पोखरण के महानायक रहे अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीती के एक युग का अंत…. डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

7:37 pm or August 16, 2018
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पोखरण के महानायक रहे अटल बिहारी वाजपेयी

भारतीय राजनीती के एक युग का अंत….

  • डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल′

जो जिया हो भारत भारती के लिए, जिसने ताउम्र केवल राष्ट्र जिया, कविता के शब्दों से संसद के गर्भगृह को सुशोभित किया हो, पोखरण परमाणु परिक्षण से विश्व को भारत की शक्ति का आभास कराया, कारगिल युद्ध से पाकिस्तान को औकात दिखाई हो, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना से राष्ट्र को जोड़ा हो, कावेरी जल विवाद को सुलझाने वाले, केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग का गठन करने वाले दूसरे कोई नहीं बल्कि पंडित अटल बिहारी वाजपेयी ही है। 

शिन्दे की छावनी में २५ दिसम्बर १९२४ को ब्रह्ममुहूर्त में कृष्ण बिहारी वाजपेयी की सहधर्मिणी कृष्णा वाजपेयी की कोख से जन्मे भारत के रत्न पंडित अटल बिहारी जी एक ऐसी शख्सियत रहे जिनका लोहा स्वयं के दल के अतिरिक्त विपक्षी भी मानते रहे । आपके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर में अध्यापन कार्य तो करते ही थे इसके अतिरिक्त वे हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे। पुत्र में काव्य के गुण वंशानुगत परिपाटी से प्राप्त हुए। महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित अमर कृति “विजय पताका” पढकर अटल जी के जीवन की दिशा ही बदल गयी। अटल जी की बी.ए. की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। कानपुर के डी.ए.वी. कालेज से राजनीति शास्त्र में एम.ए. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ-साथ कानपुर में ही एल.एल.बी. की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये। डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ तो पढ़ा ही, साथ-साथ पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन का कार्य भी कुशलता पूर्वक करते रहे।

अटल जी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री हैं। वे पहले १६ मई से १ जून १९९६ तथा फिर १९ मार्च १९९८ से २२ मई २००४ तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे हिन्दी कवि, पत्रकार व प्रखर वक्ता भी हैं। वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक हैं और १९६८ से १९७३ तक उसके अध्यक्ष भी रहे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे। कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता का पता चलता है।

आपकी विलक्षण प्रतिभा का लोहा तो विपक्ष ने भी सदा माना है और इसी के चलते लोह महिला इंदिरा गांधी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में आपको विदेश मंत्रालय का दायित्व भी दिया। प्रधानमंत्री के रूप में आपके कार्यकाल में भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बना जिसमें अटल सरकार ने ११ और १३ मई १९९८ को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। यह सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीकी से संपन्न पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं इसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए लेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊचाईयों को छुआ। इसके साथ ही  पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की पहल भी आपने ही 19 फ़रवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की । इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में आपने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की। कारगिल युद्ध भी यह राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता बस सेवा चलने के कुछ ही समय पश्चात् पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। अटल सरकार ने पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन न करने की अंतर्राष्ट्रीय सलाह का सम्मान करते हुए धैर्यपूर्वक किंतु ठोस कार्यवाही करके भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया। इस युद्ध में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण भारतीय सेना को जान माल का काफी नुकसान हुआ और पाकिस्तान के साथ शुरु किए गए संबंध सुधार एकबार फिर शून्य हो गए। साथ ही स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना से सुशोभित राष्ट्र को अटल जी ने एक अद्भुत परियोजना दी जिस्मने भारत भर के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (अंगरेजी में- गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल प्रोजैक्ट या संक्षेप में जी क्यू प्रोजैक्ट) की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्ग से जोड़ा गया। ऐसा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ इतना केवल शेरशाह सूरी के समय में ही हुआ था। इन सब के बाद भी अटल जी  एक उदारमना कवि ह्रदय पत्रकार रहे, जिन्होंने पंद्रह अगस्त, मेरी इक्यावन कविताएँ जैसी कृतियों के माध्यम से समाज को जागरूक किया।  हाँ विधि का लिखा कोई टाल नहीं सकता, इसी काल के करतब के आगे नतमस्तक होकर अहर्निश हिंदी सेवक जिसके कारण सयुंक्त राष्ट्र में हिंदी की चर्चा शुरू हो सकी, ऐसे महापुरुष के शरीर को विदाई देता है। अटल जी का जाना भारतीय राजनीती के उस युग का अवसान माना जाएगा जिसने गठबंधन की इबारत लिखी।

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