अप्रैल फूल, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी

2:15 pm or April 1, 2015
BJP membership

—विवेकानंद—

ताकत का प्रदर्शन दो तरह की मानसिकता के व्यक्ति करते हैं, या तो वे जो कमजोर होते हैं या फिर वे जो अहंकारी होते हैं। अहंकार रहित वीर अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करता। अब बीजेपी यह खुद ही तय कर ले कि वह क्या है, अहंकारी या शक्तिहीन। यह सवाल इसलिए उठे हैं क्योंकि बीजेपी ने हाल ही में खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी घोषित किया है। आखिर इसकी जरूरत उसे क्यों पड़ी? दूसरी बात दुनिया की सबसे अधिक कार्यकर्ताओं वाली पार्टी की दिल्ली में दुर्गति क्यों हई? बीजेपी आम आदमी को अप्रैल फूल बना रही है खुद बन रही है यह भी वह खुद ही तय कर ले।

बहरहाल बीजेपी इसका जवाब दे या न दे लेकिन इसकी पोल खुल चुकी है कि पार्टी ने किस तरह से सदस्यों की संख्या बढ़ाई है। वैसे बीजेपी में अपनी लोकप्रियता दिखाने के लिए किया गया यह कोई पहला फर्जीवाड़ा नहीं है। लोकसभा चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी को महान बताने के लिए इंटरनेट पर उनके फॉलोअर्स की संख्या का प्रचार किया गया। उस वक्त भी पार्टी की पोल खुली थी, लेकिन इस किरकिरी के बाद भी बीजेपी ने झूठ बोलना नहीं छोड़ा। तब लंदन की संस्था स्टेटस पीपल ने खुलासा किया था कि इंटरनेट पर मोदी के 70 फीसदी फॉलोअर पूरी तरह से फर्जी हैं। इतना ही नहीं इस लिस्ट में और भी कई नेताओं के नाम थे। संस्था ने दुनिया के ऐसे लोगों के ट्विटर अकाउंट पर रिसर्च किया था जिनके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। उन्होंने इस पैमाने पर फर्जी फॉलोअर्स की जानकरी जुटाई है। जिनके अकाउंट से कभी कोई ट्वीट नहीं होता हैं औन इनके फॉलोअर्स भी नहीं होते। इसके अलावा देश में ही कोबरा पोस्ट और गुलेल ने मिलकर ऐसी करीब दो दर्जन से अधिक कंपनियों को अपने खुफिया कैमरे में कैद किया था जो देश भर में सोशल मीडिया यानी फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब की मदद से नेताओं की लोकप्रियता फर्जी तरीके से बढ़ा रही थीं। उनके विरोधी खेमे को बदनाम करने के अभियान में भी लगी हैं। ये कंपनियां पैसे लेकर अपने ग्राहकों के लिए फेसबुक और ट्विटर पर फर्जी तरीके से फैन फॉलोइंग बढ़ाने और विरोधियों को बदनाम करने का काम करती हैं। इस खुलासे के मुताबिक मोदी कैंपेन के लिए काम कर रही कोई संस्था चुनाव से कुछ समय पहले राहुल गांधी पर एक अपमानजनक कंटेंट बनाने वाली है। जिसे आगे वायरल किया जाना है। मोदी कैंपेन में लगी कुछ कंपनियां नेताजी के विरोधी की नेगेटिव पब्लिसिटी सिर्फ 92,000 रुपए में करने को राजी हो गईं थी।

इसके बाद लोकसभा चुनाव से ऐन पहले मोदी को महान बताने के लिए बीजेपी ने एक और शिगूफा छेड़ा था, मोदी को पैसे देकर सुनने वालों का। प्रचार किया गया कि लोगों में मोदी का जादू इस कदर छाया हुआ है कि उनकी सभाओं में लोग पैसे देकर आ रहे हैं। इसके बाद कुर्सी बेचने का खेल शुरू हुआ। प्रचार किया गया कि मोदी जिस कुर्सी पर बैठे थे उसकी बोली लाखों में लग रही है मोदी बहुत महान नेता हैं। लेकिन इसकी पोल तब खुली जब यह सामने आया कि मोदी जी की इस कुर्सी की बोली लगाने वाले बीजेपी के ही नेता हैं। यह नौटंकी करने में बीजेपी को लज्जा भी नहीं आई जिसके पास वरिष्ठ नेताओं में अटल बिहारी वाजपेयी, कुशाभाऊ ठाकरे, पंडित श्यामाप्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसी हस्तियां शामिल हैं। क्या इन नेताओं में से किसी एक के मुकाबले में भी मोदी खरे उतरते हैं? क्या इन नेताओं के पदचिन्हों पर चलने की कभी किसी बीजेपी नेता ने कोशिश की? क्या कभी उनकी खड़ाऊ खरीदकर अपने माथे पर लगाई? क्या इनकी कुर्सी अपने घर में सजाने के लिए इस तरह लड़े? नहीं, क्योंकि यह नेता नौटंकी प्रिय नहीं थे। इनकी अपनी आवाज थी, अपनी अपील थी और अपनी लोकप्रियता थी। इन्हें किसी नौटंकी या किसी खरीदी हुई लोकप्रियता की जरुरत नहीं थी, इसलिए इनके लिए कभी कुर्सी खरीदने जैसी नौटंकी की भी जरुरत नहीं पड़ी। और यदि कोई ऐसा करता तो वे मोदी की तरह खुश नहीं होते। लेकिन मोदी को सबसे ज्यादा लोकप्रिय दिखने का भूत सवार है और बीजेपी नेताओं में दिखाने का, इसलिए उनके लिए यह नौटंकी प्रायोजित रूप से की गई  थी। फिर मोदी जी का सूट बेचा गया। और मजेदार बात यह कि देश भर में कोई और इस सूट को नहीं खरीद पाया, इसे खरीद पाया तो सिर्फ सूरत का कारोबारी।

महानता के इस क्रम की अगली कड़ी है सदस्यता अभियान, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। पार्टी के सदस्यों की संख्या आठ करोड़ 82 लाख पहुंच चुकी है, बीजेपी ने इस मामले में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को पछाड़ दिया, जिसकी सदस्य संख्या पिछले साल नवंबर में आठ करोड़ 67 लाख थी। दावा किया जा रहा है कि हर रोज पार्टी के 13 से 14 लाख नए सदस्य बन रहे हैं. सदस्यता अभियान 31 मार्च को खत्म हो गया है। समझ सकते हैं अगले दिन एक अप्रैल था।

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