बच्चों को आतंकी बनाने का खेल,खेलता पाकिस्तान

2:48 pm or August 8, 2015
terrorist

——प्रमोद भार्गव——–

इस्लाम के बहाने अपने ही बच्चों को आतंकवादी बनाने में पाकिस्तान जुटा दिख रहा है। मुबंई हमलों के जिंदा बचे गुनहगार अजमल कसाब के बाद आतंकवादी मोहम्मद नावेद उर्फ कासिम खान का जिंदा पकड़ा जाना इस तथ्य का पुख्ता सबूत है। नावेद ने पुलिस को दिए बयान में कबूला भी है कि उसने हमउम्र 5 साथियों के साथ भारत-पाक सीमा लांघी थी। उसने यह भी मंजूर किया कि हम सभी पाकिस्तान की सेना द्वारा इस्लाम के बहाने प्रषिक्षित किए गए हैं। खतरनाक हथियारों और उपकरणों का संचालन सेना ने ही सिखाया है। इन छह आतंकियों में से तीन गुरूदासपुर हमले में मारे गए,एक जम्मू-ऊधमपुर मार्ग पर सीमा सुरक्षा बल के सैनिक द्वारा मार गिराया गया। यह आतंकी नावेद के साथ था। भागते हुए नावेद को अपनी जान जोखिम में डालकर ग्रामीण युवकों ने पकड़ लिया था। एक अभी भी भारतीय सीमा में भटक रहा है। घुसपैठ कर भारत आए इन आतंकियों की जमात से साबित होता है कि पाक अपने ही नादान बच्चों को आतंकवादी बनाने का खतरनाक खेल,खेल रहा है। बच्चों,किषोर और युवाओं के मानवाधिकार हनन के वैषिवक पैरोंकारों को यह मुद्दा अंतरराश्ट्रीय फलक पर उठाने की जरूरत है।

पाकिस्तान के पुर्व फौजी षासक जनरल जिया उल हक ने पाक को जिस उग्र इस्लामीकरण के रास्ते पर डाला था,उसमें कोई बदलाव पाक कट्ट्रपंथी ताकतों को पसंद नहीं है। यही वजह है कि दूरगामी नीती अपनाने की दृश्टि से एक तो पाक ने भारत के सीमावर्ती गांवों के युवाओं को नषे का ऐसा लती बना दिया कि वे निकम्मे तो हुए ही,किसी भी प्रकार के प्रतिरोध की ताकत भी उन्होंने खो दी। इसका सबसे ज्यादा नुकसान पंजाब की युवा पीढ़ी ने भुगता। चूंकि पंजाब की राज्य और देष की केंद्र सरकारें इन नषीले पदार्थों की आमद को साधारण तस्करी या कारोबार मानती रहीं,इसलिए उन्होंने इस समस्या को कभी गंभीरता से लिया ही नहीं। एक पूरी पीढ़ी के बरबाद होने के बाद अब आंखें तो ख्ुल गई हें,लेकिन इस दिषा में कठोर कार्रवाही की दरकरार अभी भी है। हमारी इस अनदेखी और राजनीतिक स्वार्थपरता का परिणाम यह निकला कि जो सबसे ज्यादा बौद्धिक व लड़ाकू कौम थी,बड़ी संख्या में उस कौम के सिख युवा नषे की गिरफ्त में आकर अपनी ही जिंदगी के लिए बोझ बन गए हैं। अब तो ये युवा आत्मघाती कदम भी उठाने लग गए हैं।

दूसरे पाक ने अपनी अवाम के अवचेतन में पल रहे मंसूबे ‘हंस के लिया है पाकिस्तान,लड़के लेंगे हिंदूस्तान‘ को अमल में लाने की दृश्टि से मुस्लिम कौम के उन गरीब और लाचार युवाओं को इस्लाम के बहाने आतंकवादी बनाने का काम षुरू किया,जो अपने परिवार की आर्थिक बद्हाली की आर्थिक सुरक्षा चाहते थे। पाक सेना के भेश में ये यही आतंकी अंतरराश्ट्रीय नियंत्रण रेखा और भारत-पाक सीमा पर छद्म युद्ध लड़ रहे हैं। कारगिल युद्ध में इन छदृम बहरूपियों की भी अहम् भूमिका थी। इस हकीकत का पर्दाफार्ष खुद पाक के पुर्व लेफ्टिनेंट एवं पाक खुफिया एजेंसी आईउसआई के सेवानिवृत्त अधिकारी रहे षाहिद अजीज ने किया है। अजीज ने पाक से प्रकाषित अखबार‘द नेषनल डेली‘ में लिखा था ‘कारगिल की तरह हमने अब तक जो भी भारत से निरर्थक लड़ाईयां लड़ी हैं,उनसे हमने कोई सबक नहीं लिया है। सच्चाई तो यह है कि हमारे गलत और जिद्दी कामों की कीमत हमारे बच्चे अपना खून देकर चुका रहे हैं।

इसी तरह पाकिस्तानी तालिबानी कामांडर अदनान रषीद ने 2013 में एक साक्षात्कार में खुलासा किया था कि ‘उसे पाक वायु सेना के कर्मचारी की हैसियत से सरकारी प्रषिक्षण षिविर में भेजा गया। जहां उसने अनुभव किया कि हम वर्दी में सैनिक हैं और जैष के लड़ाके बिना वर्दी वाले सैनिक। हम जैष निर्देषों का पालन करते हैं और वे आईएसआई से निर्देष लेते हैं।‘ मसलन पाक में वास्तव में कौन लड़ाका वास्तविक सैनिक है और कौन आतंकी,इनके बीच विभाजक रेखा खींचना मुष्किल है ? यही वजह थी कि पाक ने कारगिल में घुसपैठियों को आतंकी बताने की कोषिष की थी,जबकि वे पाक सेना के सिपाही थे। इस तथ्य का खुलासा करते हुए षाहिद अजीज ने लिखा था, ‘कारगिल युद्ध में पाक आतंकी नहीं,बल्कि उनकी वर्दी में सेना के नियमित सैनिक ही लड़ाई लड़ रहे थे। इस लड़ाई का लक्ष्य सियाचिन पर कब्जा करना था। चूंकि यह लड़ाई बिना किसी योजना और अंतरराश्ट्रीय हालातों का अंदाजा लगाए बिना लड़ी गई थी,इसलिए तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुषर्रफ ने पूरे मामले को रफा-दफा कर दिया था। क्योंकि यदि इस छद्म युद्ध की हकीकत सामने आ जाती तो मुषर्रफ को ही संघर्श के लिए जिम्मेबार ठहराया जाता।‘

कुछ समय पूर्व अंतरराश्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की 139 पन्नों की रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट में स्पश्ट खुलासा था कि पाकिस्तान का इतिहास और सामाजिक आध्यन की पाठ्य पुस्तकों में भारत और ब्रिटेन के संबंध में नकारात्मक टिप्पणियों से अटी पड़ी हैं। ये पाठ अल्पसंख्यकों में खासकर हिंदूओं के खिलाफ नफरत और असहिश्णुता को बढ़ावा देते हैं। षिक्षक धार्मिक अल्पसंख्यकों को ‘इस्लाम के षत्रु‘के नजरिए से देखते हैं। पाक का यह दुराग्रह केवल हिंदूओं के परिप्रेक्ष्य में ही नहीं है,ईसाईयों और अहमदियों के प्रति भी है। जबकि अहमदि खुद को मुसलमान मानते हैं,लेकिन पाकिस्तानी संविधान उन्हें मुसलमान नहीं मानता।

आयोग ने पाक के चार प्रांतों में पढ़ाई जा रहीं कक्षा एक से लेकिर 10 तक की 100 से ज्यादा पाठ्य पुस्तकों की समीक्षा की थी। इतिहास पुस्तकों के पाठ की षुरूआत तो भारत विरोधी पाठ से ही होती है। इस पाठ में उल्लेख है कि 20 जून सन् 712 ईस्वी में मोहम्मद बिन कासिम द्वारा सिंध के राजा दाहिर सेन्य की पराजय के बाद हत्या कर दी गई थी। तत्पष्चात मुस्लिमों ने आठ षताब्दियों तक भारत पर षासन किया और अब फिर से करेंगे। दरअसल पाक में स्कूली किताबों में इस्लामीकरण की षुरूआत अमेरिकी सैन्य षासक जिया उल हक के कार्यकाल में ही हो गई थी,जो आज तक निरंतर बनी हुई है। हालांकि आयोग के अध्यक्ष लियोनार्ड लियो ने 2006 में दी रिपोर्ट में दुनिया को आगाह किया था कि नफरत व भेदभाव के पाठ पढ़ाने से पाकिस्तान में धार्मिक कट्टरपंथियों की हिंसा के लगातार बढ़ने,धार्मिक स्वतंत्रता,राश्ट्रीय और धार्मिक स्थायित्व व वैष्विक सुरक्षा के कमजोर होने की पूरी-पूरी आषंका है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है। 2006 में प्रकाषित हुई इस रिपोर्ट की आज सभी आषंकाएं सही साबित हो रही हैं। हालांकि रिपोर्ट के दबाव में तत्काल तो पाक सरकार ने किताबों से विवादास्पद सामग्री हटाने की हामी भर भी ली थी,लेकिन कट्रता के प्रबल समर्थक दक्षिणपंथी षासक अभी तक एक भी पाठ को हटा नहीं पाए हैं ?

यही वजह है कि पाक में दहषत के मारे हिंदू परिवार लगातार पालयन को विवष हो रहे हैं। इसी संदर्भ में हिंदू धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग ने कहा भी है कि ‘नवाज षरीफ सरकार हिंदूओं की सुरक्षा को लेकर न सिर्फ लापरवाह है,बल्कि उसकी कट्टरपंथियों के साथ सांठगांठ भी है। पाक में अल्पसंख्यक गरीब ईसाईयों को ईष निंदा कानून की अवहेलना करने पर कोड़े मारे जाते हैं और अहमदिया मुसलमानों को खुले हमलों में मार दिया जाता है। अन्य,धर्म समुदायों की तो छोडि़ए जब पाक के ही पंजाब प्रांत के गवर्नर व उदारवादी नेता रहे सलमान तासीर ने ईष निंदा कानून को काला कानून की संज्ञा दे दी थी,तब उनके अंगरक्षक मलिक मुमताज हुसैन कादरी ने ही तासीर की हत्या कर दी थी। बहरहाल जो देष खुद आतंकियों की फसल उपजाने में लगा हो,उसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाना मूर्खता के सिवाय कुछ नहीं है। बेहतर है पाकिस्तान को उसी के लहजे में उसी के हरकतों के मुताबिक कड़ा जबाव दे दिया जाए। अन्यथा भारत मुंह की ही खाता रहेगा।

Tagged with:     ,

About the author /


Related Articles

Leave a Reply

Humsamvet Features Service

News Feature Service based in Central India

E 183/4 Professors Colony Bhopal 462002

0755-4220064

editor@humsamvet.org.in