आमिर पर किसका अख्तियार?

1:01 pm or July 21, 2014
2107201412

शाह आलम-

टीवी कार्यक्रम सत्यमेव जयते के जरिये सामाजिक विषयों पर सवाल खड़ा करने वाले बॉलीवुड के अभिनेता आमिर खान इन दिनों खासी चर्चा में हैं। आमिर के कैम्पेन वोट फार चेंज का असर देश के तमाम हलकों सहित खुद उनके पुश्तैनी गांव शाहबाद स्थित अख्तियारपुर में कितना है, यह देखना दिलचस्प है। उत्तर प्रदेष के हरदोई जिले से 40 किलोमीटर दूर अख्तियारपुर, शाहबाद पहुंचने पर तेज गर्मी के बावजूद पेड़ों पर लदे हुए आम रुह को राहत देते हैं। यहां आमिर खान के घर का पता पूछो तो लोग अनमने भाव से खिसकने की कोशिश करने दिखते हैं।

अजीब बात है कि सुपर स्टार की छवि वाले आमिर खान, जो जनता के सवालों को टीवी स्क्रीन पर गंभीरता से दिखाते हैं, उनके खंडहरनुमा पुश्तैनी मकान का पता बताने में यहां के लोग हिचकते हैं। छानबीन करने पर एक बात यह पता लगती है कि लोगों को शायद डर है कि इस घर के कब्जेदारों से कहीं कोई विवाद न हो जाए। लोग पता बताने के बजाय कहते हैं, घर छोड़िए, चलिए आपको गांव दिखाते हैं।

धीरे-धीरे लोग इकट्ठा होने लगते हैं और बातचीत चल निकलती है। गांव के ही बुजुर्ग हरिया बाबू बताते हैं कि अख्तियारपुर, शाहबाद का सबसे गिरा हुआ मुहल्ला है। यहां बिजली नहीं है। पीने के पानी के लिए केवल तीन सरकारी हैंडपम्प हैं। रोड पर बिजली के खम्भे जो दिखाई देते हैं, उनमें बिजली नहीं आती है। यहां 90 फीसदी लोग मजदूरी करते हैं, जिन्हें किसी तरह अपने परिवार का पेट पालना है। पचास साल के प्रहलाद बताते हैं कि 150 घरों वाले इस मुहल्ले में करीब चार सौ लोग रहते हैं। अधिकतर भूमिहीनों को कोई बुनियादी सुविधा नहीं मिल रही है। आबादी दलित बहुल है और सरकारी स्कूल, अस्पताल, पुस्तकालय, सब नदारद हैं। यही सब सुनते-सुनाते हम आगे बढ़ते हैं और आमिर के घर की ओर बढ़ते हैं।

सिर पर चढ़ चुके सूरज तले गांव के दो लोग खेतों और बड़े-बड़े बगीचों के बीच से गुजरते हुए हमें सुनसान सी जगह पर लेकर पहुंचते हैं। यहीं पर झाड़-झंखाड़ के बीच जुड़वां सटी हुई एक इमारत हैं। एक तरफ खानदानी मस्जिद है, जिस पर जामा मस्जिद अली बाग दर्ज है। यह जर्जर और वीरान है। अंदर मिट्टी के ढेर देखकर लगता है कि काफी दिनों से सफाई नहीं हुई है। यहीं पर मस्जिद से सटी छत के नीचे आमिर के परदादा हाजी मोहम्मद हुसैन खां की पक्की कब्र बनी है जिस पर रेत और मिट्टी बिखरी पड़ी है। कब्र के सिरहाने पर लगा पत्थर बताता है कि इसे हाजी बाकर हुसैन खां ने बनवाया था।

दरअसल आमिर के दादा जाफर हुसैन खां के तीन बेटे बाकर हुसैन खां, नासिर हुसैन खां और ताहिर हुसैन खां यहां पर एक साथ रहते थे। पचास के दशक में नासिर हुसैन मुंबई चले गए। मुंबई पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कामयाब निर्माता-निर्देशक बन गए। कामयाब होने के बाद उन्होंने ताहिर हुसैन को अपने पास बुला लिया। वहीं पर आमिर और फैसल पैदा हुए। इन दोनों भाइयों ने ‘मेला’ फिल्म में साथ काम किया है। आमिर के पिता ताहिर हुसैन ने भी कई फिल्में बनाईं। गांव के जानकार बताते हैं लगभग 25 एकड़ का यह बाग आमिर खान की मिल्कियत है। इसके अलावा दो बाग और हैं।

आमिर के पुश्तैनी घर के अंदर जाने पर 46 साल के आकिल अली मिलते हैं, जो अनपढ़ हैं और अब थक-हार कर पान की दुकान चलाने लगे हैं। उनकी मां सलमा बेगम इसी घर में रहती हैं। कच्चे चूल्हे पर खाना बनाते हुए बताती हैं कि यह घर दस बीघे में है, लेकिन पूरा खंडहर में बदल गया है, बस खानदानी यादें रह गई हैं। ताहिर हुसैन को 1975 में निर्मित फिल्म जख्मी के लिए जो ट्रॉफी मिली थी, उसे उन्होंने अपने बड़े भाई बाकर हुसैन को उपहार में दे दी थी, लेकिन अब वह ट्रॉफी भी पुश्तैनी घर में गुबार में दब गई है।

बरसों पहले 4 जनवरी 2008 को फैसल खान जायदाद विवाद के सिलसिले में शाहबाद आए थे। पुश्तैनी घर आए, खानदान के लोगों से और शाहबाद निवासियों से भी मिले। आमिर के खानदानी भाई नईम शाहाबादी कहते हैं कि वे लोग आमिर को शिद्दत से याद कर रहे हैं। वे कहते हैं कि जब यहां दिलीप कुमार, राकेश, जॉनी वाकर, रजा मुराद जैसी हस्तियां तफरीफ ला चुकी हैं तो आमिर जरूर आएंगे। नईम दबी जबान में कहते हैं, मैं उनका खानदानी हूं इसीलिए हर कोई मुझसे ही पूछता है। आमिर की नजर काश इधर भी पड़ती और वे शाहबाद की तरक्की के बारे में भी कुछ सोचते… काश सरकारों के कान तक भी ये बात पहुंचती।

सत्यमेव जयते के बहाने सोच बदलने, समाज बदलने निकले आमिर को लेकर यहां के लोग सरकार और प्रशासन से भी कहीं ज्यादा उम्मीद पाले हुए हैं। आमिर इन दिनों बुनियादी जन सुविधाओं की जिस तरह से वकालत कर रहे हैं और देश के सभी नागरिकों को स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा दिलाना चाहते हैं, उसी से उनके गांव के लोगों में उम्मीद भी बंधी है। परदे पर दिख रहे आमिर के सामाजिक अभियान का सच चाहे जो हो, बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे शाहबाद कस्बे का अख्तियारपुर विकास और आमिर की राह अब भी देख रहा है।

Tagged with:     ,

About the author /


Related Articles

Leave a Reply

Humsamvet Features Service

News Feature Service based in Central India

E 183/4 Professors Colony Bhopal 462002

0755-4220064

editor@humsamvet.org.in