खतरनाक स्तर पर वायु प्रदूषण

3:38 pm or April 7, 2015
Air Pollution Delhi

—-शशांक द्विवेदी—-

वायु प्रदूषण मापनें के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स लॉन्च

देश में वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव को कम करने और उसे प्रतिदिन मापनें  की कोशिश के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का पहला एयर क्वालिटी इंडेक्स लॉन्च किया है । शुरुआत में एयर क्वालिटी इंडेक्स देश के 10 बड़े शहरों में काम करेगा। इससे दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में हवा की गुणवत्ता मापी जाएगी। इसके अलावा सितंबर तक 46 और शहर जुड़ जाएंगे। ये इंडेक्स जनता को रोजाना तौर पर हवा में प्रदूषण का स्तर कितना है, इसके बारे में सूचित करेगा। एयर क्वालिटी इंडेक्स हवा की गुणवत्ता जानने के लिए एक वैश्विक मानक है। ये हमारे एयर क्वालिटी स्टेंडर्ड में मौजूद कई मापदंडों को लेकर उन्हें संचित कर छह रंगों के कोडेड स्केल के रूप में दिखाता है। जिसमें गाढ़े हरे रंग दिखलाता है कि हवा में प्रदूषण का स्तर सबसे कम है, जबकि मरून रंग दिखाता है कि हवा में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा है। लेकिन ये इंडेक्स वायु प्रदूषण को रोकने की दिशा में कोई काम नहीं करेगा। इसके लिए सरकार को अलग से बड़े कदम उठानें होंगे क्योंकि फिलहाल देश के सभी बड़े शहरों में वायु प्रदूषण अपने निर्धारित मानकों से बहुत ज्यादा है

पिछले दिनों केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा में बताया था कि आंकड़ों के अनुसार पहले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर तीन गुना बढ़ गया है। पर्यावरण विज्ञान से जुड़ी संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट ने अक्टूबर2014   से फरवरी 2015  के बीच राजधानी के विभिन्न स्थलों व सार्वजनिक परिवहन के अलग-अलग साधनों में वायु प्रदूषण का स्तर मापने के लिए किए अध्ययन के आधार पर कहा है कि बस, मेट्रो, ऑटो व पैदल चलने वाले दिल्ली में सबसे अधिक जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर हैं। दिल्ली की हवा बद से बदतर होती जा रही है। बीती सर्दी में यह खतरनाक स्तर तक पहुंच गई थी। अक्टूबर 2014 से फरवरी 2015 को दौरान किए गए अध्ययन के मुताबिक दिसंबर में 65 फीसदी दिन और जनवरी में 47 फीसदी दिन हवा का स्तर खतरनाक था। नॉन-पीक व पीक अवर्स में तुलना करें तो ऑटो में प्रदूषण का स्तर 1.3 गुना ज्यादा, पैदल चलने वालों के लिए 1.5 गुना ज्यादा और बसों में 2.5 गुना ज्यादा पाया गया। अंडरग्राउंड मेट्रो में स्तर 209 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर मिला जबकि ओवरहेड मेट्रो में 330 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर पाया गया।

पिछले दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार भी  दिल्ली का वातावरण बेहद जहरीला हो गया है । इसकी गिनती विश्व के सबसे अधिक प्रदूषित शहर के रूप में होने लगी है। यदि वायु प्रदूषण रोकने के लिए शीघ्र कदम नहीं उठाए गए तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। डब्ल्यूएचओ ने वायु प्रदूषण को लेकर 91 देशों के 1600 शहरों पर डाटा आधारित अध्ययन रिपोर्ट जारी की है। इसमें दिल्ली की हवा में पीएम 25 (2.5 माइक्रोन छोटे पार्टिकुलेट मैटर) में सबसे ज्यादा पाया गया है। पीएम 25 की सघनता 153 माइक्रोग्राम तथा पीएम 10 की सघनता 286 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया है। जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। वहीं बीजिंग में पीएम 25 की सघनता 56 तथा पीएम 10 की 121 माइक्रोग्राम है। जबकि कुछ वर्षो पहले तक बीजिंग की गिनती दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में होती थी, लेकिन चीन की सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए। जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

एक अध्ययन के मुताबिक वायु प्रदूषण भारत में मौत का पांचवां बड़ा कारण है। हवा में मौजूद पीएम25 और पीएम10 जैसे छोटे कण मनुष्य के फेफड़े में पहुंच जाते हैं। जिससे सांस व हृदय संबंधित बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे फेफड़ा का कैंसर भी हो सकता है। दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण वाहनों की बढ़ती संख्या है। इसके साथ ही थर्मल पावर स्टेशन, पड़ोसी राज्यों में स्थित ईंट भट्ठा आदि से भी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का नया अध्ययन यह बताता है कि हम वायु प्रदूषण की समस्या को दूर करने को लेकर कितने लापरवाह हैं और यह समस्या कितनी विकट होती जा रही है। खास बात यह है कि ये समस्या सिर्फ दिल्ली में ही नहीं है बल्कि देश के लगभग सभी शहरों की हो गई है .अगर हालात नहीं सुधरे तो वो दिन दूर नहीं जब शहर रहने के लायक नहीं रहेंगे । जो लोग विकास ,तरक्की और रोजगार की वजह से गाँव से शहरों की तरफ आ गयें है उन्हें फिर से गावों की तरफ रुख करना पड़ेगा ।

स्वच्छ वायु सभी मनुष्यों, जीवों एवं वनस्पतियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके महत्त्व का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि मनुष्य भोजन के बिना हफ्तों तक जल के बिना कुछ दिनों तक ही जीवित रह सकता है, किन्तु वायु के बिना उसका जीवित रहना असम्भव है। मनुष्य दिन भर में जो कुछ लेता है उसका 80 प्रतिशत भाग वायु है। प्रतिदिन मनुष्य 22000 बार सांस लेता है। इस प्रकार प्रत्येक दिन में वह 16 किलोग्राम या 35 गैलन वायु ग्रहण करता है। वायु विभिन्नगैसों का मिश्रण है जिसमें नाइट्रोजन की मात्रा सर्वाधिक 78 प्रतिशत होती है जबकि 21 प्रतिशत ऑक्सीजन तथा 0.03 प्रतिशत कार्बन डाइ ऑक्साइड पाया जाता है तथा शेष 0.97 प्रतिशत में हाइड्रोजन, हीलियम, आर्गन, निऑन, क्रिप्टन, जेनान, ओजोन तथा जल वाष्प होती है। वायु में विभिन्न गैसों की उपरोक्त मात्रा उसे संतुलित बनाए रखती है। इसमें जरा-सा भी अन्तर आने पर वह असंतुलित हो जाती है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होती है। श्वसन के लिए ऑक्सीजन जरूरी है। जब कभी वायु में कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की वृद्धि हो जाती है, तो यह खतरनाक हो जाती है ।

भारत को विश्व में सातवें सबसे अधिक पर्यावरण की दृष्टि से खतरनाक देश के रूप में स्थान दिया गया है । वायु शुद्धता का स्तर ,भारत के मेट्रो शहरों में पिछले 20 वर्षों में बहुत ही खराब रहा है आर्थिक स्तिथि ढाई गुना और औद्योगिक प्रदूषण चार गुना और बढा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार हर साल लाखों लोग खतरनाक प्रदूषण के कारण मर जाते हैं। वास्तविकता तो यह है कि पिछले 18 वर्ष में जैविक ईधन के जलने की वजह से कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन 40 प्रतिशत तक बढ़ चुका है और पृथ्वी का तापमान 0.7 डिग्री सैल्शियस तक बढ़ा है। अगर यही स्थिति रही तो सन् 2030 तक पृथ्वी के वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा 90 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।

सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के कई शहरों का वातावरण बेहद प्रदूषित हो गया है । इस प्रदूषण को रोकने के लिए कभी सरकार ने गंभीर प्रयास नहीं किये ,जो प्रयास किये गये वो नाकाफी साबित हुए और वायु प्रदूषण बढ़ता ही गया । एयर क्वालिटी इंडेक्स सिर्फ वायु प्रदूषण की मात्रा नापनें के लिए है जबकि  इसे रोकने के लिए सरकार को अब जवाबदेही के साथ एक निश्चित समयसीमा के भीतर  ठोस प्रयास करना पड़ेगा

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