सेल्फीट विथ डाटर्स – एक सच

5:46 pm or July 7, 2015
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—–अलका गंगवार——-

टि़वटर सेना के सेनानायक ने आज अपने टि़वटर सिपाहियों को आदेश दिया है कि वे नकारात्‍मक और अभद्र टिप्‍पणियों का रूखा जबाब न दिया करें, और सकारात्‍मक टिप्‍पणियां करें साथ में उन्‍होनें अपने समर्थकों को सोशल मीडिया का शालीनता से इस्‍तेमाल करने की नसीहत भी दी  है. टि़‍वटर सेनापती जो 2014 में यह मानते थे कि सोशल मीडिया नहीं होता तो हिंदुस्‍तान की क्रियेटिविटी का ही पता नहीं चलता, शायद वह आज अपने सैनिकों की तथाकथित क्रियेटिविटी पर शरमाने के जगह उनका हौशला अफजाई कर रहे हैं, वे और कहना चाहते हों कि तुमने जो कविता कृष्‍णन को गाली गलौच्‍ की है वह तुम्‍हारा मेरें प्रति अतिप्रेम प्रदर्शित करता है, मगर तुम संयम बरतते तो अच्‍छा होता | टि़वटर सेनानायक कहते है यों तो तुम्‍हारे दुश्‍मन भी दया के पात्र नहीं हैं, क्‍योंकि उन्‍होनें मुझे जितने अपशब्‍द कहें हैं उससे तो पूरा ताजमहल ढक जाये. वे यह भी कहते है कि मित्रों आप धैर्य मत‍ खोना शायद क्‍योंकि इससे उनकी ट़वीटी सेना की बहुत आलोचना हो रही है. सेनापति जी शायद आप भूल गयें है कि टिवटरी सेना का सर्वप्रथम उपयोग आपकी ही रणनीति थी और इसी टिवटरी सेना का दर्शन आपकी मूल राष्‍टवादी जमात राष्‍टीय स्‍वयं सेवक संघ ही है.

सेल्‍फी विथ डाटर का जुमला आपने शायद वंसुधरा, ईरानी एवं सुषमा से घ्‍यान हटाने के लिये उछाला होगा और जिसका राजनैतिक जबाब आपको मिला, परन्तु उससे आपकी टिवटरी सेना बौखलागई और मर्यादा की सभी सीमायें / हदें पारक उसने अपना  बर्बर एवं भयानक चेहरा उजागर कर दिया. आपके दल एवं संगठनों में मुखोटा चढाकर अपनी बात कहने की आदत है, लेकिन यह नव नियुक्‍त टिवटर सेना शायद इतनी दक्ष नहीं है, इसलिये आप उसे धैर्य न खोने का पाठ पढा रहें है. आपने यह तो अपनी टि़वटर सेना को यह स्‍पष्‍ट कर दिया होगा कि आपको कविता कृष्‍णन एवं सेढ जैसी उन बेटियों से कितनी नफरत है जो आपके विचारों से सहमत नहीं हैं, वरना आप उन टि़वटर सैनिकों को जो आपके सेल्फी सुझाव से मतभेद रखने वाली बेटियों को नागरिक नहीं मानते  हैं एवं उनके मानवीय गरिमा को तार तार कर, आपको खुश करने के लिए नंगा कर लिये बाजार में घुमाना चाहते हैं, के प्रति आपने रोष तो दिखाया होता या उन पर एक स्‍त्री की गरिमा नष्‍ट करने के प्रयास में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निेर्देश दिया होता. इससे इतर आप अपने उपर लिखे गये अपशब्‍दों को लेकर ज़रूर ब्‍यथित थे |

आखिर उन बेटियों ने अपके सेल्‍फी विथ डाटर के अभियान के विषय में मात्र इस ओर ही तो लोगों का ध्‍यान खींचा था कि सत्‍ता में बैठे लोग कैसे अच्‍छे चेहरों को देख उनकी जासुसी करते है. क्‍या यह संयोग नहीं कि उस पर बैठाये गये आयोग को भी आपने समाप्‍त कर दिया. माना विरोधियों ने आपको बदनाम करने के लिये यह आरोप लगाया होगा, लेकिन आप भी धैर्य रखते और आयोग की रिपोर्ट को आ जाने देते, सभी को पता लग जाता कि हम दूसरों की बेटियों के प्रति क्‍या भावना रखते हैं, यौं तो आपके टिवटरों ने इस सबाल का उत्‍तर बडी बेशर्मी से और खुलेपन में दे दिया है कि मेरी बेटी बेटी है और दूसरों की बेटी ………. लिख भी नहीं सकती जो कि आपके टिवटर सेना ने लिखा है. बैसे दूसरो की बेटियों का मजाक आप से अच्‍छा कौन बना सकता है और यह शुरूआत भी तो आपने ही की थी. आप अच्‍छा मजाक या भददा मजाक करने में मास्‍टर हैं. ए – से आदर्श, बी – से बोफोर्स, सी – से सीडब्‍लूजी, डी- से दमादों का कारोबार. ऐसे जुमले एवं और कुतिस्त रोमान्‍च्‍ आप पैदा करने में उस्‍ताद हैं, फिर आप किसी और की आलोचना से उददेलित क्‍यों हो जाते हैं. आपकी बेचैनी ने आपके टिवटर फालोवर्स्‍ को उन सभी बेटियों को बेइज्‍जत करने का अधिकार क्‍यों दे दिया है जो आपसे या आपके किसी सांस्कृतिक  आतंकवाद से सहमत नहीं हैं. काश अच्‍छा होता कि आप अपनी टि‍वटरी सेना को धेर्य रखने की सलाह से आगे बढ़कर निम्न स्तर की ट्विटरित आलोचना करने वालों पर भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा के अंतर्गत जिसमें स्त्री की गरिमा पर हमला करना अपराध है कार्यवाही सुनिश्चित करते. लगता है कि आपकी टिवटर सेना उस मनुस्‍मृति युग् के विचारों से पली बढ़ी एवम् संस्कारित हे जिसमें एक महिला पर किया गया अत्‍याचार गांव के बलशालियों के खेमें में चटकारे  लेकर लोगों के मनोरंजन एवं कुत्सा निकालने का दिनचर्या का हिस्‍सा है.

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