आत्महत्या को मजबूर किसान

2:59 pm or April 24, 2015
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—-शशांक द्विवेदी—-

राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की रैली में एक “आम आदमी “ किसान गजेन्द्र ने सार्वजनिक रूप से खुदखुशी कर ली । संसद भवन से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर जंतर –मंतर में हजारों की भीड़ ,सैकड़ो मीडिया वाले थे ,मंच पर अरविन्द केजरीवाल एंड कंपनी भी थी लेकिन कोई उसे बचाने नहीं आया । जिस पेड़ पर गजेन्द्र ने खुदखुशी की उस तक पहुँचने में मंच से मात्र 19 सेकेण्ड लगते है लेकिन फिर भी “आप “ के किसी भी नेता ने मंच से नीचे उतरना जरुरी नहीं समझा । यहाँ तक की जब उसे पेड़ से नीचे गिराकर अस्पताल ले जाया गया उसके बहुत देर बाद तक दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की भाषणबाजी चलती रही । किसान की मौत के बाद भी इन नेताओं में संवेदनशीलता नहीं जागी और ये लोग उसकी लाश पर राजनीति करते रहें । वैसे तो देश में हर दिन किसान मरता है ,आंकड़ो के हिसाब से हर दिन 46 किसान रोज आत्महत्या करते है लेकिन ऐसा देश में पहली बार हुआ है जब कोई किसान सिर्फ मरने के लिए राजस्थान से दिल्ल्ली आया हो ।उसनें अपनी शहादत के लिए दिल्ली को ही क्यों चुना ?ये भी एक सवाल है क्योकि राजस्थान में मरता तो शायद ही कोई उसे या उसके परिवार को पूछता । यहाँ तक की मीडिया भी उसके दर्द को ,उसकी समस्याओं को संज्ञान में नहीं लेती ,शायद इसीलिए किसान गजेन्द्र ने मरने के लिए देश की राजधानी दिल्ली चुनी । क्या ये देश के राजनीतिज्ञों या रहनुमाओं के लिए शर्म का विषय नहीं है कि किसान सार्वजनिक रूप से फाँसी लगाने को मजबूर है । पिछले 1 महीनें के दौरान बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से पूरे देश भर में 100 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की फसल बर्बाद हो गयी । अधिकांश किसान पूरी तरह से बर्बाद हो गएँ है ,उनके खाने तक को लाले पड़ गए ,इसके साथ ही वो कर्ज का दबाव नहीं झेल पाने की वजह से किसान आत्महत्या करने को अभिशप्त है ।

मार्च महीनें की बेमौसम बरसात और ओलों ने देश के उत्तरी, मध्‍य और पश्चिमी क्षेत्र में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि किसानों के लिए  भारी आफत लेकर आई । पूरे उत्तर भारत में गेंहू और रबी की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है । कृषि मंत्रालय का अनुमान है कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर , हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में 50 लाख हेक्टेयर भूमि में खड़ी फसल बर्बाद हुई है। जबकि वास्तविक नुकसान देश भर में 100 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की जमीन पर हुआ है ।करनाल स्थित गेहूं अनुसंधान निदेशालय के मुताबिक देश भर में गेहूं की करीब 30 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है।  अधिकांश किसान बर्बाद हो गए है और भुखमरी के कगार पर पहुँच चुके है  ।केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मुआवजा की घोषणा भी ऊट के मुह में जीरे की तरह है और अधिकांश किसानों तक तो यह मुआवजा भी अभी तक नहीं पहुंचा है । कुलमिलाकर किसानों के हालात काफी भयावह है और किसान अपने जीने की उम्मीद छोड़ ही चुका है । उसे कही से कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है । इसी वजह से वो आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो रहा है ।

पिछले दिनों नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस(एनएसएसओ) की ‘सिचुऐश्नल ऐसेस्मेंट सर्वे ऑफ एर्गीकल्चरल हाउसहोल्ड इन इंडिया’ नाम से जारी एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल 52 फीसदी कृषि आश्रित परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं। देश में कृषि परिवारों का घरेलू औसत कर्ज रुपए प्रति 47,000 रुपए है। जहां एक परिवार की खेती से होने वाली के वार्षिक आय रुपए 36,972 है। यह रिपोर्ट हर 10 साल के अंतराल के बाद जारी की जाती है। एनएसएसओ द्वारा किया गया पिछला आकलन वर्ष 2002-03 में किया गया था।

देश में 1995 से अब तक साढ़े लाख से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके है नेशनल क्राइम रिकार्ड  ब्यूरो एनसीआरबी के पिछले 5 वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक 2009 में 17 हजार, 2010 में 15 हजार, 2011 में 14 हजार, 2012 में 13 हजार और 2013 में 11 हजार से अधिक किसानों ने अपनी खेती-बाड़ी की तमाम दुश्वारियों के चलते आत्महत्या की राह चुन ली। किसानों की आत्महत्या की त्रासदी सिलसिला यों तो पूरे देश में घटित हो रहा हैं, पर कुछ राज्यों में तो यह ज्यादा ही विकराल रूप में नजर आता है।पाँच राज्यों- महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या की दर सबसे अधिक रही है।

पिछले तीन महीनों में ही देश के सैकड़ों किसान आत्महत्या कर चुके है और खास बात यह है की ये सिलसिला थम नहीं रहा बल्कि बढ़ता ही जा रहा है क्यिकी किसानों को सही समय पर सरकार द्वारा घोषित मुआवजा या सहायता राशि भी लालफीताशाही की वजह से नहीं मिल पा रही है  

अब तो मौसम विभाग ने भी इस साल के लिए मानसून के कम होने की चेतावनी जारी कर दी  भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का अनुमान है कि पिछले साल की तरह इस बार भी मानसून के सामान्य से कम रहने की संभावना है मौसम विभाग के अनुसार कम वर्षा से पश्चिमोत्तर और मध्य भारत के हिस्सों पर सबसे अधिक असर पड़ने की संभावना है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री हषर्वर्धन ने कहा कि मानसून दीर्घकालिक औसत का 93 फीसदी रहेगा जो सामान्य से कम है। यह लगातार दूसरा साल है जब देश  में कम वर्षा हो सकती है। पिछले साल देश में 88 फीसदी ही वर्षा हुई थी जो आईएमडी मापदंड के अनुसार निम्न वर्षा है। बेमौसम बरसात और ओलों से बर्बाद हुई फसल से किसान अभी ऊबर भी नहीं पाया है कि अब देश में कम वर्षा की संभावना ने उसकी उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है ।
दिल्ली में किसान गजेन्द्र की आत्महत्या देश के राजनीतिज्ञों और रहनुमाओं के लिए शर्म का विषय है और संवेदनहीनता की इस गलती से उन्हें कुछ सीखना होगा केजरीवाल को लोगों ने बड़ी उम्मीदों और बहुमत से जिताया था लेकिन अब उनका व्यवहार पूरी तरह से बदल गया लगता है सत्ता लोलुपता और तानाशाही स्पष्ट रूप से दिखने लगी है आम आदमी पार्टी की रैली में मंच के सामने हुई इस मौत के लिए दिल्ली सरकार के नुमाइंदे ,उनकी पार्टी के बड़े नेता ,मुख्यमंत्री स्पष्ट रूप से जिम्मेदार है क्योकि गजेन्द्र की जान बचाई जा सकती थी लेकिन गजेन्द्र की मौत कैसे हुई के साथ उसे मौत का रास्ता क्यों चुनना पड़ा ये सवाल भी महत्वपूर्ण है जिसका जवाब पूरी की पूरी राजनीतिक व्यवस्था को देना पड़ेगा

देश की जीडीपी बढ़ रही है ,आर्थिक तर्रक्की हो रही है लेकिन देश का अन्न दाता ही मरने को मजबूर है । कुलमिलाकर अब केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर किसानों के मौजूदा संकट के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनानी पड़ेगी । सिस्टम में लालफीताशाही दूर करके उसे पारदर्शी बनाना पड़ेगा तभी किसान आत्महत्याओं का ये सिलसिला रूक सकता है ।  किसानों का जीवन स्तर ऊँचा उठाये बिना  देश के आगे नहीं बढ़ सकता ।

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