बलिदानी इतिहास की स्याही से नए भारत की इबारत लिखते राहुल गाँधी – योगेन्द्र सिंह परिहार

7:00 pm or December 5, 2017
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बलिदानी इतिहास की स्याही से नए भारत की इबारत लिखते राहुल गाँधी

—- योगेन्द्र सिंह परिहार —–

इंदिरा जब छोटी थीं तो उनके पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू अक्सर जेल में रहते थे, किसी अपराध की सजा के लिए नही बल्कि अपने देश की आज़ादी की लड़ाई में भाग लेने की वजह से अंग्रेज उन्हें जेल में डाल देते थे। नेहरू, अपनी बेटी इंदिरा से संवाद करने के लिए, जेल से पत्र लिखते थे, उन्हें पढ़ाने के उद्देश्य से तरह-तरह की ड्राइंग बना कर भेजते थे। नेहरू जी ने जो भी किताबें लिखी, उनमे से ज्यादातर जेल में रहते हुए ही लिखीं। पंडित जवाहर लाल नेहरू के पिता मोती लाल नेहरू उस ज़माने के जाने-माने बैरिस्टर थे। मोती लाल नेहरू, स्वतंत्रता की लड़ाई में जन्मी कांग्रेस के 2 बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। आज के ज़माने में जहां कोई व्यक्ति अपनी एक इंच ज़मीन नही देता, वहीं, मोती लाल नेहरू ने अपना मकान, स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने के लिए कांग्रेस को समर्पित कर दिया था।

स्वतंत्रता आंदोलन को सत्य और अहिंसा की दम पर चलाने वाले मोहनदास करमचंद गांधी 1924 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। देश को स्वतंत्रता के मुहाने पर खड़ा करने में अपनी महती भूमिका निभाने वाले महात्मा गांधी, अतिवादी व साम्प्रदायिक विचारधारा की गोली का निशाना बने और देश के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। ऐसे दानी, बलिदानी और देश को सर्वस्व समर्पित कर देने वाले नामों की श्रृंखला में एक और नाम आता है, पंडित जवाहर लाल नेहरू। उन्होंने महात्मा गांधी की अगुआई में देश की आज़ादी की लड़ाई में महती भूमिका निभाई। पंडित नेहरू अलग-अलग समय मे कई बार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। पंडित जवाहर लाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। पंडित नेहरू ने आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसी विश्व स्तरीय संस्थाओं की स्थापना की जो शिक्षा के क्षेत्र में आज भी अग्रणी हैं। देश के बुनियादी ढांचे के विकास में नेहरू जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बचपन में ही अपने परिवार के सदस्यों को स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ते देखकर और फिर उस लड़ाई में शामिल होने वाली इंदिरा गांधी, 3 बार कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। शरुआत में इंदिरा को मोम की गूंगी गुड़िया बोला गया और बाद में जैसे जैसे समय बीतता गया, इंदिरा गांधी के राजा-महाराजाओं के प्रिवीपर्स समाप्त करने, बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने, पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश बनाने व पोखरण में परमाणु परीक्षण करने जैसे प्रभाव शाली कदमों के बाद जहां पूरे विश्व ने इंदिरा गांधी का लोहा माना वहीं विपक्ष ने उन्हें “दुर्गा” के नाम से संबोधित किया। 1984 में इंदिरा जी की सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने उनकी गोलियों से भूनकर नृशंस हत्या कर दी।

इंदिरा जी के देहावसान से समूचे देश मे अफरातफरी का माहौल बन गया और ऐसी विषम परिस्थिति में राजीव गांधी ने मोर्चा संभाला और वे देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने। 1985 में राजीव गांधी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। राजीव गांधी 21वीं सदी के भारत को सुदृढ़ और मजबूत देखना चाहते थे, उन्होंने कंप्यूटर व सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जबरदस्त काम किया। 1991 में लिट्टे ने राजीव गांधी की हत्या करवा दी, यहां तक कि उनके शरीर के टुकड़े तक नही मिले। अपने पति की मौत के सदमे से लगभग टूट चुकी सोनिया गांधी, कांग्रेस परिवार को बिखरने से बचाने के लिए राजीव गांधी की मौत के 7 साल बाद 1998 में कांग्रेस की 86वीं राष्ट्रीय अध्यक्षा बनीं।

कई सदियों तक देश सेवा में समर्पित त्यागी-बलिदानी गांधी-नेहरू परिवार में जन्मे राहुल गांधी, जिन्होंने अपनी दादी व पिता की मृत्यु के दंश को न सिर्फ झेला बल्कि राजीव जी के स्वर्ग सिधारने के बाद परिवार में आये खालीपन को हरपल महसूस किया। राहुल गांधी को ताकत तब मिली, जब उन्होंने अपनी मां सोनिया गांधी को मजबूती के साथ हर मोर्चे पर खड़ा देखा, चाहे माँ के रूप में परिवार व बच्चों की परवरिश का मामला हो या अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस पार्टी को स्थायित्त्व और विस्तार देने की बात हो। राहुल गांधी, चाहते तो कभी भी कांग्रेस के अध्यक्ष बन सकते थे लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय महामंत्री और कांग्रेस की छात्र व युवा विंग के चेयरमैन के रूप में काम कर संगठन की बारीकियों को समझा।

राजीव गांधी, जिस युवा और प्रगतिशील भारत की कल्पना करते थे, उन्हीं सपनों को साकार करने के लिए राहुल गांधी दिन-रात एक कर रहे हैं। राहुल गांधी का ऐसा सोचना है कि देश मे सरकार बनाने से ज्यादा चुनौती पूर्ण काम देश की अस्मिता और अखंडता को बचाये और बनाये रखना है।

राहुल गांधी साधारण सी छवि के दिखने वाले असाधारण व्यक्ति हैं। समान्य कुर्ता और जींस उनका पसंदीदा पहनावा है, वे मंझे हुए राजनेता की तरह दिखाई नही पड़ते। उनमें एक आम हिंदुस्तानी की झलक दिखाई पड़ती है। राहुल गांधी, आम आदमी के दर्द को समझते हैं,   उनके सुख-दुःख में शामिल होते हैं। राहुल गांधी हवा-हवाई बातें नही करते, झूठ नही बोलते, वे चाहते हैं कि उनका देश के आम जनों के साथ संबंध सच की बुनियाद पर खड़ा हो न कि झूठे सपने दिखाने वाले वायदों के साथ। यही फर्क है एक खानदानी जनसेवक एवं झूठे और खोखले जुमलों के आधार पर जन्में व पनपे राजनेताओं के बीच में।

राहुल गांधी की कुछ बातें ऐसी हैं जो अनायास ही आपके दिल को भी छू जाएंगी। राजीव गांधी की हत्या में शामिल जिन आरोपियों को फांसी की सज़ा सुनाई जानी थी तब राहुल और प्रियंका ने इसका विरोध किया और इसके पीछे तर्क दिया कि हमने अपनी दादी और पिता की मौत को करीब से देखा है और हमे तकलीफ भी हुई लेकिन हम ये मानते हैं कि नफरत को नफरत से नही मिटाया जा सकता और यहां तक कि राहुल और प्रियंका दोनों ही अपने पिता के हत्यारों से मिलने भी गए। ये परिवार के संस्कार हैं जो अपने पिता के हत्यारों को भी माफ करना चाहते थे, ये ही हैं अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के सच्चे वारिस।

एक और वाक्या, जिसमें देश ने राहुल गांधी के उदार व्यक्तित्व को समीप से देखा वो है निर्भया कांड के बाद निर्भया के भाई बनकर उसके परिवार की मदद करना। निर्भया कांड को लेकर बीजेपी ने जितना हंगामा मचाया, शायद ही पहले कभी ऐसे किसी मामलों में किसी भी पार्टी ने विरोध-प्रदर्शन किया होगा। बीजेपी, निर्भया मामले में कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने में कामयाब हो गई और समूचे देश ने इस कांड का दोषी कांग्रेस को ही मान लिया और कहीं न कहीं चुनावों में बीजेपी ने इस मुद्दे को भुना कर कामयाबी हासिल कर ली लेकिन इतने बड़े हंगामे के बाद बीजेपी के किसी नेता ने निर्भया के परिवार की सुध नही ली और इस परिवार के सदस्यों को ढाढस बंधाने के लिए समूचे देश मे सिर्फ राहुल गांधी सामने आए जिन्होंने निर्भया के दो भाइयों की पढ़ाई का बीड़ा उठाया और उसमें निर्भया का एक भाई पायलट बना व दूसरा इंजीनियर। निर्भया के दोनों भाइयों की पढ़ाई का खर्चा राहुल गांधी ने उठाया और ये बात उन्होंने शोर करके नही बताई, ये बात निर्भया की मां ने स्वयं मीडिया से साझा की।  सोचिए जब भाजपा, इस मामले में पूरे देश को उकसाने में लगी थी तब राहुल गांधी निर्भया के परिवार के बारे में सोच रहे थे। सचमुच सदाशयता और संवेदनशीलता की मिसाल हैं राहुल गांधी।

गांधी-नेहरू परिवार के अलावा दादा भाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले, मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपतराय, अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सुभाष चंद्र बोस व बाबू जगजीवन राम जैसे महान नेताओं ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया। राहुल गांधी, अब दिसंबर 2017 के पहले सप्ताह में ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष का यह पद वर्तमान परिदृश्य में बेहद चुनौती पूर्ण है क्योंकि इस समय समूचा देश कांग्रेस की ओर आशा की नज़रों से देख रहा है। किंतु पूरे देश को ये विश्वास है कि वे निश्चित ही अपने त्यागी व बलिदानी परिवार की परंपराओं को आगे बढ़ाने व देश सेवा के लिए अपने आप को सदैव तत्पर रखने में कामयाबी हासिल कर लेंगे और बलिदानी इतिहास की स्याही से नए भारत की इबारत निश्चित ही लिखेंगे।

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