आतंकवाद पर मोदी का बुध्दिविलास

2:19 pm or July 21, 2014
210720141

– हरे राम मिश्र  –

हाल ही में ब्राजील में संपन्न हुए छठवें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान, वैष्विक आतंकवाद की चुनौती पर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आतंकवाद को पनाह और समर्थन करने वाले राष्ट्रों पर वैष्विक बिरादरी द्वारा सामूहिक दबाव बनाया जाना चाहिए,जिससे कि वे इसे समर्थन देना बंद करें। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में हो,मानवता के खिलाफ है और उसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक आतंकवाद एक ऐसा खतरा है, जो युध्द जैसा रूप धारण कर चुका है। मोदी के मुताबिक आतंकवाद मासूम नागरिकों के खिलाफ एक छद्म युध्द जैसा है। ब्रिक्स के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि अलग अलग मापदंडों की वजह से ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद का सामना प्रभावशाली ढंग से नहीं कर सका है। उन्होंने कहा कि मानवता को एकजुट होना चाहिये और आतंकवादी ताकतों,विशेषकर उन देषों को अलग थलग कर देना चाहिए जो बुनियादी नियमों की अवहेलना करते हैं। मोदी के मुताबिक सिर्फ आतंकवाद पर निशाना साधने से ही बात नहीं बनेगी। आज जिस तरह से दुनिया के एक बड़े हिस्से में उथल-पुथल मची हुई है वह पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है।

गौरतलब है कि वैष्विक आतंकवाद, जिसका शिकार भारत को भी माना जाता है, पर बोलते हुए नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में जो कुछ भी कहा है, वह कतई नया नहीं है और पिछले लगभग बीस वर्र्षों से भारतीय राजनीति के एक बड़े तबके, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के द्वारा कई बार दोहराया जा चुका है। देश में आतंकवाद पर जब भी कोई बात शुरु होती है, यह तथ्य जरूर सामने आता है कि पाकिस्तान समर्थित उग्रवादी तत्वों द्वारा ही देश में आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। मोदी का इषारा भी इसी ओर था। वे भारतीय राज्य व्यवस्था द्वारा आतंकवाद के सांप्रदायिक पारिभाषीकरण को दोहराते हुए शब्दों और भावनाओं की बाजीगरी में समस्या का हल देख रहे थे। लेकिन जब समस्या को समझने का तरीका ही किसी खास किस्म के पूर्वाग्रह से पीड़ित और विषुध्द राजनैतिक हो तो फिर उसका माकूल हल कैसे निकाला जा सकता है? दरअसल, समूचे वैष्विक आतंकवाद को केवल राजनैतिक समस्या के बतौर ही समझा जा सकता है जिसके समूचे कृत्य सत्ता पर कब्जा करने के इर्द-गिर्द घूमते हैं। और यही वजह है कि कई देश आतंकवाद पर खुलेआम दोहरा मापदंड रखते हैं।

बेशक, इस दुनिया में इस्लामिक चरमपंथ की मौजूदगी से कोई इनकार नहीं हैं और यह पूरी मानव सभ्यता के लिए गंभीर खतरा भी है। लेकिन जब हम इस देश में आतंकवाद के मौजूदा स्वरूप और समस्या के हल पर बात करते हैं तो हमें इस्लामिक आतंकवाद समेत हिन्दू आतंकवाद और लोकतंत्र को निगलने को तैयार खड़ी खुफिया एजेंसियों के बेलगाम चरित्र को भी ध्यान में रखना ही होगा। यह कटु सच्चाई है कि इस देश में मुस्लिम आतंकवाद के साथ-साथ हिन्दू आतंकवाद की समस्या भी लगातार बढ़ी है और ऐसा हिन्दू धर्म के ‘हिन्दुत्वीकरण’, जिसे संघ जैसे संगठनों द्वारा राजनैतिक लाभ के लिए ‘शातिराना’ तरीके से मुसलमान मुक्त भारत के रूप में पारिभाषित किया गया है, जिम्मेदार है। आखिर नरेन्द्र मोदी आतंकवाद के इस रूप पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

ऐसा लगता है कि मोदी अपनी कुख्यात छवि को लेकर उपजे मानसिक अपराधबोध से अब तक निकल नहीं पाए हैं। वैसे भी ब्रिक्स सदस्य देश का कोई भी प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसी विवादित छवि नहीं रखता है। आज देश में मोदी एक ऐसे नेता हैं जिनके पास उपलब्धियों की अपेक्षा नाकामियों और गंभीर सवालों की एक लंबी फेरहिस्त है। आज मोदी जिस आतंकवाद को मानवता के लिए गंभीर खतरा बता रहे हैं कभी उनके शासनकाल में ही गुजरात के निहत्थे मुसलमानों पर ‘हिन्दू आतंकवादियों’ द्वारा बेइंतहां सितम ढाया गया है। उनके शासन काल में ही मुसलमानों का प्रायोजित उत्पीड़न हुआ है। यही नहीं फर्जी एनकाउंटरों की एक लंबी फेरहिस्त भी मोदी के सिपहसलारों ने गुजरात में खड़ी कर दी थी। उस वक्त मोदी ने क्या किया था। फर्जी केसों में फंसाना और किसी खास धर्म के लोगों का जानबूझ कर उत्पीड़न कराने में मोदी अद्वितीय रहे हैं। यही नहीं हाल में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में मोदी के मातृ संगठन संघ का एजेंड़ा ही मुस्लिम जाति के घोर विरोध का ही था, जो सत्ता प्राप्ति में मोदी का मददगार बना। क्या यह सब आतंकवाद की श्रेणी में नहीं आता? आतंकवाद की समस्या पर घड़ियाली आंसू बहाने से पहले मोदी को इन जनसंहारों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

वास्तव में नरेन्द्र मोदी का आतंकवाद की समस्या पर भाषण देना महज एक बुध्दिविलास है। मोदी संघ की उस विचारधारा के प्रतिनिधि हैं जो मुसलमानों को ही समस्त समस्याओं की जड़ मानती है। किसी खास वर्ग के खिलाफ सुनियोजित साजिशें करना, धमकाना और उनका उत्पीड़न भी आतंकवाद ही है। यही नहीं असीमानन्द और साध्वी प्रज्ञा जैसे संघ के कई नेता देश में बम विस्फोट कर बेगुनाहों की जान लेने के मामले में जेल में बंद हैं। आखिर मोदी इनके बारे में क्या सोचते हैं? मोदी को इन सब पर भी अपनी स्थिति स्पश्ट करनी चाहिए। कुल मिलाकर आज देश में आतंकवाद की समस्या को हल करने के लिए समग्रता में देखने की जरूरत है। जरूरत आतंकवाद के कारणों की सही समझ की है। देश में आतंकवाद की समस्या कानून और व्यवस्था की नहीं बल्कि विषुध्द राजनैतिक है जो सत्ता पर पहुंचाने और उतारने के लिए बेगुनाहों के खून की होली खेलती है। देश में आतंकवाद के समूचे खेल को समझने के लिए जरूरी है कि इस्लामिक आतंकवाद की उर्वराभूमि को खोजने के साथ, संघ की काली करतूतों पर कठोर पाबंदी, बाबरी मस्जिद का विध्वंस का इंसाफ, नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा गुजरात में कराए गए।

सांप्रदायिक कत्लेआम का वास्तविक इंसाफ, देश की खुफिया एजेंसियों का जन विरोधी और लोकतंत्र विरोधी चरित्र को तुरंत खत्म करने के साथ उन्हे संसद के प्रति जवाबदेह बनाने समेत कई क्रान्तिकारी कदम उठाने होंगे। सिर्फ चिंता व्यक्त करने से कुछ नहीं होगा। जरूरत ठोस करने की है। लेकिन सवाल यह है कि क्या मोदी में ऐसा कुछ भी कर पाने की कोई व्यावहारिक हिम्मत है? शायद बिल्कुल नहीं। तो फिर महज बुध्दिविलास से क्या होगा?

Tagged with:     , ,

About the author /


Related Articles

Leave a Reply

Humsamvet Features Service

News Feature Service based in Central India

E 183/4 Professors Colony Bhopal 462002

0755-4220064

editor@humsamvet.org.in