केंद्र सरकार की उपेक्षा के शिकार कश्मीरी युवा – शशांक द्विवेदी

3:45 pm or May 5, 2017
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केंद्र सरकार की उपेक्षा के शिकार कश्मीरी युवा

कश्मीरी छात्रों को नहीं मिल रहा है प्राइम मिनिस्टर स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम (PMSSS) का लाभ

—– शशांक द्विवेदी ——

पिछले कुछ समय से कश्मीर में अशांति का दौर चल रहा है , हिंसा और पत्थरबाजी से पूरे कश्मीर का जनजीवन प्रभावित है । नोट बंदी के तुरंत बाद कश्मीर में हिंसा थमी थी लेकिन अब फिर कश्मीर सुलग रहा है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ,आखिर क्यों कश्मीर के युवा अपनी जान हथेली पर लेकर सेना के जवानों पर पत्थर फेक रहें है । इन सवालों के कई राजनीतिक जवाब हो सकतें है लेकिन गंभीरता से सोचें तो एक कारण यह भी है कि हम कश्मीर के युवाओं को देश की मुख्यधारा से नही जोड़ पायें है। पिछले दिनों कश्मीर के मुद्दे को लेकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के दो वर्गों में टकराव भी हुआ था । जिसमें एक पक्ष कश्मीर की आजादी के नारें लगा रहा है वही दूसरा पक्ष इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर देख रहा है। दोनों पक्ष ही इस मुद्दे पर राजनीति कर रहें है ,जबकि सच्चाई यह है कश्मीर के जमीनी हालात और वहाँ युवाओं की स्तिथि पर कोई बात नहीं कर रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार दावा कर रही है की वो जम्मू –कश्मीर के युवाओं को देश की मुख्य धारा से जोड़ना चाहती है वही दुसरी तरफ यूपीए के शासन के दौरान कश्मीर के युवाओं को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने और उन्हें राष्ट्र की मुख्य धारा में लाने के लिए चलाई गई प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम एनडीए सरकार के आने के बाद अब दम तोडती नजर आ रही है ।

असल में यूपीए सरकार ने साल 2011 में जम्मू-कश्मीर के गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए एक योजना शुरू की थी जिसके तहत वो देशभर में कहीं भी अपनी शिक्षा प्राप्त कर सकते थे । इसमें  प्रधानमंत्री विशेष स्कॉलरशिप योजना के तहत प्रतिवर्ष 5000 छात्रों को स्कॉलरशिप दी जानी थी। जिसमें 250 इंजीनियरिंग , 250 मेडिकल तथा अन्य कोर्सेस के लिये 4500 सीटें उपलब्ध थीं  । इस योजना के लिए यूपीए सरकार द्वारा 1200 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया था और इसके क्रियान्वयन के लिए एक इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी (आईएमसी) भी बनी थी । जिसका उद्देश्य साफ था कि प्रतिवर्ष जम्मू एवं कश्मीर से 5000 गरीब छात्र-छात्राएं प्रदेश से बाहर जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करें ताकि उन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा में लाया जा सके।सरकार ने  गरीब बच्चों को राज्य से बाहर आकर अन्य राज्यों में पढ़ने-लिखने और प्रशिक्षण प्राप्त कर उचित रोजगार पाने का सुनहरा अवसर प्रदान किया था।  इस विशेष स्कॉलरशिप योजना के तहत इसमें बच्चों का रहना, खाना एवं उनके पढ़ने की फीस शामिल थी। ऐसी सुविधा थी कि बच्चे अपनी मर्जी से मान्यता प्राप्त महाविद्यालय या विश्वविद्यालय चुनें । अपनी मर्जी के चुनिंदा कोर्स में पढ़ाई करें और अपने पढ़ने की सूचना सरकार को दें। यह सिलसिला वर्ष 2011-12 से प्रारम्भ हुआ। 2011-12 में 38 , 2012-13में 3775, 2013-14 में 4585, 2014-15 में 1314 , 2015-16 में 406 बच्चें जम्मू कश्मीर से निकले और उन्होंने देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लिया । योजना की निगरानी हेतु मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक समिति बनाई और उसके क्रियान्वन का काम एआईसीटीई को दिया गया। मगर दुर्भाग्य से ऐसे नियम बनाये गए कि फिलहाल यह योजना नियमों में ही फंसकर रह गयी। इसका मूल उद्देश्य ही खो गया है । अचानक एक नई प्रक्रिया को लागू किया गया। इसमें यह तय किया गया कि प्रत्येक संस्था को सिर्फ दो छात्र दिये जायेंगे,जबकि पहले यह नियम मूल स्कीम में नहीं था ।  शुरू के 2-3 साल तो यह योजना ठीक ठाक चली लेकिन केंद्र में मोदी सरकार के आनें के बाद इसमें ऐसे ऐसे नियम क़ानून बनाये गए की जम्मू कश्मीर के युवा देश के अन्य हिस्सों में पढ़ने के लिए ना जाने पायें । इस योजना के तहत पाँच सालों में जम्मू कश्मीर के 25000 युवाओं को देश के दुसरे हिस्से में पढ़ने के लिए भेजना था और इसके लिए उन्हें स्कालरशिप देनी थी लेकिन 2011 से लेकर 2016 तक 14882 सीटें खाली रह गयी ।  खासकर मोदी सरकार के आने के बाद 2014-15 में 3686 सीटें खाली रह गई और 2015-16  में सरकार द्वारा सिर्फ 406 सीटों पर स्कॉलरशिप दी गई जबकि बाकी 4594 सीटें खाली रह गईं।  कुछ युवाओं ने एआईसीटीई में पंजीकरण कराकर अपने स्तर पर कॉलेज ढूंढे और उनमें अध्ययन कर रहे हैं। जिन्हें सरकार अब स्कॉलरशिप नहीं दे रही है। साल 2014-15 के लगभग पचास प्रतिशत छात्रों को और 2013-14 के लगभग 25 प्रतिशत छात्रों को अभी तक सरकार ने स्कॉलरशिप नहीं दी है। इन युवाओं की कोई गलती न होते हुए भी वे दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। शिक्षण संस्थान, जहां वे पढ़ रहे हैं उनसे पैसा मांग रहे हैं। वे गरीब हैं पैसा दे नहीं सकते। लेकिन अब वे कहाँ जाएँ ?ये एक बड़ा सवाल है और जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है ।

इस योजना की सबसे अच्छी बात यह थी की जम्मू कश्मीर के युवा आतंकवाद को अपने जेहन से निकालकर शिक्षा के लिए देश के कई हिस्सों में जा रहे थे । भारत के अन्य हिस्सों में आकर हिन्दुस्तान के बारे में इनकी अच्छी समझ पैदा हो रही थी क्योकि शिक्षा ही सकारात्मक सोच का जरिया है और ऐसे प्रयासों से ही कश्मीर के युवाओं का अलगाव खत्म होगा  ।लेकिन इस योजना को लेकर जिस तरह केंद्र सरकार असंवेदनशील रवैया अपनाये हुए है वो अपने आप में यह सवाल खड़े करता है की क्या वाकई केंद्र सरकार कश्मीर में शांति चाहती है क्योंकि सीधी सी बात है कश्मीर का युवा अगर शिक्षा के माध्यम से देश से नहीं जुड़ेगा तो वह अलगाववाद का शिकार होकर आतंकवाद के रास्ते पर भी जा सकता है ।

दो साल पहले संसद में तत्कालीन पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू –कश्मीर के बच्चों की विशेष स्कॉलरशिप योजना पर उदासीनता बरतने के लिए केंद्र सरकार की खिचाई करते हुए इससे सम्बंधित सवाल उठाया था ।  महबूबा मुफ्ती के अलावा जम्मू –कश्मीर के सांसदों ने भी इस मुद्दे को सदन में कई बार उठाया लेकिन केंद्र सरकार ने शिक्षा से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है न कोई संजीदगी दिखाई है ।  जबकि केंद्र और राज्य दोनों जगह ही एनडीए की सरकार है ।

यूपीए सरकार ने पाँच साल के लिए यह विशेष योजना बनाई थी जिससे कश्मीरी बच्चे देश की मुख्य धारा से जुड़ सकें लेकिन अब एनडीए सरकार इस योजना को उसके मूल स्वरुप में जारी नहीं रखना चाहती । सच्चाई तो यह है एनडीए की सरकार बनते ही इतनी अच्छी योजना पर ग्रहण लगना शुरू हो गया था । ऐसा लग रहा है कि कश्मीर के बच्चे सिर्फ मुस्लिम होनें का खामियाजा भुगत रहें है । हम सब को यह बात ठीक से समझनी होगी कि कश्मीर समस्या का सही हल शिक्षा के रास्ते से होकर ही निकलेगा ,इसके बिना और दूसरा कोई रास्ता नहीं है । कश्मीरी बच्चों की समस्याओं का निराकरण करते हुए सरकार को पिछले कुछ सालों से लंबित उनकी छात्रवृति तत्काल देनी चाहिए और प्रधानमंत्री विशेष स्कॉलरशिप योजना को उसके मूल स्वरुप में लागू करनी चाहिए जिससे कश्मीर का युवा देश की मुख्य धारा से जुड़ सके ।

(लेखक शशांक द्विवेदी, राजस्थान में मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डिप्टी डायरेक्टर हैं और  टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं। 12 सालों से विज्ञान विषय पर लिखते हुए विज्ञान और तकनीक पर केन्द्रित विज्ञानपीडिया डॉट कॉम के संचालक है  । वे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लगातार लिख रहे हैं । )

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