना जा रहा था कि उनके हुकुमत में आने से दोनों देषों के रिष्ते सुधरेंगे। उन्होंने सत्ता संभालते हुए कहा भी था कि वह भारत से बेहतर रिष्तों के हिमायती हैं। डोर वहीं से पकड़ेंगे जहां से छूटी थी। लेकिन वे रिष्तों की कसौटी पर खरा नहीं उतरे। उनके सत्ता संभालने के तीन महीने के भीतर ही पाकिस्तानी सैनिकों ने आतंकियों के साथ मिलकर पांच भारतीय जवानों की हत्या कर दी और एक अन्य हमले में दो भारतीय जवानों को मौत के घाट उतारकर एक जवान के सिर काट ले गए। लाहौर के कोट लखपत जेल में भारतीय कैदी सरबजीत को पीटकर मार डाला गया। नवाज ने वादा किया था कि उनकी सरकार 26/11 मुंबई आतंकी हमले की जांच कर दोशियों को कड़ी सजा देगी। लेकिन जांच अभी तक किसी अंजाम तक नहीं पहुंची। 26/11 मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा का सरगना हाफिज सईद खुलेआम पाकिस्तान में भारत के खिलाफ तकरीर करते सुना जाता है। यही नहीं वह सीमा पर आकर पाकिस्तानी सैनिकों को भारतीय सैनिकों को टारगेट करने के लिए उकसाता है। वह पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ के संरक्षण में महफूज है। गत वर्श पहले भारत ने पाकिस्तान को 50 मोस्ट आतंकियों की सूची सौंपी और उन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। लेकिन आज तक वह एक भी आतंकियों के खिलाफ कड़ी कारवाई नहीं की गयी। यह दर्षाता है कि पाकिस्तान की कथनी व करनी में भारी भेद है। सच तो यह है कि नवाज ने अभी तक षांति, सुरक्षा, स्थिरता और दोनों देषों के बीच विवादित मसलों को सुलझाने के लिए एक भी ऐसी पहल नहीं की जिससे सकारात्मक नतीजे की उम्मीद की जाए। कष्मीर के मसले पर भी उनका रुख उलझाने और उकसाने वाला ही है। नरेंद्र मोदी के षपथ ग्रहण समारोह में नवाज षरीफ के षिरकत के बाद उम्मीद जगी थी कि पाकिस्तान के रुख में बदलाव आएगा। लेकिन नवाज षरीफ अपने पूर्ववर्ती हुक्मरानों के रुख पर ही कायम हैं। उन्हीं की तर्ज पर भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं और भारत को घेरने के लिए कष्मीर मसले का अंतर्राश्ट्रीयकरण कर रहे हैं। उनकी नापाक कष्मीर नीति देष-दुनिया के सामने उजागर हो चुकी है। यह तथ्य भी सामने आ चुका है कि कष्मीर मसले को उलझाने के लिए उन्होंने बकायदा एक विषेश सेल का गठन कर रखा है। पर दुर्भाग्य है कि भारत की मौजूदा मोदी सरकार पाकिस्तान की मंषा को समझ नहीं रही है। बेहतर होगा कि मोदी सरकार आत्ममुग्धता के केंचुल से बाहर निकल पाक से निपटने की ठोस रणनीति तैयार करे। पाकिस्तान पर दबाव बनाए की उसके सैनिक सीमा पर कायराना हरकतों को अंजाम देने से बाज आएं। यह तथ्य है कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलाबारी में वृद्धि हुई है। आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान पिछले तीन साल में 250 से ज्यादा बार संघर्श विराम का उलंघन किया है। गौरतलब है कि नवंबर 2003 में संघर्श विराम की घोशणा हुई और भारत उसी समय से संघर्श विराम का पालन कर रहा है। जबकि पाकिस्तान इसके लिए तैयार नहीं। वह अपने सैनिकों को सीमा पर भारतीय चैकियों पर हमला करने की पूरी छूट दे रखा है। एक अरसे से पाकिस्तानी सैनिक घात लगाकर सीमा पर गष्त कर रहे भारतीय जवानों को निषाना बना रहे हैं। अब समय आ गया है कि मोदी सरकार पाकिस्तान को स्पश्ट संकेत दे कि अगर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है तो उसे उसकी भारी कीमत चुकानी होगी। पाकिस्तान की यह दलील कि उचित नहीं कि वह भी आतंकवाद से पीडि़त है और उसके खिलाफ जंग में बराबर का साझीदार है। अगर पाकिस्तान आतंकवाद से पीडि़त है तो उसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार है। दुनिया के सामने स्पश्ट हो चुका है कि भारत में पसरे आतंकवाद के लिए पाकिस्तान ही जिम्मेदार है। अमेरिका भी कह चुका है कि अंतर्राश्ट्रीय समुदाय से मिल रही मदद को वह विकास कार्यों पर खर्च करने के बजाए भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों पर लूटा रहा है। पाकिस्तान को अपनी छवि सुधारने के लिए आतंकवाद के खिलाफ ईमानदारी से लड़ना होगा और जम्मू-कष्मीर में हुर्रियत जैसे अलगाववादियों को मदद देना भी बंद करनी होगी।

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