तम्बाखू राष्ट्रीय भोजन घोषित 2023 बीजेपी सरकार की एक और उपलब्धि

4:00 pm or April 4, 2015
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—अलका गंगवार—

राष्ट्रीय स्वयंसेवक  संघ के प्रचारक  सन २०२३ तक ३/४ प्रदेशों में मुख्यमंत्री के पद संभाल हुएं   हैं | अभी अभी हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पुनः बहुमत मिल गया हैं  और इस मौके को एक अबसर समझ कर देश में एक गंभीर बहस छिड़ी हुई है की हिन्दू  लोग जिनमे आरएसएस की परिभाषा के अनुसार मुस्लिम,क्रिस्चियन, दलित ,आदिवासी, द्रविण, सिख, बुद्धिस्ट, सभी आते हैं क्या खाएं और क्या न खाएं ? हिन्दू संसद जो कभी भारतीय संसद कहलाती थी ने एक संसदीय कमेटी का गठन कर दिया है जिसके समक्ष सभी धर्म और विभिन्न जीवजन्तु संरक्षक  संघटन अपने अपने दावे लेकर जबरदस्त लॉबिंग कर रहें हैं| सरकार के बाहर से आरएसएस सरकार पर जैन समुदाय के दावे को लेकर कन्द मूल पर प्रतिबन्ध के लिए  निरतंतर दबाब बना रही है| इसके पूर्ब भी आरएसएस के अजेंडे के तहत सन २०१५ में महाराष्ट्र में गो मास खाने पर प्रतिबंध लग चुका है और बीफ के खाने और व्यापर पर अपराधिक प्रकरण दर्ज करने  का कानून पारित हो  चुका है|इसी से उत्साहित हो कर विभिन्न धर्म और सम्प्रदायों  के लोगो ने भी एक लम्बी सूचि सरकार को सौंप दी है यदि  उसको यथा स्वीकार कर लिया गया  तो खाने के मेनू में कोई भी डिश ऐसी नहीं होगी जो प्रतिबंधित न कर दी गई हो |

सूत्र यह भी कहते है कि इस अजेंडे को इतना अधिक तूल देने के पीछे मात्र संघठनो कि धार्मिक भावनाओंका आहत होना ही नहीं है बल्कि इसके पीछे पुलिस स्थानीय राजनैतिक का एक सुदृढ़ माफिया भी काम कर रहा  है जो गौ मांस के प्रतिबन्ध  के बाद महाराष्ट्र जैसे राज्यों में एक  संघटित अपराध का रूप ले लिया है| गौओ मांस खाने पर प्रतिबन्ध ने पुलिस  और स्थानीय राजनेताओ को अनधिकृत बसूली और गैर कानूनी रूप से गौ मांस उपलब्ध कराने का एक रैकिट बनाने का अबसर दिया है और यह अंडरग्रॉउंड  व्यापर अरबो रुपया के है जिसमे सभी का लाभ हो रहा है | गरीब बेरोजगार युवको के लिए यह जोखिम भरा लेकिन तत्काल अच्छा पैसा कामने का जरिया है वंही विषेश धर्म और नॉनवेज पसंद लोगो  को बीफ पाने का यही एक मात्र रास्ता  है. | शहर के सभी पंचसितारा  होटलों में बीफ की सप्लाई इन्ही रैकेट के माध्यम से होती है.|यद्यपि यह गैर कानूनी होने से महंगा पड़ता है लेकिन अभी भी विदेशीय टूरिस्ट की मांग के कारन होटलों में और चिकिन ,फिश आदि से सस्ता होने के कारन गरीब तबके में इसकी मांग बढ़ती जा रही है. दूसरी और गौ मांसखाने के आरोप में किसी भी व्यक्ति को जेल भेजने  के अधिकार ने पुलिस और सत्ता में बैठे लोंगो को असीमित अधिकार दे दिया है कि वे रंजिसन कभी  भी किसीको गो मांस खाने के अपराध में गिरफ्तार कर सकते है और फिर शुरू होता है पैसे ऐठने का सिलसिला | पुलिस और बिचोलियों की एक लंबी कड़ी है और इसके पीछे है करोडो की दलाली का कारोबार |

इसीसे प्रेरित होकर अनेक संगठन सामने आ गए है जो सरकार से मांग कर रहे है कि उनके सम्प्रदाये , वर्ग कि भावनाओ का ख्याल रखा जाये और इस फेरिस्त में  मुर्गा, मुर्गी ,मछली , भेंस ,भैंसा से लेकर चिटा चीटी तक शामिल हो गए है. आप किसी  भी  जानवर का नाम ले जो नॉनवेज सूचि में अत है वह इस प्रतिबंध सूचि में  शामिल होगा  | यदि आप सभी मांगो को एक टेबिल पर लेकर आ जाये तो कि नॉनवेज कि लिस्ट में कोई जानवर पक्षी शेष नहीं है जिसपर  पर किसी न किसी ने वर्ग ने प्रतिबंध लगाने कि मांग न की हो  और हद तो यह है की केंद्र सरकार में अपनी बढ़ती हैसियत को  देखकर जैन समुदाय ने भी जोरदार तरीके से तथा कथित वैज्ञानिक तथ्य प्रस्तुत कर यह मांग रख  दी है की कंद  मूल पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया जाये. केंद्र सरकार जो सभ्यता और संस्कृति को एक विशेष धर्म के चश्मे से देखने की आदी है ने कमिटी की सिफारिशों को मानने का सन्देश दे दिया है . सूत्र बताते है कि कमिटी ने निरामिष हिन्दूऔ  के दबाब में आकर नॉनवेज फ़ूड पर प्रतिबंध  लगाने कि सिफारिश कर दी है और जैन समुदाय के आग्रह पर जो   सरकार का सबसे घोर समर्थक है कमिटी ने आलू, मूली सकरकन्द, गाजर ,अदरक ,प्याज  लहसुन आदि कन्द मूल पर भी प्रतिबन्ध लगाने  कि  सिफारिश कर दी है. सूत्र कहते है कि मात्र तंबाखू  के खाने और पीने पर किसी भी राजनैतिक दाल या धरम सम्प्रादये ने रोक लगाने की मांग नहीं की है अतः समिति ने तबांखू  खाने पीने को प्रोत्साहित करने की विशेष अनुसंशा की है. यह है  २०२३ का हिंदुस्तान.

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