उजागर हुआ बीजेपी का असली चाल, चरित्र और चेहरा

4:39 pm or June 29, 2015
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—-जाहिद खान—–

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में बार-बार यह दंभ भरते हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में उनकी सरकार शून्य सहनशीलता का रुख अख्तियार करेगी, विदेशों से देश का काला धन वापिस लेकर आएंगे लेकिन हकीकत में राजग सरकार बीते एक साल में भ्रष्टाचार पर पर्देदारी करने का ही काम कर रही है। करोड़ों रूपए घोटाले के आरोपी पूर्व आईपीएल प्रमुख ललित मोदी की मदद मामले में जिस तरह से पूरी बीजेपी और मोदी सरकार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बचाव में उतरी है, उससे उसका भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के प्रति दोहरा चरित्र ही उजागर हुुुआ है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली से लेकर पूरा संघ परिवार देश को ‘समझा’ रहा है कि सुषमा स्वराज ने जो किया, वह गलत नहीं है। विदेश मंत्री कानूनी, तार्किक और नैतिक रूप से बिल्कुल सही हैं। सरकार और बीजेपी, दोनों ही उनके साथ हैं। वहीं अपने बचाव में सुषमा स्वराज की मासूमियत भरी दलील है कि ललित मोदी को अपनी कैंसर पीडि़त पत्नी के इलाज के लिए पुर्तगाल जाना था, लिहाजा उन्होंने मानवीय आधार पर उनकी मदद की। इस मदद में उनका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं था।
यह पूरा मामला शायद ही कभी दुनिया के सामने आता, यदि ब्रिटिश अखबार संडे टाइम्स इसका खुलासा नहीं करता। संडे टाईम्स ने अपनी खबर के जरिए बतलाया कि सुषमा स्वराज ने पिछले साल जून में ललित मोदी को पुर्तगाल यात्रा के लिए यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद कीथ वाज और वहां के उच्चायुक्त जेम्स बीवन से बात की थी। जिससे कि ललित मोदी अपनी पत्नी के कथित कैंसर उपचार के लिए पुर्तगाल जा सकें। सुषमा स्वराज ने उन्हें आश्वासन दिया था कि ललित मोदी को यात्रा वीजा देने में भारत सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। जाहिर है इस समाचार के आने के बाद भारतीय राजनीति में तूफान आना ही था। चंूकि ये मामला उस ललित मोदी से जुड़ा हुआ है, जिसके ऊपर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा कानून के उल्लंघन समेत कई वित्तीय अनियमितताओं के मामले दर्ज कर रखे हैं। जिसका दर्जा भारतीय पुलिस के खाते में पिछले कई सालों से एक फरार आरोपी का है। ईडी जांच के दायरे में खास तौर पर आईपीएल प्रसारण का वह सौदा है, जिसमें ललित मोदी ने वल्र्ड स्पोर्ट्स को आईपीएल के प्रसारण के लिए 425 करोड़ का ठेका दिया था। ललित मोदी पर इल्जाम है कि इस रकम में से 125 करोड़ रूपए उन्हें रिश्वत के तौर पर मिले थे। यही नहीं आईपीएल मैचों में मैच फिक्सिंग करके काले धन को सफेद करने के संगीन इल्जाम भी ललित मोदी के सिर हैं। बहरहाल आईपीएल घोटाला सामने आने के बाद जब प्रवर्तन निदेशालय ने ललित मोदी पर शिकंजा कसा, तो वह देश छोड़कर भाग गया। अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए ललित मोदी साल 2010 से ही लंदन में रह रहा है। ईडी की ओर से ललित मोदी के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है, जिसमें भारत के अंदर किसी भी एयरपोर्ट और बंदरगाह पर उसको देखा जाता है, तो उसे तुरंत ईडी के हवाले कर दिया जाएगा। सच बात तो यह है कि औपचारिक रूप से भारत सरकार ने ब्रिटेन सरकार से ललित मोदी को सौंपने की मांग कर रखी है। लेकिन सुषमा स्वराज की मेहरबानी से ललित मोदी कुछ समय के लिए इस पकड़ से निकलने में कामयाब हो गया।

करोड़ोें रूपए घोटाले के आरोपी ललित मोदी के जानिब सुषमा स्वराज की मेहरबानी कोई अचानक यूंही नहीं बनी है। सुषमा स्वराज के दिल में ललित मोदी के प्रति हमेशा एक नरम रुख रहा है। इस नरम रुख के पीछे कई वजह हैं। मसलन सुषमा स्वराज के एडवोकेट पति और उनकी बेटी बांसुरी कौशल ललित मोदी की लीगल टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल ने खुद इस बात को स्वीकारा है कि वे बाईस साल तक ललित मोदी के वकील रहे हैं। यही नहीं दिल्ली हाईकोर्ट में ललित मोदी के पासपोर्ट मामले में बांसुरी कौशल उस लीगल टीम का हिस्सा रही है, जिसने यह मामला अप्रेल, 2012 से अगस्त, 2014 तक लड़ा था। वहीं, एक खबर यह भी सामने आ रही है कि सुषमा स्वराज के पति ने साल 2013 में जब वे लोकसभा में नेता विपक्ष थीं, अपने भतीजे को ब्रिटेन की ससेक्स यूनिवर्सिटी के लॉ कोर्स में एडमिशन में ललित मोदी से मदद ली थी। जाहिर है कि यह सारा मामला आपसी ‘लेन-देन’ और हितों का है, जो कि वर्षों से गुप-चुप चल रहा था। एक मामला सामने आया, तो एक के बाद एक नई परतें खुलती जा रही हैं।

ललित मोदी मदद मामले में सिर्फ सुषमा स्वराज ही अकेले दोषी नहीं हैं, बल्कि बीजेपी की एक और कद्दावार नेता राजस्थान की मुख्यंमत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का नाम भी सामने आ रहा है। खुद ललित मोदी ने हाल ही में इस बात का खुलासा किया है कि साल 2011 में वसुंधरा राजे ने उन्हें पुर्तगाल जाने की इजाजत दिलाने के सिलसिले में गवाह के तौर पर एक हलफनामा दिया था। राजे ने यह समर्थन यह सुनिश्चित करते हुए दिया था कि इस बारे में भारतीय अधिकारियों को मालूम न चले। एक भगोड़े आरोपी को, जिसकी प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग को तलाश है, पुर्तगाल जाने की इजाजत दिलाने के लिए वसुंधरा राजे लंदन तक पहुंच र्गइं। वसुंधरा ने ललित मोदी की उस वक्त मदद की, जब वे राजस्थान विधानसभा में विपक्ष की नेता थीं। जाहिर है कि मोदी की मदद करते वक्त उन्होंने अपने पद की गरिमा का भी जरा सा खयाल नहीं किया। इस पूरे मामले में अपना नाम आने पर वसुंधरा राजे सफाई दे रही हैं कि ललित मोदी से उनके पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। लेकिन उनके इस दावे की पोल उस रहस्योद्घाटन ने खोल दी है, जिसमें मालूम चला है कि उनके बेटे झालावाड़ से बीजेपी के सांसद दुष्यंत सिंह की कंपनी में ललित मोदी ने संदिग्ध ढंग से साढ़े ग्यारह करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया था।

ललित मोदी ने दुष्यंत सिंह की कंपनी में जब निवेश किया, उस वक्त उनकी कंपनी के एक शेयर की कीमत दस रुपए थी, लेकिन मोदी ने करीब छियानबे हजार रुपए की दर से आठ सौ पंद्रह शेयर खरीदे थे। यानी वसुंधरा राजे, दुष्यंत सिंह और ललित मोदी के रिश्ते महज पारिवारिक नहीं हैं, इन रिश्तों के पीछे और कुछ भी राज हैं। यदि निष्पक्ष जांच हो, तो इसका सच भी सबके सामने आ जाएगा। इतना सब कुछ सामने आ गया, लेकिन फिर भी वित्त मंत्री अरुण जेटली, दुष्यंत सिंह और ललित मोदी के बीच हुए संदिग्ध लेनदेन व हेराफेरी को पाक-साफ बतला रहे हैं। जबकि प्रवर्तन निदेशालय इन संदिग्ध लेन-देन की जांच कर रहा है। इस पूरे मामले की एक और दिलचस्प बात, एक तरफ बीजेपी और मोदी सरकार ललित मोदी की मदद को गलत नहीं मानते, वहीं दूसरी ओर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया के सामने खुद यह बात स्वीकारी है कि ललित मोदी के खिलाफ ईडी का नोटिस आज भी अस्तित्व में है। सरकार की नजर में वे भगोड़े अपराधी हैं, जिसकी भारत को तलाश है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक तरफ पारदर्शिता और भ्रष्चाचारमुक्त शासन के बड़े-बड़े दावे करते नहीं अघाते, दूसरी ओर उनकी सरकार की ही मंत्री 700 करोड़ के मनी लाउंड्रिंग के आरोपी की मदद कर रही थीं। अब जबकि यह मामला पूरे देश के सामने आ गया है, तब भी मोदी सरकार उन्हें बचाने में लगी हुई है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी की आईपीएल में हिस्सेदारी है, जब यह बात सामने निकलकर आई थी, तो उस वक्त नरेन्द्र मोदी और बीजेपी ने नैतिकता के आधार पर शशि थरूर से उनका इस्तीफा मांगा था। आज जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट मंत्री के ऊपर उससे भी ज्यादा गंभीर इल्जाम है, तो क्या वे नैतिकता के आधार पर उनसे उनका इस्तीफा मांगेगंे ? या फिर नैतिकता का पैमाना अपने लिए कुछ और दूसरे के लिए कुछ और है। एक बार सुषमा स्वराज की यह दलील मान भी ली जाए कि उन्होंने ललित मोदी की मदद मानवीय आधार पर की, इसमें उनका और उनके परिवार का कोइ स्वार्थ नहीं था। फिर भी कुछ सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब देने से वे बच नहीं सकतीं। मसलन ललित मोदी ने मानवीय आधार पर रियायत की याचिका भारत की किसी अदालत में लगाने के बजाय भारतीय विदेशमंत्री के दरबार में क्यों लगाई ?, किसी भगोड़े अपराधी की मानवीय आधार पर मदद करना कितना जायज है।, जब सुषमा स्वरज को ललित मोदी की कानूनी स्थिति के बारे में पूरी जानकारी थी, फिर भी ब्रिटिश सरकार से उन्होंने उनकी सिफारिश क्यों की ?
सवालों के दायरे में सिर्फ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे सिंधिया ही नहीं हैं, बल्कि इस पूरे मामलेे में प्रधानमंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सब जानते हैं कि जबसे नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, उन्होंने सारी शक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय के अंदर समेट ली हैं। खास तौर पर वे विदेश मामलों और विदेशी संबंधों को लेकर काफी सक्रिय रहते हैं। विदेश मंत्रालय में प्रधानमंत्री कार्यालय का बेहद हस्तक्षेप रहता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के फैसले की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न हो, ऐसा कैसे हो सकता है ? शक की सुंई इसलिए भी प्रधानमंत्री की ओर बार-बार घूम रही है कि संप्रग सरकार ने मार्च, 2011 में ललित मोदी पर कार्यवाही तेज करते हुए उसके पासपोर्ट को रद्द कर दिया था, लेकिन अगस्त, 2014 में दिल्ली हाईकोर्ट ने ललित मोदी के पासपोर्ट को रद्द करने के केंद्र सरकार के आदेश को असंवैधानिक करार दे दिया। जाहिर है हाई कोर्ट के इस फैसले को सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए थी, पर मोदी सरकार इस मामले में बिल्कुल खामोश बैठी है। उसने अभी तलक अपनी तरफ से इस तरह की कोई पहल नहीं की है। यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, ललित मोदी प्रकरण में जरा सा भी संजीदा हैं, तो उन्हें ब्रिटिश सरकार से ललित मोदी के प्रत्यार्पण की मांग तेज करना चाहिए। ललित मोदी, कानून के भगोड़े हैं, बीते पांच साल से वे न्यायिक वारंट और समन से बचते रहे हैं, लिहाजा उनकी किसी भी तरह की मदद कानूनी और नैतिक रूप से गलत है। उनको मदद पहुंचाने के मामले मंे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे सिंधिया भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, मनी लांड्रिंग अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के उल्लंघन की दोषी हंै, लिहाजा दोनों को ही अपने पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यदि बीजेपी और मोदी सरकार में जरा सी भी नैतिकता है, तो उसे इन दोनों से इस्तीफा लेकर इनके ऊपर कार्यवाही की तैयारी करना चाहिए।

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