भारी दुर्व्यवस्था के शिकार हैं सरकारी अस्पताल – शैलेन्द्र चौहान

4:26 pm or August 14, 2017
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भारी दुर्व्यवस्था के शिकार हैं सरकारी अस्पताल

—– शैलेन्द्र चौहान —–

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तीन दिन के भीतर कम से कम 35 बच्चों की मौत हो गयी है. मरने वाले बच्चे एनएनयू वार्ड और इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती थे. ध्यातव्य है कि गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी की कर्मभूमि है और दो दिन पहले ही नौ अगस्त की शाम को सीएम योगी आदित्यनाथ मेडिकल कॉलेज का हाल देखकर गये थे. मारे गये बच्चों के माता पिता का कहना है कि बच्चों के वार्ड में ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी की वजह से ये जानें गयीं. उनका कहना है कि वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई गुरुवार रात को ही खत्म हो गयी थी और परिवारों को सेल्फ-इंफ्लैटिंग बैग दिये गये थे ताकि वे बच्चों को सांस लेने में मदद कर सकें. असल में बुधवार नौ अगस्त को ही लिक्विड ऑक्सीजन का टैंक पूरी तरह से खाली हो गया था. मंगाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गए थे. इसके बाद कालेज में हाहाकार मच गया. बेड पर पड़े मासूम तड़पने लगे. डॉक्टर और तीमारदार एम्बू बैग से ऑक्सीजन देने की कोशिश करने लगे. हालांकि उनकी यह कोशिश नाकाफी साबित हुई. अपने सात महीने के बच्चे को खोने वाले मृत्यंजय सिंह कहते हैं, “यह वह समय है जब सबसे ज्यादा बच्चों की मौत हुई है.” ताज्जुब है कि इतनी बड़े संकट के बावजूद डीएम या कमिश्नर में से कोई भी शुक्रवार ग्यारह तारीख को दिन भर बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा. जबकि मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों का कहना था कि दोनों अधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी गई थी. प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचते तो क्राइसिस मैनेजमेंट आसान हो जाता. वहीँ गोरखपुर जिला प्रशासन की संवेदनहीनता इस बात से साफ जाहिर है. गोरखपुर के जिला मजिस्ट्रेट राजीव रौतेला ने कह रहे हैं कि अस्पताल में अलग अलग बीमारियों से पीड़ित इन बच्चों का इलाज हो रहा था. उन्होंने बच्चों की मौत के लिए प्राकृतिक कारणों को जिम्मेदार बताया. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ऑक्सजीन की सप्लाई में कमी की वजह से बच्चों की जानें गयीं. अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही कमीशनखोरी मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य की पत्नी के दखल आदि तमाम आरोपों के बीच राज्य सरकार शनिवार सुबह हरकत में आई और मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन को अपने आवास पर बुलाकर उन्हें तत्काल गोरखपुर जाने का आदेश दिया. दोनों मंत्रियों ने शाम को वहां से आकर अपनी रिपोर्ट दी. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल सिद्धार्थनाथ सिंह और आशुतोष टंडन के साथ संयुक्तरूप से प्रेस कांफ्रेस की. योगी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई. यह जिला मजिस्ट्रेट राजीव रौतेला की बात को दोहराना भर था. अपनी लापरवाही से पल्ला झाड़ लेना और पूरे मामले की लीपा पोती करना हमारी सरकारों का पुराना शगल रहा है. अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिये हैं. राज्य के सर्वोच्च स्वास्थ्य अधिकारी प्रशांत त्रिपाठी ने माना है कि ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली पाइपलाइन में कुछ समस्या थी. उनके मुताबिक, “लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडरों की मदद से काम चल रहा था. अस्पताल के गोदाम में पर्याप्त सिलेंडर हैं. इसलिए ये खबरें गलत हैं कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है.” वहीं माता पिता का कहना है कि अस्पताल को ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने धमकी दी हुई थी कि अगर सरकार ने उसका बकाया पैसा नहीं चुकाया तो वह ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देगी. रौतेला का कहना है कि अस्पताल पर कंपनी के 69 लाख रुपये बकाया है, लेकिन उनके मुताबिक अस्पताल में ऑक्सीजन के पर्याप्त सिलेंडर हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर के अस्पताल में शुक्रवार को बच्चों की मौत की ख़बरें आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने ऑक्सीजन फ़र्म की बकाया राशि में से बीस लाख रुपए का भुगतान कर दिया था. पुष्पा सेल्स के मुताबिक अब उसका अस्पताल प्रबंधन पर क़रीब चालीस लाख रुपए बकाया है. रिपोर्ट के मुताबिक फर्म ने बीते सात महीनों में सात बार अस्पताल प्रबंधन को बकाया राशि न मिलने की स्थिति में गैस सप्लाई रोक देने की चेतावनी दी थी. अख़बार के मुताबिक अस्पताल में सात अगस्त के बाद से अब तक साठ बच्चों की मौत हो चुकी है. फर्म का कहना है कि 31 जुलाई को अस्पताल को क़ानूनी नोटिस भी भेजा गया था. गोरखपुर अस्पताल में मौतों से जुड़ी एक रिपोर्ट में हिंदी अख़बार ने दावा किया है कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य अपनी पत्नी के ज़रिए ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी से रिश्वत मांग रहे थे. अपनी रिपोर्ट में अख़बार ने कहा है कि डॉ. राजीव मिश्रा ने कमीशन के चक्कर में फर्म की बकाया राशि रोकी गई थी. उत्तर प्रदेश सरकार ने राजीव मिश्रा को निलंबित कर दिया है जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. इस अस्पताल में भर्ती कुछ बच्चे दिमागी बुखार से भी पीड़ित थे. जून से सितंबर तक बरसात के मौसम में इस बीमारी के मामले अकसर इस इलाके में देखने को मिलते हैं. इस अस्पताल में दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चे बड़ी संख्या में भर्ती होते हैं. अस्पताल के प्रवक्ता सतीश चंद्रा कहते हैं कि पिछले दो महीनों में अस्पताल में दिमागी बुखार से पीड़ित 370 बच्चों का इलाज किया गया है जिनमें से 129 की मौत हो गयी. प्रश्न यह है कि आखिर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है ? असल बात यह है कि उत्तर प्रदेश में अस्पताल भारी दुर्व्यवस्था के शिकार हैं. कहीं दवाओं का रोना है तो कभी डीजल के अभाव में अस्पतालों में लगे जनरेटर ठप पड़े हुए है. पिछले सप्ताह मरीजों को लाने के लिए संचालित एंबुलेंसों के पहिए भी ठप पड़ गए थे. प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल लगातार अस्पतालों के दौरे करते रहते हैं मगर अस्पताल हैं कि सुधरने का नाम ही नहीं लेते.

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