अटूट धार्मिक आस्था व दृढ़ इच्छाशक्ति से दिग्गी राजा ने नर्मदा परिक्रमा के 100 दिन पूरे किए – योगेन्द्र सिंह परिहार

3:54 pm or January 9, 2018
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अटूट धार्मिक आस्था व दृढ़ इच्छाशक्ति से दिग्गी राजा ने नर्मदा परिक्रमा के 100 दिन पूरे किए

—- योगेन्द्र सिंह परिहार —–

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद दिग्विजय सिंह जी, अपनी तटस्थता के लिए विख्यात हैं, जो कह दिया वो पत्थर की लकीर। 2003 विधानसभा चुनावों के दौरान कह दिया कि यदि हम हार गए तो 10 साल किसी भी लाभ के पद पर नही रहेंगे, और जो कहा सो किया। केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही लेकिन कभी किसी ऐसे पद के लिए नही सोचा जिससे उन्हें लाभ पहुंच सकता हो। राजनीति में ऐसे लोग विरले होते हैं जो अपने कहे शब्दों पर अडिग रहें।

दिग्विजय सिंह जी ने नर्मदा जी की प्रेरणा से पैदल नर्मदा परिक्रमा करने का फैसला लिया, चाहते तो कभी भी गाड़ी से परिक्रमा कर सकते थे लेकिन उनके मन मे पैदल परिक्रमा करने के भाव ही थे इसीलिए वे उचित समय का इंतज़ार करते रहे। बीच मे भी उन्होंने कई बार परिक्रमा के रूट पता करे, लेकिन होता वही है जो नर्मदा माई की इच्छा होती है।

ज़िद के पक्के दिग्गी राजा 2017 के सितंबर माह के अंतिम दिन ग्यारस के शुभ मुहूर्त में अपनी भार्या को लेकर निकल पड़े 3300 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर। जिस वक्त उन्होंने यात्रा शुरू की तब जेठ की जला देने वाली धूप होती थी, ऐसे दुरह योग में राघौगढ़ राजघराने के राजा, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एसी वाहनों के आरामदायक सफर को त्यागकर तपतपाती गर्मी में धूल धूसरित गलियों में निकल पड़े एक धार्मिक अनुष्ठान को पूरा करने।

मुझे अभी तक 3-4 बार राजा साहब के प्रतिदिन चल रहे इस यज्ञ में आहुति डालने का अवसर प्राप्त हुआ। मुझे याद है वो दिन जब हम नर्मदा जी के दक्षिण तट पर खंडवा जिले के हरसूद में परिक्रमा में शामिल होने गए थे, धूल हवाओं में घुली अलग ही जान पड़ रही थी और दिग्विजय सिंह जी तीव्र गति से चल रहे थे, परिक्रमा में शामिल होने गए भक्त जन उन्हें लगातार प्रणाम कर रहे थे और वे सभी को नर्मदे हर कहकर अभिवादित कर रहे थे। दिग्विजय सिंह जी की चर्चा एक बात के लिए भी हमेशा होती है वो है उनकी जबरदस्त याददाश्त, वे परिक्रमा में चलते चलते लोगों को देखते जा रहे थे और एक के बाद एक नाम लेकर लोगों को बुलाकर सभी से बात करते हुए पैदल आगे बढ़ते जा रहे थे, उनकी निगाह से कोई भी व्यक्ति नही छूट रहा था। लोग अक्सर कहते हैं फलाने बड़े नेता हैं, लेकिन वे ये देखना और समझना भूल जाते हैं कि ये नेता क्यों बड़े नेता हैं। एक समय में हज़ारों लोगों से मिलना, उनकी बातें सुनना ये सहज प्रक्रिया नही है किसी के भी लिए, तपाना पड़ता है अपने आपको तब जाकर  लाखों लोगों में कोई एक ऐसा जन नायक बन पाता है।

दिग्विजय सिंह जी से यदि कोई चीज सबसे ज्यादा सीखने लायक है तो वो है संबंध निभाना, फिर चाहे जिस परिस्थिति में संबंध बना हो और चाहे वो कोई भी क्यों न हो। परिक्रमा के दौरान उनकी ये बातें रोज़ देखने को मिलती हैं जब वे साथ चल रहे परिक्रमावासियों से प्रतिदिन उनके हाल-चाल जानते हैं, उनके भोजन व शयन की व्यवस्था का जायजा लेते हैं। ये उनकी संवेदनशीलता की पराकाष्ठा है, वे सचमुच राजा कहलाने लायक हैं क्योंकि वो दिल से राजा ही हैं और श्रेष्ठ राजा वही है जो हर परिस्थिति में प्रजा के सुख-दुख में साथ खड़ा रहे।

दिग्विजय सिंह जी की 100 दिनों की इस परिक्रमा में 2 लोगों के साथ की चर्चा न की जाए तो सब कुछ अधूरा रह जायेगा। पहली है उनकी धर्म पत्नि, जो इस कठिन यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। राजा साहब उनका पूरा ख्याल रखते हुए चल रहे हैं, वे यदि पीछे छूट जाती हैं तो वापस आकर उन्हें लेने आते हैं, रोज आप ऐसे दृश्य देख सकते हैं। राजनीतिक जीवन मे निजी संबंधों को निभाने के ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलेंगे। उनका ऐसा व्यवहार ही उनके प्रति आदर को बढ़ा देता है।

इस परिक्रमा यात्रा के दूसरे सहयात्री जो देखने मे बुज़ुर्ग जान पड़ते हैं, वे सिर्फ तेज़ ही नहीं चलते बल्कि आगे चलते हैं, ऐसे ओल्ड यंग रामेश्वर नीखरा जी जिनका बड़ा और सफल राजनीतिक जीवन रहा है, वे दिग्विजय सिंह जी की यात्रा के आकर्षण का केंद्र हैं। लगभग रोज ही कोई न कोई ये ज़रूर पूछता है कि नीखरा जी आज भी पैदल चल रहे हैं क्या? अविश्वसनीय किंतु सत्य, बायपास करा चुके नीखरा जी बराबरी से पैदल परिक्रमा कर रहे हैं। नर्मदा जी उन्हें उम्रदराज़ करें, यही कामना है।

दिग्गी राजा की इस परिक्रमा में जहां एक ओर ऊंचे-नीचे पथरीले रास्ते, ऊबड़ खाबड़ मेड़ जैसी गलियां, कंटीली झाड़ियों के बीच से गुजरना और नदी-नालों को पार करते हुए चलना रोज़ के सफर का हिस्सा हैं तो वहीं राजनैतिक गलियारों में रोज पक्ष-विपक्ष के नेताओं का गणित लगाना कि आखिर राजा के मन में चल क्या रहा है, नर्मदा परिक्रमा की खबरों को रुचिकर बना देता है। असल मे लोग कयास इसीलिए भी लगा रहे हैं कि दिग्विजय सिंह जी जैसे दिग्गज नेता पार्ट टाइम पॉलिटिशियन नही है, वे फुल टाइम 24 घंटे राजनीती में रमे रहने वाले मंझे खिलाड़ी हैं।

कयासों का क्या है, कुछ भी लगाते रहिये लेकिन एक बार परिक्रमा पथ पर जाकर काले पड़ते दिग्विजय सिंह जी के चेहरे को देख आइए, पहले गर्मी और अब कड़ाके की ठंड से चेहरे की चमक कम हो गयी है, हालांकि उस चेहरे में आपको इस कठिन तपस्या के बाद भी मन्द मुस्कान, धीरता और गंभीरता अलग नज़र आ जायेगी। दिग्गी राजा द्वारा की जा रही पूण्य सलिला नर्मदा जी की परिक्रमा के 100 दिन सफलता पूर्वक पूर्ण हुए हैं उसका सिर्फ एक ही कारण है धर्म के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा और दृढ़ इच्छा शक्ति और नर्मदा जी की असीम कृपा।

नर्मदा जी के साथ-साथ भगवान भोले नाथ की भी कृपा उनपर बरस रही है, लगभग 1-2 दिनों में ऐसा अवसर आ जाता है जब सिंह दंपत्ति को नर्मदा जी के तट पर विराजित भोलेनाथ का पूजन और अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। हम बाबा भोलेनाथ से प्रार्थना करते हैं कि वे दिग्विजय सिंह जी व समस्त परिक्रमावासियों को स्वस्थ रखकर परिक्रमा पूर्ण करने की शक्ति प्रदान करेंगे।

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