मरते किसान और जलता मध्यप्रदेश – योगेन्द्र सिंह परिहार

3:46 pm or June 10, 2017
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मरते किसान और जलता मध्यप्रदेश

—— योगेन्द्र सिंह परिहार —–

भाजपा को जब जब जनता ने खुलकर वोट दिया, उसने जनता को खुलकर चोट दी। ऐसे जख्म दिए जिन्हें वर्षो तक आम आदमी भर नही पायेगा। पहले पंजाब जैसे खुशहाल प्रदेश को ड्रग्स के हवाले कर दिया, पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में आम आदमी का जीना दूभर हो गया था । उसके बाद ही जनता ने भाजपा को ऐसा सबक सिखाया कि अब न भाजपा पंजाब की सीटों की बात करती है और न ही उनका गोदी मीडिया।

मध्यप्रदेश के अन्नदाता अपने अथक परिश्रम से प्राकृतिक प्रकोपों को झेलते हुए, जैसे तैसे अपने जीवन स्तर में बदलाव लाने के प्रयास कर रहे हैं और सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान, किसानों के बनते-बिगड़ते हालात को नज़र अंदाज़ करते हुए सिर्फ आंकड़ों की बाज़ीगरी से कृषि कर्मण अवार्ड बंटोरने को प्रचारित करने में लगे रहते हैं। लेकिन शिवराज यह भूल जाते है कि जिनके नाम की राजनैतिक रोटी सेंककर वे प्रदेश और देश में सीना फुलाए घूम रहे हैं, उस अन्नदाता की हालत समूचे प्रदेश में वास्तविक रूप में बद से बदतर होती जा रही है।

उद्योगपतियों के लाखों करोड़ के कर्ज माफ करने वाली भाजपा सरकार अन्नदाता के न कर्जे माफ़ कर रही है, न उन्हें उचित मुआवजा दे रही है। उल्टा किसानों के घरों से जब्ती कुर्की जैसे काम इस प्रदेश में हो रहे है। अब जब किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे है, तो उन्हें असामाजिक तत्व बता, उनके सीने में सीधे गोली दागी जा रही है।

केंद्र सरकार के मुखिया मोदी इतना सब होते हुए भी धृतराष्ट्र बने हुए है, उन्हें कौरव सेना ( भाजपा ) के अत्याचार और दमनकारी नीतिया दिखाई ही नही दे रही है। यह सब कुछ आम आदमी खामोशी से देख रहा है।

वैसे मध्यप्रदेश सरकार का रवैया बिलकुल अंग्रेजी हुकूमत जैसा ही रहा है ( रहे भी क्यों न क्योंकि अंग्रेजी हुकुमत के पुराने मददगार जो ठहरे ), पहले उन्होंने किसान संगठनों में फूट डालने की नीति पर काम किया और जब काम उसके बाद भी नही बना तो जनरल डायर से प्रभावित होकर किसान भाइयों पर गोलिया चलवा दी।

कल ही हमने मन्दसौर के एक किसान पुत्र की वेदना सुनी थी कि यदि मुख्यमंत्री जी हमारे किसान भाइयों की मौत का मुआवजा 1 करोड़ रुपए दे रहे हैं तो हम उनके परिवार को 1 करोड़ रूपए देते हैं, क्या वो सीने में गोली खाने को तैयार हो जाएंगे? बात बिल्कुल सही है और प्रदेश के हर नागरिक को समझना होगा कि किसानों की नाराज़गी बेवजह नहीं है, हमारे साथ ये घटना हुई होती तो शायद हम भी उतने ही उद्वेलित होते जितने आज हमारे किसान भाई हैं । आप विचार कीजिए कि एकात्म मानव वाद को समूचे देश में प्रचारित करने वाली भाजपा के ही नेता शिवराज सिंह चौहान अनेकात्म वाद के रास्ते पर चल पड़े हैं मन्दसौर में पुलिस द्वारा मारे गए किसानों को एक करोड़ रुपयों का मुआवजा और बालाघाट में विस्फोट की वजह से मृतक लोगों को सिर्फ 2 लाख रुपए । ये कैसा एकात्म वाद है।

आज मध्यप्रदेश में किसानों को इस तरह गोली मारे जाने की वजह से पूरा मध्यप्रदेश धूं-धूं करके जल रहा है और माननीय मुख्यमंत्री जी अपने शासकीय भवन में बैठकर सिर्फ ट्वीट कर रहे हैं। जरा सोचिये, जो व्यक्ति चुनाव प्रचार के लिए गली-गली घूमता है वो अभी तक उनकी ही पुलिस द्वारा मारे गए किसान भाइयों के परिवारों से मिलने नहीं पहुँच पाए, क्या मुख्यमंत्री को अपने ही प्रदेश के नागरिकों से डर लग रहा है? शिवराज जी इस जलते मध्यप्रदेश में घी का काम सिर्फ आपकी सरकार ने नहीं किया बल्कि केंद्र में भाजपा की मौजूदा सरकार की किसान व गरीब विरोधी नीति भी उसके लिए लिए उतनी ही जिम्मेदार है।

हमारे देश में नेताओं की मृत्यु होने पर राष्ट्रीय शोक मनाने की परंपरा है जबकि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में किसानों को इस तरह राज्यों की चुनी सरकार द्वारा मारे जाने पर राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाना चाहिए । ये वाकई में राष्ट्रीय शोक का विषय है क्योंकि इसी तरह से यदि किसान मार दिए जायेंगे तो अनाज कौन बोयेगा और बिना अनाज के कैसे आपके-हमारे बच्चे जीवित रह पाएंगे ।

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