भारत, चीन और ब्रह्मपुत्र – शब्बीर कादरी

12:59 pm or October 1, 2016
भारत, चीन और ब्रह्मपुत्र

प्राकृतिक संपदा के बंटवारे को लेकर देशों के बीच और पड़ोसियों के बीच विवाद नया नयी नहीं है अक्सर ऐसा होता रहा है। सीमा विवाद के संदर्भ में चीनी घुसपैठ के चलते हम कई वर्षों से चेतावनी और सहनशीलता का परिचय देते रहे हैं पर हाल ही में चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी के हवाले से एक नये विवाद को पैदा कर देश के समक्ष गंभीर चिंता पैदा कर दी है। उसने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर सर्वाधिक ऊंचाई पर बांध बनाकर भले ही विश्व को अपनी तकनीकी कलाकौशल पर परिचय दिया हो पर उसकी इस हरकत से पड़ौसी देश भारत के समक्ष कई गंभीर संकट उत्पन्न हो जाने की संभावना बढ़ गई है। डेढ़ अरब अमेरिकी डालर की लागत के इस बांध पर हाल ही में जांगमू परियोजना के नाम से चीन की जलविद्युत इकाई की सभी छह इकाईयों को पावर ग्रिड से जोड़कर उत्पादन प्रारंभ कर दिया गया और कहा गया कि इससे प्रतिवर्ष ढाई अरब किलोवाट-घंटा बिजली पैदा होगी। याद रहे ब्रह्मपुत्र तिब्बत से बहती हुई भारत आती है जहां इसे यार्लुंग झांगबो कहा जाता है। इस परियोजना के संबंध में चीनी अधिकारियों का मत है कि इससे देश में बिजली समृध्दि में वृध्दि होगी तथा विकास नये आयाम का मार्ग प्रशस्त होगा। ब्रह्मपुत्र पर बने बांध से बढ़ा खतरा दुनिया की बड़ी नदियों के जलस्रोत तिब्बत में बांधों की विशालकाल श्रृंखला तैयार कर रहे चीन ने भारत में बाढ़ के साथ सुरक्षा की दृष्टि से बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस जांगमू हाइड्रोपावर स्टेशन से विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। तिब्बती पठार पर बना यह सबसे बड़ा बांध है। तिब्बत की बड़ी नदियों पर बांधों के विशालकालय जलाशयों को लेकर भारत पहले भी चीन के समक्ष चिंता जाहिर कर चुका है। लेकिन चीन का यही कहना है कि इन बांधों से न तो भारी मात्रा में पानी का भंडारण होगा और न ही नदियों के जल प्रवाह में कोई रूकावट आएगी। हालांकि सुरक्षा और सामरिक विशेषज्ञों का यही कहना है कि दोनों देशों में जमीन की जगह जल विवाद अब तनाव में बड़ी टकराहट का रूप लेता जा रहा है। चीन हमेशा सफाई देता रहा है कि तिब्बत में बिजली संकट का समाधान करने के लिये ये बांध जरूरी है। लेकिन ब्रह्मपुत्र अरुणाचल समेत पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिये जीवनरेखा है, लिहाजा भारत इसे हल्क में नहीं ले सकता। भारत ने जताई थी आपत्ति भारत ने चीन से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि निचले इलाकों में नदी प्रवाह में ऊपरी धारा वाले इलाकों की गतिविधियों से कोई नुकसान न पहुंचे। चीन ब्रह्मपुत्र पर कई बड़े बांध बना रहा है। चीन ने सफाई दी थी कि इन बांधों पर बहते पानी से ऊर्जा उत्पादन और जल भंडारण की जरूरत नहीं होगी। जुलाई में हुआ था समझौता उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की बीजिंग यात्रा के दौरान दोनों देश के बीच समझौते के तहत नदी के प्रवाह के संयुक्त अध्ययन को मंजूरी दी गयी थी। चीन 15 मई से 15 अक्तूबर तक ब्रह्मपुत्र के जलस्तर संबंधी आंकड़ों को साझा करने को राजी हुआ था। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह काफी नहीं है। जल संधि न होने से मुश्किलें भारत और चीन के बीच जल उपयोग की कोई संधि नहीं है लिहाजा भारत को चीन की जलविद्युत परियोजनाओं और उसके क्षेत्र में नदियों के प्रवाह की सीमित निगरानी की ही इजाजत है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े बांधों से निश्चित तौर पर जल प्रवाह में बदलाव आएगा। दूसरे देशों में भी ऐतराज 5 इतरिश व इली नदियों पर चीन के बांध बनाने पर कजाकिस्तान पहले ही जता चुका है विरोध 5 मीकांग पर चीनी बांधों से थाईलैंड, लाओस,

 वियतनाम, कंबोडिय को आपत्ति 5 मीकांग, ब्रह्मपुत्र, यांगत्से और यलो रिवर जैसी बड़ी नदियों का स्त्रोत तिब्बत हिमालय पर बांधों की बाढ़- 400 बांध प्रस्तावित, हिमालय की विभिन्न नदियों पर इस वक्त चीन, भारत, बांग्लादेश, पाक, भूटान और नेपाल बना रहे बांध, 100 बड़े बांध बना रहा चीन तिब्बत की 32 में से 28 बड़ी नदियों पर, 20 सालों में बांधों का सबसे बड़ा क्षेत्र बन जाएगा हिमालय, 60 बांध बना रहा चीन दपू, एशिया तक बहने वाली मीकांग नदी पर तिब्बत से चीन के तमाम इलाकों से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से बहती है मीकांग 129 जल विद्युत प्रोजेक्ट पर काम कर रहे भारत-चीन के पड़ोसी देश 292 बांध पर बना रहा भारत, लेकिन छोटे और निचले इलाकों में स्थित ब्रह्मपुत्र पर चीन की नजरे- 27 और बांध बना रहा चीन यारलुंग सांगपो पर (ब्रह्मपुत्र का चीनी नाम) 1625-किमी नदी का इलाका चीन में, 918 किमी भारत के इलाके में 25 लाख मेगावाट बिजली पैदा होगी जांगमू बांध से हर एक साल में 640 मेगावाट के एक और बांध पर काम कर रहा चीन। विशेषज्ञों ने चीन से सतर्क रहने का कहा भू-राजनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने हिमालय पर बन रहे बांधों की रिपोर्ट में कहा था कि जमीन के बाद चीन पानी के विशाल भंडारों को हड़प रहा है। न केवल वह तिब्बती पठार की नदियों का पानी खींच रहा है बल्कि विशालकाय बांध बनाने के लिये पाकिस्तान, लाओस, म्यांमार और अन्य देशों को धन मुहैया करा रहा है। विवाद जमीन से पानी की ओर मुड़ गया है। ब्रह्मपुत्र पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा भारत बीजिंग यात्रा पर गए विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने कहा कि भारत ब्रह्मपुत्रघाटी का एक विस्तृत अध्ययन तैयार कराएगा ताकि चीन से होने वाले जल प्रवाह का आंकलन किया जा सके। इसी के बांध से खतरे का सही आंकलन हो सकेगा। ब्रह्मपुत्र पर बांधों से क्या है खतरा 5 भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र और बांग्लादेश में अचानक बाढ़ का खतरा 5 भूस्खलन से निचले इलाके में भी लाखों जिंदगियां दांव पर 5 बाढ़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन में आएंगी व्यावहारिक दिक्तें आशा है भारत, चीन की इस चुनौती को कुटनीतिकरूप से विश्व के समक्ष रखकर अपनी चिंताओं का सकारात्मक समाधान चाहेगा।

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