किस बात का जश्न मनाएंगे साहेब?

2:58 pm or May 8, 2015
narendra-modi-one-year-L

—-विवेकानंद—-

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने एक साल होने पर जश्न मनाने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा वह अपनी उपलब्धियों का बखान भी कराएगी जिसके लिए सभी मंत्रियों को ताकीद किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में जाएं और प्रेस कांफ्रेंस कर लोगों को बताएं कि उनकी सरकार ने एक साल में क्या-क्या किया है। यूं तो बीजेपी में बोलने वालों की कमी नहीं है, इतना बोलते हैं कि आप सुनने-सुनते थक जाएंगे लेकिन उनकी बातें खत्म नहीं होंगी। लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि उपलब्धियों को लेकर क्या बोलेंगे। यह तो बता नहीं सकते कि प्रचंड बहुमत पाने वाली सरकार का पिछला एक साल का वक्त तंबाकू के सेवन और कैंसर से इसके लिंक, गोहत्या और बीफ पर पाबंदी जैसे मसलों में बीत गया। यह भी नहीं बता सकते कि मंत्रियों के स्टॉफ तक की भर्ती माननीय प्रधानमंत्री जी ही करते हैं। यह भी नहीं बता सकते कि कई संस्थाएं बिना मुख्य अधिकारी के चल रही हैं और इन खामियों को ठीक करने के लिए कोई सक्रियता या प्रक्रिया भी नजर नहीं आ रही है।  इस बात का ढिंढोरा भी नहीं पीट सकते कि सरकार ने कई मंत्रालयों के बजट में कटौती कर दी है, नहीं बता सकते कि स्वास्थ्य के बजट में 15 फीसदी, ग्रामीण विकास विभाग के बजट में 10 प्रतिशत, महिला और बाल विकास मंत्रालय के बजट में आधी, शिक्षा बजट में 16 फीसदी कटौती कर दी है और सरकार की तरफ से प्रायोजित ग्रामीण प्रेयजल कार्यक्रम से भी अपने हाथ खींच लिए हैं। यह भी नहीं बता सकते कि उद्योगों को रियायत देने के लिए सरकार ने 62,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा झेल लिया, लेकिन किसानों पर बेमौसम बारिश और ओलों की मार के बाद सिर्फ बातें ही करते रहे और किसान आत्महत्या करते रहे। यह भी नहीं बताएंगे कि ईमानदारी का ढोल पीटने के बाद आखिर लोकपाल की नियुक्ति के मामले को अब तक लटकाए क्यों हैं? यह भी नहीं बताएंगे कि हमारे मंत्री धार्मिंक फसाद खड़ा करने, हिंदू मुस्लिम के बीच झगड़े कराने वाले बयान देते रहे हैं, प्रधानमंत्री हालांकि उन्हें मना करते रहे हैं, लेकिन वे हैं कि मानते ही नहीं। ताकतवर प्रधानमंत्री की उन्होंने ऐसी किरकिरी की है कि विदेशी भी लांछन लगाने लगे हैं। यह भी  नहीं बताएंगे कि इसी के कारण अमेरिका ने हमारी सरकार बनने के बाद धार्मिक हमले बढ़ने के आरोप लगाए हैं। यह भी नहीं बताएंगे कि काशी में ‘मुझे गंगा ने बुलाया है’ का घोष करने के बाद प्रधानमंत्री जी यहां से सांसद तो बन गए लेकिन साल भर में गंगा के तट गंदे ही पड़े हैं। नमामि गंगे की हवा निकल चुकी है। यह भी नहीं बताएंगे कि गंगा को साफ करने की पहली बैठक ही सरकार बनने के चार महीने बाद हुई थी और उस बैठक के 8 महीने बीत जाने के बाद भी एक कदम आगे नहीं बढ़ पाई।  यह भी नहीं बताएंगे कि गंगा की सफाई की कसमें खाने वालों ने विज्ञान भवन में स्वच्छ गंगा के लिए आयोजित राष्ट्रीय मिशन की एक बैठक पर 43.85 लाख रुपए लुटा दिए। बैठक के लिए आए अतिथियों की सुविधाओं पर 26.7 लाख रुपए खर्च किए, अधिकारियों की यात्रा पर 8.8 लाख रुपए बहा दिए, सफाई करेंगे केवल इसके प्रचार पर ही 5.1 लाख रुपए लुटा दिए गए। बैठक स्थल की साज सज्जा पर 75 हजार रुपए खर्च कर डाले।

सवाल यह है कि यदि यह नहीं बताएंगे तो फिर बताएंगे क्या? क्या इस सरकार ने जल्द से जल्द काम शुरू करने के लिए मौके का इस्तेमाल किया? क्या भारत का बेहतर भविष्य बनाने के लिए सरकार ने सही दिशा में अगुवाई की? स्वास्थ्य बजट में 16 प्रतिशत की कटौती उस देश में कहां तक जायज है जहां का मिशन ही संपूर्ण राष्टÑ को साक्षर बनाना है? जबकि संघ परिवार से जुड़ी विश्व हिंदू परिषद हिंदुओं से ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील कर रही है, ताकि हिंदुओं की आबादी तेजी से बढ़ सके? क्या ये बच्चे बड़े होकर पढ़ेंगे नहीं? क्या आजादी के इतने साल बाद भी हमें देश के सभी नागरिकों के लिए रोटी, कपड़ा और मकान सुनिश्चित करने पर केंद्रित नहीं करना चाहिए? क्या यह बताएंगे कि हम विकास का डंका तो खूब बजा रहे हैं लेकिन विकास की आड़ में किसानों की जमीन जीमने की तैयारी कर रहे हैं? क्या यह बताएंगे कि विदेश में प्रधानमंत्री जी की रैलियों, रुतबा, देश विदेश में प्रदर्शन और उसके सीधे प्रसारण में करोड़ों रुपए बहाकर हम बता रहे हैं कि देश में भारत का रुतबा बढ़ गया है, नरेंद्र मोदी ग्लोबल लीडर हो गए हैं, लेकिन हम बेमौसम बरसात से जो फसलें बर्बाद हुई हैं किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं उनके साथ जो 50-50 रुपए के चैक देकर मजाक किया जा रहा है उसे नहीं रोक पा रहे हैं। क्या यह बताएंगे कि फसलों के नुकसान जो खाद्यान्नों की कमी होने वाली है उसकी भरपाई लिए आयात की किसी योजना पर अभी तक विचार ही नहीं किया गया, जब जमाखोर लोग दाम बढ़ा देंगे और आप त्राहिमाम करेंगे तब हम किसी आयात नीति पर विचार करेंगे। क्या यह बताएंगे कि प्रधानमंत्री देश के बड़े लोगों से गैस की सब्सिडी छोड़ने की अपील करते हैं लेकिन अपने दौरों और देश में रहने के दौरान अपनी शान-ओ-शौकत से कोई समझौता नहीं करते। क्या यह बताएंकि हमने पिछले एक साल में हमारी सरकार ने जो जो निर्णय लिए हैं उनमें से अधिकांश का विरोध घर में ही हुआ है। चाहे भूमि अधिग्रहण बिल को बदलने का हो या फिर फ्रांस से फाइटर प्लेन खरीदने का। भूमि अधिग्रहण बिल पर हमारी सरकार कांग्रेस को कोस रही है, लेकिन मजबूर है आरएसएस के खिलाफ कुछ नहीं बोल सकती। मेक इन इंडिया का विरोध भी हमारी पितृ संस्था आरएसएस के ही सहयोगी संगठन कर रहे हैं, आरबीआई के गवर्नर भी इस पर सवाल उठा रहे हैं। क्या यह बताएंगे कि हमारे गृह मंत्री की हवा संसद में हमारे ही मंत्री निकाल देते हैं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पता है कि भारत का मोस्ट वांटेड अपराधी दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है लेकिन गृह राज्यमंत्री हरिभाई चौधरी कहते हैं सरकार को कुछ पता नहीं। फिर दूसरे गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू कहते हैं कि नहीं दाऊद तो पाकिस्तान में ही है।  इस मामले पर हम पूरी तरह गोल-गोल बोल रहे हैं।   जाहिर है यह सब तो मंत्री जी बताने रहे, तो फिर बताएंगे क्या?

About the author /


Related Articles

Leave a Reply

Humsamvet Features Service

News Feature Service based in Central India

E 183/4 Professors Colony Bhopal 462002

0755-4220064

editor@humsamvet.org.in