यह मुलाकात के साथ क्रूर मजाक है – अवधेश कुमार

6:53 pm or January 2, 2018
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यह मुलाकात के साथ क्रूर मजाक है

—- अवधेश कुमार —-

कुलभूषण जाधव के बारे में अब हर भारतीय को पता है। इसलिए अलग से उनके बारे में कुछ बताने की आवश्यकता नहीं। पाकिस्तान ने जिस तरह जाधव की उनकी मां एवं पत्नी से मुलाकात कराई उससे उसका पाखंडी और क्रूर चेहरा एक बार फिर उजागर हुआ है। हालांकि पाकिस्तान की रणनीति इसके पीछे यही थी कि दुनिया में संदेश दे सके कि वह मानवीयता के आधार पर काम करता है। पाकिस्तान विदेश विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल की ओर से कहा भी गया कि 25 दिसंबर को उनकी मुलाकात का दिन इसलिए चुना गया, क्योंकि यह मोहम्मद अली जिन्ना का जन्म दिन है। पाकिस्तान के एक वर्ग के लिए भले यह मानवीय आधार पर उठाया गया कदम हो, पर हमारे लिए और दुनिया के लिए तो पाकिस्तान ने अपनी असलियत फिर दिखा दिया है। आखिर यह कौन सी मुलाकात हुई जिसके बीच कांच की दीवार खड़ी कर दी गई हो? आखिर ऐसी मुलाकात का क्या अर्थ जिसमें माइक और स्पीकार का प्रयोग हो रहा हो? वहां न केवल कैमरे लगे थे, बल्कि पाकिस्तान के अधिकारी भी उपस्थित थे। यही नहीं भारत की शर्त के अनुसार एक भारतीय राजनयिक को वहां रहने की अनुमति तो दी गई, लेकिन उनके सामने भी शीेशे की दीवार लगा दी गई ताकि वो कोई बातचीत सुन न सके। तो यह है पाकिस्तान का मानवीय चेहरा! अगर यह मानवीय चेहरा है तो अमानवीय चेहरा किसे कहेंगे?

इस सवाल का जवाब पाकिस्तान नहीं दे सकता। इसका जवाब तो हमारे साथ दुनिया को तलाशना होगा। पाकिस्तान विदेश विभाग के प्रवक्ता से जब पत्रकारों ने पूछा कि उनके बीच शीशे की दीवार क्यों लगाई गई तो उनका जवाब था, सुरक्षा के कारण। मजे की बात देखिए कि इसके पीछे भी वो भारत को ही कारण मानते हैं। यानी भारत ने इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। यह सवाल पाकिस्तान से पूछा जाना चाहिए कि एक बेटे को मां और पति को पत्नी से क्या खतरा हो सकता था? या मां और पत्नी को बेटे और पति से क्या खतरा हो सकता था?क्या ये एक दूसरे के दुश्मन थे कि इनके बीच सुरक्षा के लिए कांच की दीवार खड़ी की गई? हालांकि भारत में भी ऐसे लोग हैं जिन्होंने आरंभ इस मुलाकात को पाकिस्तान के रवैये में आया बदलाव मान लिया था। ऐसे लोग तो यहां तक कहने लगे थे कि अब भारत को भी अपने कड़े रवैये में बदलाव लेकर एक कदम आगे बढ़ना चाहिए तथा पाकिस्तान के साथ फिर से बातचीत की शुरुआत करनी चाहिए। कुछ दिनो ंपहले यह खबर उड़ी थी कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने नेताओं से भारत के साथ बातचीत करने को कहा है। ऐसा उन्होंने कहा या नहीं इसका कोई प्रमाण नहीं किंतु यह भारत देश है जहां पता नहीं क्यों कुछ लोगों को पाकिस्तान की क्रूर और आतंकी चेहरा लगातार नहीं दिखता।

वास्तव में इनके आधार पर देश की नीति का फैसला करना कठिन है। साफ है कि पाकिस्तान की रणनीति का इन पर प्रभाव पड़ा है। अमेरिका का दबाव उस पर है और उसने जाधव की परिवार के साथ मुलाकात को मानवीय आधार पर लिया गया फैसला बताकर इतना प्रचारित किया है कि कुछ लोगों का उसके झांसे में आना स्वाभाविक है। कोई भी विवेकशील व्यक्ति इसे मानवीय रवैया नहीं मान सकता। जाधव की मां और पत्नी को मिलने के पहले कपड़े बदलाव गए तथा उनको चूड़ियां,विंदी और आभूषण जिनमें मंगलसूत्र शामिल था तक उतारने को मजबूर किया गया। कपड़े और आभूषण से क्या समस्या हो सकती है यह समझना किसी के लिए भी कठिन है। किसी सुहागन के लिए मंगलसूत्र, बिंदी और चूड़ियों का क्या महत्व है यह बताने की आवश्यकता नहीं। कह रहे हैं कि जूता इसलिए उतरवाया और रखा क्योंकि इसमें जासूसी यंत्र होने का संदेह था। ऐसे रवैये को मानवता की किस परिभाषा के तहत रखा जाए यह फैसला उन लोगांे को करना है जो इस मुलाकात से उत्साहित थे। उन्हें मराठत में बात करने की अनुमति नहीं दी गई। क्यों? ताकि वे ऐसी बातें न कर लें जो उनकी समझ में नहीं आए। पाकिस्तान का रवैया कुलभूषण जाधव के बारे में जो पहले था वही आज भी है। विदेश विभाग के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि मुलाकात का मतलब यह नहीं है कि उसके प्रति हमारी नीति बदल गई है। वह आतंकवादी गतिविधियों और तोड़फोड़ में संलिप्त था तथा एक व्यक्ति की हत्या उसने स्वीकार किया है। यानी पाकिस्तनी सेना के फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने अप्रैल में जाधव को जो फांसी की सजा सुनाई थी उस पर पाकिस्तान कायम है। ध्यान रखने की बात है कि भारत ने इसके खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में अपील किया था जिसने 18 मई 2017 को अंतिम फैसला दिए जाने तक फांसी देने पर रोक लगा रखी है। इस तरह जाधव आज जिन्दा है तो केवल अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के कारण।

कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान का पूरा व्यवहार की झूठ पर टिका है। इस मुलाकात के बाद भी जाधव का एक वीडियो जारी कराया गया जिसमें वे पाकिस्तान को इस मुलाकात के लिए शुक्रिया अदा कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाकात कराने के लिए कहा था और उन्होंने उनकी अपील स्वीकार कर ली। इसमें जाधव मुलाकात वाले कपड़े में नहीं हैं। इसका अर्थ है कि इस वीडियो की रिकॉर्डिंग पहले ही करा ली गई थी। यह न भूलिए कि इसकी शुरुआत में भी जाधव स्वयं को रॉ के लिए पाकिस्तान में काम करने वाला जासूस बता रहे हैं। यहां भी पाकिस्तान की कलई इसलिए खुल गई, क्योंकि इस वीडियो में एक जगह फाइनल टेक लिखा आ रहा है। यानी कई बार टेक लिया गया और इस वक्तव्य को फाइनल माना गया। जिनने वीडियो बनाया उनसे यह भूल हो गई और पाकिस्तान का सच दुनिया के सामने आ गया। इसके पहले भी जाधव से अपराध कबूल करवाने को जो वीडियो सामने आया था उसमंें करीब 105 कट थे। साथ ही अलग-अलग कोणों से उसे सूट किया गया था।

पाकिस्तान जाधव के मामले में लगातार झूठ का सहारा ले रहा है। जब मार्च 2016 में पाकिस्तान की ओर से बयान आया कि उसने कुलभूषण जाधव नाम के एक रॉ के जासूस और आतंकवादी गतिविधियां चलाने वाले शख्स को पकड़ा है तो भारत ने तत्क्षण स्वीकार किया कि हां, वे उनके नागरिक हैं लेकिन वो नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं जो ईरान से व्यापार करते थे। सच यही है कि पाकिस्तान ने ईरान की सीमा यानी चाबाहार के आसपास से उसको पकड़ा और झूठे मामले बनाए। उसकी मानवीयता का आलम तो यह है कि वियना संधि के तहत उससे कॉन्स्यूलर एक्सेस के लिए कहा गया यानी हमारे दूतावास के अधिकारियों को उससे मिलने दीजिए तो उसने इन्कार कर दिया। आज तक उसने दूतावास को वहां तक पहुंचने नहीं दिया है। मजे की बात देखिए कि मां और पत्नी से मुलाकात के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यह कॉन्स्यूलर एक्सेस ही तो है। क्या मजाक है। हालांकि बाद में साफ किया गया कि कॉन्स्यूलर एक्सेस की कोई योजना नहीं है। आखिर क्यों? मुंबई हमले में पकड़े गए आतंकवादी कसाब तक को भारत ने कॉन्स्यूलर एक्सेस का प्रस्ताव दिया था, लेकिन पाकिस्तान ने तो उसे अपना नागरिक मानने से ही इन्कार कर दिया। यह होता है मानवीय व्यवहार। सैन्य न्यायालय में जाधव का मामला चलाना ही पाकिस्तान के रवैये पर गहरा प्रश्न खड़ा करता है। आखिर एक विदेशी व्यक्ति पर किसी देश की सेना का न्यायालय कैसे मुकदमा चला सकता है। फिर एक महीने और कुछ दिनों के अंदर ही जाधव को फांसी की सजा दे दी।

प्रश्न है कि भारत को अब क्या करना चाहिए? कुलभूषण जाधव का मामला देश के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। हमारे एक निर्दोष नागरिक को पाकिस्तान आतंकवादी और जासूस साबित कर फांसी देेने पर तुला है। अभी हम अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में मामला लड़ रहे हैं। परंतु जाधव पाकिस्तान की जेल में सुरक्षित है इसकी कोई गारंटी नहीं। आखिर शरबजीत की त्रासदी हम भूले नहीं हैं। तो भारत को साफ घोषणा करनी होगी कि अगर जाधव के साथ कुछ ऐसा-वैसा हुआ तो पाकिस्तान को उसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। यह केवल कहना नहीं होगा, इसके लिए तैयार भी रहना होगा। जिस तरह से पाकिस्तान ने जाधव की मां और पत्नी से मुलाकात को एक क्रूर मजाक में बदला है उसके बाद उससे किसी तरह की उम्मीद करनी बेमानी होगी।

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