विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई जनसंख्या स्थिरीकरण का लक्ष्य बनेगा- वरदान !

12:08 pm or July 7, 2014
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डॉ सुनील शर्मा-

किसी भी देश के विकास के लिए जनसंख्या स्थिरीकरण आवश्यक है। जनसंख्या स्थिरीकरण से आशय यह है कि जन्म और मृत्यु के बीच संतुलन बना रहे, ताकि जनसंख्या स्थिर बनी रहे। शायद इसी बात को ध्यान में रखकर दार्शनिक अरस्तू ने कहा था कि- किसी देश की जनसंख्या न तो इतनी कम होनी चाहिए कि जिससे देश आत्मनिर्भर न हो सके और न ही इतनी अधिक होनी चाहिए कि जिससे स्व-शासन के मार्ग में रूकावटें खड़ी हो जाएॅ। ऐसे में बीच का सही रास्ता यही है कि जनसंख्या को स्थिर रखा जाए।

जहॉ रूस, जापान, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली, पोलेण्ड, जर्मनी और सिंगापुर जैसे देश अपने यहॉ की घटती जनसंख्या दर से चिंतित है। तो वहीं भारत,चीन और बॉग्लादेश जैसे देश जनसंख्या वृद्वि से हलाकान है। मजेदार बात ये है कि जनसंख्या की कमी से जूझते देशों में लोगों को संतानोत्पत्ति के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। रूस में जनसंख्या वृद्वि के लिए वहॉ के पूर्व राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ने 10 वर्षीय जनसंख्या बढ़ाओ कार्यक्रम की शुरूआत की थी। आस्ट्रेलिया में वहॉ के निवासियों से राष्ट्रीय अपील की गई है कि वहॉ हर महिला कम से कम तीन बच्चे पैदा करे,एक मम्मी के लिए,एक पापा के लिए और एक देश के लिए। जापान अपने यहॉ कार्यशील जनसंख्या में बुर्जुगों की संख्या बढ़ने और युवाओं की संख्या घटने से चिंतित है और वहॉ भी जनसंख्या वृद्वि को विशेष के लक्ष्य के रूप मे स्वीकार किया है।वहीं जनसंख्या वृद्वि से जूझते देश जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए तमाम उपाय कर रहें है।

लेकिन हमारे देश में बढ़ती आबादी चिंताजनक है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक देश की कुल जनसंख्या 1.21 अरब हो गई है। यह वृद्वि पिछली जनगणना के ऑकड़ों की तुलना में 17.64 प्रतिशत अधिक है। हमारी जनसंख्या में 1.4 प्रतिशत वार्षिक दर से वृद्वि हो रही है, यह वृद्वि चीन की वार्षिक वृद्वि 0.6 प्रतिशत की ढाई गुनी अधिक है आंकड़ों के अनुसार देश में 2001-2010 के दशक में जनसंख्या में 18.14 करोड की वृद्वि हुई है। इससे स्पष्ट है कि देश में जनसंख्या नियोजन के प्रयास उतने सफल नहीं हो पा रहें हैं जितने होने चाहिए। जनसंख्या वृद्वि के कारण देश के समक्ष कई चुनौतियॉ बढ़ी है। रोटी,पानी और रोजगार की उपलब्धता के मुद्दे पर गंभीर संकट है। रोजी रोटी की तलाश में गॉवों से शहरों की ओर पलायन लगातार जारी है जिससे 2030 तक देश की शहरी आबादी 40.7 फीसदी होने की संभावना है। निश्चित रूप से शहरों पर आबादी का अतिरेक्य त्रासदी की स्थितियॉ निर्मित करेगा। पानी की उपलब्धता 1950 के दशक में जहॉ 6008 घनमीटर प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति थी जो कि वर्ष2001 में घटकर 1525 घनमीटर रह गई।विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2025 तक यह उपलब्धता घटकर 1060 घनमीटर प्रतिव्यक्ति रह जाएगी। इन स्थितियों में देश की दो तिहाई और 88 प्रतिशत शहरी आबादी शुद्व पेयजल से वंचित रहेगी। रोजगार की समस्या से युवा असंतोष बढ़ रहा है,उच्चशिक्षा हासिल करने के बाद भी युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे युवा या तो अपराधी बन रहे हैं या फिर आत्मघाती। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के ताजा ऑकड़ों के मुताबिक आर्थिक तंगी के कारण पिछले साल 2678 लोगों ने खुदकशी की और यह तादात वर्ष 2012 के मुकाबले 13.6 प्रतिशत अधिक है। बढ़ते अपराध, आतंकवाद और बढ़ता नक्सलवाद भी जनसंख्या वृद्वि से उपजी बीमारियॉ है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1983 से रोजगार की सालाना वृद्वि दर में कमी के साथ बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ी है। तेज गति से बढ़ रही देश की जनसंख्या ने जहॉ विकास को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करगतिरोध पैदा किया है वहीं प्राकृतिक संसाधनों का भी तेजी से हनन किया है जिससे देश में पर्यावरणीय समस्याएॅ बढ़ रही है। कुल मिलाकर जनसंख्या वृद्वि देश के लिए समस्याओं का पिटारा और अभिशाप बनती जा रही है।

वास्तव में यदि हमें अधिक जनसंख्या की चुनौती से बचना है तो हर हाल में जनसंख्या स्थिरीकरण के उपाय करने होगें। जनसंख्या स्थिरीकरण के उपायों में सबसे अह्म है कि देश में उच्च प्रजनन की दर को नियंत्रित किया जाए। उल्लेखनीय है कि उच्च प्रजनन दर का मुख्य कारण है कम उम्र में लड़कियों का विवाह करना। ऑकड़ों के मूुताबिक उच्च प्रजनन दर वाले राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों की 60 से 70 फीसदी लड़कियों की शादी 18 से कम उम्र में कर दी जाती है। जिनमें से 35 फीसदी 18 से कम आयु में गर्भवती हो जाती है। संतान के रूप में पुत्र मोह भी जनसंख्या वृद्वि का एक कारण है। राष्टीय जनसंख्या नीति 1994 के मुताबिक वर्ष 2025 तक देश में जनसंख्या स्थिरीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है देश के विकास के लिए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समवेत प्रयासों की जरूरत है। निश्चित रूप से इस लक्ष्य की पूर्ति देश के लिए वरदान जैसी होगी ।

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