युवाओं की उम्मीद को नई उड़ान चाहिए – प्रभुनाथ

4:31 pm or January 11, 2018
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युवाओं की उम्मीद को नई उड़ान चाहिए

—- प्रभुनाथ —-

युवा किसी भी राष्ट्र की असीम पूँजी होते हैं । आर्थिक,  समाजिक और राजनीति में उनकी अहम भूमिका होती है । युवाओं में धारा और व्यवस्था बदलने की पूरी ताकत होती है । फ़िर जब भारत की अधिकांश आबादी का हिस्सा युवा हो , तो उसे दुनिया की तागत बनने से कौन रोक सकता है । अर्थशास्त्री अनीस चक्रवर्ती के विचार में आने वाले दशक में एशिया के कार्यबल में आधे से भी ज्यादा वृद्धि भारत में होगी।  भारत एक आर्थिक सुपरपॉवर के रूप में उभर रहा है। एशिया के संभावित कार्यबल के आधे से ज्यादा हिस्से की आपूर्ति यह करेगा। भारत में हर साल 1.2 करोड़ कामकाजी आबादी जनसंख्या में शामिल होती है। जापान और चीन के बाद भारत एशिया में विकास की लहर को आगे ले जाएगा।  भारत का संभावित कार्यबल अगले 12 सालों में वर्तमान के 88.5 करोड़ से बढ़कर 1.08 अरब हो जाएगा। फ़िर देश की प्रगति को कौन प्रभावित कर सकता है । 12 जनवरी – इसे स्वामी विवेकानंद जी के  जन्म दिवस के रुप में मनाया जाता है । दुनिया में इस दिन को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में भी मनाते हैं। संयुक्तराष्ट्र संघ  ने 1984 में इसे अन्तरराष्ट्रीय युवा वर्ष घोषित किया।  जबकि भारत सरकार ने स्वामी विवेकानन्द के जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया।

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में युवा शक्ति  का अपना खास योगदान होता है। युवाओं के मामले में भारत दुनिया का सबसे समृद्ध देश है।  मतलब दुनिया में दूसरे किसी भी देश से ज्यादा युवा भारत में हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कई हिस्सों में भारी तेजी आने की संभावना है।  भारत की औसत आयु 27.3 वर्ष है, जबकि चीन की 35 वर्ष और जापान की 47 वर्ष है। भारत में हर साल 1.2 करोड़ कामकाजी आबादी जनसंख्या में शामिल होती है। जापान और चीन के बाद भारत एशिया में विकास की दर को आगे बढ़ाएगा ।

संयुक्तराष्ट्र की  एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल जनसंख्या के मामले में भारत चीन से पीछे हैं, लेकिन 10 से 24 साल की उम्र के 35.6 करोड़ लोगों के साथ भारत सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश  हैं । जबकि चीन 26.9 करोड़ की युवा आबादी के साथ दूसरे स्थान पर है।  इस मामले में भारत व चीन के बाद इंडोनेशिया 6.7 करोड़ , अमेरिका 6.5 करोड़, पाकिस्तान 5.9 करोड़,  नाइजीरिया 5.7 करोड़,  ब्राजील 5.1 करोड़ व बांग्लादेश 4.8 करोड़ का स्थान आता है। इस स्थिति में भारत अपनी बड़ी युवा आबादी के साथ विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था में नयी उंचाई पर जा सकता हैं।  लेकिन यह तभी सम्भव होगा जब युवाओं के लिए शिक्षा व स्वास्थ्य में भारी निवेश किया जाएगा । इसके अलावा युवाओं के अधिकारों के संरक्षण का भी सवाल है ।  युवा आबादी में 60 करोड़ किशोरियां हैं जिनकी अपनी विशेष जरूरतें और चुनौतियां हैं । भारत की 28 फीसद आबादी की उम्र 10 से 24 साल है।

भारत सरकार की यूथ इन इंडिया 2017 रिपोर्ट के मुताबिक देश में साल 1971 से 2011 के बीच युवाओं की आबादी 16.8 करोड़ से बढ़कर 42.2 करोड़ हो गई है। यानी कुल आबादी का 34.8 फीसदी 15 से 34 साल तक की उम्र के लोगों को युवा माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में शुमार चीन को भी भारत पीछे कर देगा। चीन में जहां युवाओं की संख्या कुल आबादी की 22.31 फीसदी होगी। जबकि जापान में यह  20.10 फीसदी तक सीमित होगी और  आंकड़ा भारत में 32.26 फीसदी होगा। इस दशा में भारत के पास सुनहरा मौका है वह खुद को बड़ी अर्थव्यवस्था में तब्दील कर सकता है। युवा आबादी से अधिकतम लाभ लेने के लिए देश की सरकार को विशेष नीति बनानी होगी। यह सुनिश्चित करना  होगा कि उन्हें रोजगार व आमदनी के अवसर मिलें। उचित नीतियों व मानव श्रम में निवेश से भारत  अपनी युवा आबादी को आर्थिक और सामाजिक विकास में को आगे बढ़ाने के लिए सशक्त वना सकता है । प्रति व्यक्ति आय बढ़ा सकते हैं ।

संयुक्तराष्ट्र श्रम संगठन के अनुसार वर्ष 2017 और 2018 के बीच भारत में बेरोजगारी में मामूली इजाफा हो सकता है और रोजगार सृजन में बाधा पहुँच सकती है। रोजगार जरूरतों के कारण आर्थिक विकास पिछड़ता प्रतीत हो रहा है। 2017 के दौरान बेरोजगारी बढ़ने तथा सामाजिक असामनता की स्थिति के और बिगड़ने की आशंका जताई गई है। उधर देश की अर्थव्यवस्था का हाल कुछ अधिक अच्छा नहीँ है । विकास दर स्थिर रहने की उम्मीद है । दूसरी बात यह आशंका है कि  पिछले साल के 1.77 करोड़ बेरोजगारों की तुलना में 2017 में भारत में बेरोजगारों की संख्या 1.78 करोड़ और उसके अगले साल 1.8 करोड़ हो सकती है। प्रतिशत के संदर्भ में 2017-18 में बेरोजगारी दर 3.4 प्रतिशत बनी रहेगी। जबकि वर्ष 2016 में रोजगार सृजन के संदर्भ में भारत का प्रदर्शन थोड़ा अच्छा था। रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि 2016 में भारत की 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर ने पिछले साल दक्षिण एशिया के लिए 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने में मदद की है। ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में दुनिया सिमट गई है। एक्सपीरियंस को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं जिससे भारत समेत पूरे एशिया में कारोबार बढ़ रहा है । युवाओं में कामकाज की नई उम्मीदें जग रही हैं । क्योंकि दुनिया एक हाथ में सिमट गई है कम्यूनिकेशन के साथ इंटरनेट ने लोगों और दुनिया को और करीब ला दिया है । दुनिया भर में आईटी, पर्यटन और बैंकिंग में तेजी से विकास हो रहा है । युवाओं में नौकरी से इतर घूमना ज्यादा पसंद हैं।  देश-विदेश का हर कोना घूमना चाहती हैं और ट्रैवल ब्लॉगर बनना चाहती हैं।  वहीं इंजीनियरिंग ग्रेजुएट भी ट्रैवल को अपने पैशन से प्रोफेशन बना लिया है। एशिया में कारोबार लगातार बढ़ने की संभावना है।  अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है, क्योंकि भारत समेत एशिया के कई देशों की आबादी का बड़ा हिस्सा अभी विकास और तमाम सुविधाओं से दुर है । इस स्थिति में यह उम्मीद बदलनी चाहिए। सरकार को अपनी अर्थनीति को युवाओं के काबिल बनाना चाहिए। सरकारों को अपनी नीतियों में परिवर्तन लाना चाहिए। युवाओं का पलायन रोकना चाहिए। आज़ हमारी कार्यशील युवा विदेशों की तरफ़ पलायन कर रहे हैं । देश में उन्हें रोजगार नहीँ मिल रहा। अमेरिका की सिलिकान्स वैली में सबसे अधिक भरतीय युवा हैं । युवाओं के लिए उम्मीदों को नई उड़ान और खुला आसामन उपलब्ध कराना हमारा नैतिक दायित्व है । देश में जाति , धर्म , भाषावाद से अलग युवाओं के मुताबिक नीतियां बनानी होगी, जिससे उनकी शक्ति का उपयोग कर राष्ट्र को उन्नतिशील बनाया जाए। विकास पर राजनीति बंद होनी चाहिए । प्रतिभाओं का सम्मान होना चाहिए। बढ़ाती बेगारी की वजह से युवाओं के मन में बढ़ती कुण्ठा हमें रोकनी होगी।

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