मध्यप्रदेश में बीजेपी को चारों खाने चित्त करने कांग्रेस ने रचाया चक्रव्यूह…. – योगेन्द्र सिंह परिहार

3:32 pm or August 23, 2018
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मध्यप्रदेश में बीजेपी को चारों खाने चित्त करने कांग्रेस ने रचाया चक्रव्यूह….

– योगेन्द्र सिंह परिहार
मध्यप्रदेश में साल 2018 के अंत में विधानसभा चुनाव होना है। 15 वर्षों से सत्ता से दूर होने की वजह से कांग्रेस को भाजपा हल्के में लेने की गल्ती कर रही है। भारतीय जनता पार्टी के कुल जमा एक ही जन नेता हैं जो अपनी लोक लुभावनी बातों से जनता को आकर्षित कर लेते है वो हैं राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। शिवराज बीजेपी के अकेले ऐसे नेता हैं जो नगरीय निकायों से लेकर सांसद तक के चुनाव में प्रचार पर जाते हैं और मध्यप्रदेश में जीत और हार के लिए जिम्मेदार ठहराये जाते हैं। अब कोई ये कह दे कि ये बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है तो इस बात में कोई दम नही है। असल बात ये है कि भाजपा में शिवराज के अलावा कोई दूसरी लाइन का नेता ही नही है या ये कहें कि शिवराजसिंह ने ही दूसरी लाइन लगभग मिटा दी है। स्वाभाविक सी बात है लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनना और बने रहने के लिए अन्य नेताओं को हाशिये पर पहुंचाना ही तो बड़ी चुनौती है।
शिवराजसिंह चौहान के भाषणों में जो विश्वास उनके मुख्यमंत्रित्व काल के शुरुवाती सालों में था, अब वो बात नही रही। अब शिवराजसिंह की बातों में केवल दोहराव है, न पूरी कर पाने वाली बड़ी बड़ी घोषणाएं हैं। भीड़ का पैमाना अब उनकी बातें नही बल्कि उनका मुख्यमंत्री पद का मुखौटा और सरकारी मशीनरी का बेजा उपयोग है जिससे लोग जबरिया सभाओं में लाये जाते हैं। हमने तो सुना है शिवराजसिंह भाषण दे रहे होते हैं उसी वक़्त जनता कार्यक्रम छोड़ कर जाने लगती है और ये तभी होता है जब आप वाक्पटुता की श्रेणी से निकल कर वाचाल हो जाओ। आप मेरी बात छोटे से उदाहरण से समझ लीजिए कि मध्यप्रदेश सरकार का सालाना बजट लगभग 2 लाख करोड़ रुपये है जिसमें सभी योजनाओं के मद शामिल हैं लेकिन हमारे यशश्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभी कुछ दिन पहले आदिवासी दिवस के दिन मंच से घोषणा कर डाली कि वे 2 लाख करोड़ रुपये सिर्फ आदिवासी समाज के विकास में खर्च करेंगे। कोरी झूठी घोषणाएं जिसका कोई ओर-छोर नही और ऐसा वे 12 महीने 24 घंटे करते हैं जो झेल जाए झेल जाए क्योंकि उन्हें तो चुनाव जीतना है बाद की बाद में देखी जाएगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की जा रही घोषणाओं को आप कुछ इस तरह समझ सकते हैं कि प्राचीन काल में एक राजा अपनी प्रजा से मिलने जाते तो हर जगह नए वादे करके आते। एक बार उनके मंत्री ने पूछा कि राजन हमारे राज्य के कोष की स्थिति बड़ी गंभीर है फिर भी आप रोज कोई न कोई घोषणा कर देते हो आखिर ये घोषणाएं पूरी कैसे होंगी? तब राजा ने मुस्कराते हुए मंत्री जी को एक कहानी सुनाई कि किसी राज्य में एक बार भयानक अकाल पड़ा और लोगों को खाने के लाले पड़ गए यहाँ तक कि राजा मंत्रियों के पास भी खाने के लिए कुछ नही था तब एक सैनिक मरा हुआ कुत्ता दरबार  में लेकर आता है और कहता है आज खाने के लिए यही मिला है। राजा आदेश देते हैं कि कुत्ते का मांस सभी मंत्रियों और कर्मचारियों में बांट दिया जाए तब एक मंत्री गुस्से में कहता है कि हम मंत्री हैं, क्या हम कुत्ते का मांस खाएंगे? तो राजा कहते हैं कि जब ज़िंदा बचोगे तब ही तो मंत्री रहोगे। ये कहानी सुनाकर हंसते हुए राजा मंत्री को कहता है कि हम झूठी घोषणाएं नही करेंगे तो लोग हमारी बातों में कैसे आएंगे और हम सरकार भी नही बना पाएंगे। हमारी की हुई घोषणाओं से ही हम दुबारा राज्य में काबिज होंगे। ये सरकार बनाने का नायाब भाजपाई फार्मूला है।
शिवराज युग अब खत्म होने को है क्योंकि  काँग्रेस ने कमर कस ली है। बीजेपी भले ही प्रायोजित तरीके से ये अफवाह फैलाये कि काँग्रेस में गुटीय संघर्ष है, वे एक नही हैं, अगर कांग्रेसी एक हो जाते तो उनकी सरकार बन जाती। अब भाजपा को ये गांठ बांध लेना चाहिए कि ये “अगर” शब्द अब खत्म हो चुका है और कांग्रेस ठोक-बजा के एक सुर और ताल में चल रही है।
मध्यप्रदेश काँग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेता प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने काँग्रेस की एकता की ध्वज पताका सबसे अनुभवी नेता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के हाथों में थमा दी है। दिग्विजय सिंह करीब 20 जिलों में कांग्रेस समन्वय समिति की एकता यात्रा लेकर पहुंच चुके हैं। प्रदेश के जिलों के हर कस्बों में किसी न किसी को नाम से पुकारने वाले दिग्विजय सिंह राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। एकता यात्रा में वे सकारात्मकता व विश्वास से लबालब दिखाई दे रहे हैं वे सिर्फ कार्यकर्ताओं में समन्वय बनाने का काम नही कर रहे बल्कि बड़े व पुराने नेताओं को घर से निकालने में भी सफल हो रहे हैं। दिग्विजय सिंह विश्वास के साथ कह रहे हैं कि मध्यप्रदेश में काँग्रेस की ही सरकार बनेगी। वो सिर्फ इसीलिए ऐसा कह पा रहे हैं कि उन्होंने 6 महीने नर्मदा जी की पैदल परिक्रमा करके सरकार की योजनाओं का ज़मीनी स्तर पर आंकलन कर लिया है, वे जान गए हैं कि योजनाओं का ज़मीन पर क्या हश्र हो रहा है।
काँग्रेस की एकता यात्रा में जन सैलाब उमड़ रहा है और दिग्विजय सिंह का एक-एक कर के सभी कार्यकर्ताओं से मिलना और उनके साथ परिवार की तरह साथ भोजन करना, बात करना, लोगों के मन को भा रहा है। जहां-जहां समन्वय यात्रा पहुंच रही है वहां के लोग बताते हैं कि यात्रा का जबरदस्त असर पड़ रहा है, काँग्रेस कार्यकर्ता उठकर खड़े हो गए हैं और किसी भी युद्ध मे सैनिकों की भूमिका अहम होती है यदि वे साहस के साथ खड़े हो गए हैं तो निश्चित है कि विजय उन्ही की होगी।
शिवराज सिंह की जनआशीर्वाद यात्रा में सरकारी तंत्र भीड़ इकट्ठे करने का काम कर रहा है और लोगों के नही आने पर सरकार जबरदस्ती उन कार्यक्रमों में स्कूलों के बच्चों को भीड़ के रूप में एकत्रित कर रही है। यानि जनता अब किसी भी तरीके से शिवराज सरकार के झांसे में नही आ रही है। काँग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के नेतृत्व में काँग्रेस ने चक्रव्यूह जैसी रचना की है। जनआशीर्वाद यात्रा जहां-जहां से होकर गुजर रही है वहां काँग्रेस की जन जागरण यात्रा ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। जन आशीर्वाद यात्रा में प्रशासन के अथक प्रयासों के बाद यदि 5 हज़ार लोग इकट्ठे हो रहे हैं तो उन्ही के पीछे जीतू पटवारी के नेतृत्व में चल रही जन जागरण यात्रा में 10-15 हज़ार लोग स्व प्रेरणा से पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा उज्जैन से प्रारंभ हुई तो भाजपा के शाह के शामिल होने के बाद भी बमुश्किल 15 हज़ार लोग इकट्ठे हुए वहीं आगर मालवा में कांग्रेस की जन जागरण यात्रा में प्रदेश काँग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की उपस्थिति में 60 हज़ार लोग गाजे-बाजे के साथ पहुंचे जो कि सीधे तौर पर परिवर्तन के संकेत हैं। छिंदवाड़ा के विकास की इबारत लिखने वाले कमलनाथ की मैहर, राजनगर, राजपुर व धार की सभाओं में अचंभित कर देने वाली अपार जनता दिखाई दी। ऐसा जन समर्थन कहीं पर भी मुख्यमंत्री को नही मिल रहा है।
मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के आने पर भी प्रदेश भाजपा लोगों को इकट्ठा नही कर पाई वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी मन्दसौर पहुंचे तो लगभग 3-4 लाख लोग उन्हें सुनने के लिए एकत्रित हुए और ये सुनी सुनाई बात नही है क्योंकि मैं खुद वहां मौजूद था मैंने मध्यप्रदेश में काँग्रेस के किसी भी कार्यक्रम में इस तरह का जन सैलाब पहली बार देखा।
मुख्यमंत्री की यात्रा में आगे पाठ पीछे सपाट जैसा हाल हो रहा है वहीं कांग्रेस के सभी बड़े जन नेता जिनकी जादुई छवि से हज़ारों लोग अपने आप उपस्थित हो जाते हैं वे एक के बाद एक करके हर जिले में पहुंच रहे हैं। ऐसी जमावट काँग्रेस में पहली बार देखने को मिल रही है।
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह न्याय यात्रा के माध्यम से हर जिले में अपनी दस्तक दे रहे हैं। राज्य सभा सांसद राजमणि पटैल संविधान बचाओ यात्रा के दौरान सभी जिलों में पहुंचे। विधि विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में काँग्रेस की लड़ाई लड़ रहे हैं। समन्वय समिति की एकता यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह सभी जिलों में दौरा कर रहे हैं। एकता यात्रा जिन जिलों से होकर गुजर चुकी है वहीं जीतू पटवारी की अगुआई में जन जागरण यात्रा पहुंच रही है। झाबुआ सांसद कांतिलाल भूरिया आदिवासी क्षेत्रों में यात्रा कर रहे हैं। किसान काँग्रेस के अध्यक्ष दिनेश गुर्जर पूरे प्रदेश में एक महीने पहले कलश यात्रा निकाल चुके हैं।
चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया, संभागीय समितियों की बैठकें ले रहे हैं। उन्ही के नेतृत्व में परिवर्तन यात्रा हर जिले में प्रारम्भ हो चुकी है। अभी मनासा में हुई परिवर्तन यात्रा में करीब 40 हज़ार लोग शामिल हुए थे। इन सभी यात्राओं के साथ प्रदेश में चल रहे सभी कार्यक्रमों के मास्टर माइंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ सभी जिलों में पहुंच रहे हैं जिनकी सभाओं में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ इकट्ठी हो रही है। कांग्रेस की ये आक्रामक रणनीति चुनाव के 3 महीने पहले से ज़मीन पर दिख रही है। जो कि चुनाव के परिणाम को बदल कर रख देगी।
काँग्रेस जहां यात्राओं के माध्यम से ज़मीन पर दिखाई दे रही है वहीं संगठन प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव दीपक बाबरिया की अगुआई में हर जिले में संगठन की बैठकों और कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। संगठन के सह प्रभारी जुबेर खान और संजय कपूर अलग-अलग जिलों में बैठकें ले रहे हैं। दीपक बाबरिया बूथ कमेटियों, मंडलम सेक्टरों और ब्लॉक के पदाधिकारियों की लगातार अपडेट ले रहे हैं। बीजेपी सुनियोजित तरीके से काँग्रेस की छुट-पुट घटनाओं को बड़ा बताकर प्रभारी महासचिव को बदनाम करने का प्रयास कर रही है जिससे वे संगठन की गतिविधियों से दूर हो जाएं। तमाम दुष्प्रचार के बाद भी कांग्रेस का एक भी नेता अपनी राह से नही डीग रहा है। काँग्रेस अब हर तरफ से ताकतवर नज़र आ रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ तमाम यात्राओं और दौरों के बावजूद कांग्रेस कार्यालय में काँग्रेस के प्रकोष्ठों और अलग-अलग समुदायों के लोगों के साथ बैठकें कर रहे हैं। भोपाल में होने वाले बड़े आंदालनों को सफल बनाने में मुख्य भूमिका पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी की होती है जिसे वे बखूबी निभा रहे हैं। कांग्रेस ने प्रदेश कार्यालय में तेज तर्रार नेत्री शोभा ओझा को मीडिया विभाग का अध्यक्ष बनाया हुआ है जो रोज़ किसी न किसी मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर देती हैं। काँग्रेस की आईटी सेल तकनीकी रूप से सम्पन्न डॉ धर्मेन्द्र बाजपेई व कंटेंट व रणनीति के क्षेत्र में गुजरात चुनाव में अपना लोहा मनवा चुके अभय तिवारी के नेतृत्व में जबरदस्त काम कर रही है। कांग्रेस के सभी विभाग व प्रकोष्ठ समूचे प्रदेश में प्रदर्शन कर रहे हैं यानि पूरी कांग्रेस ट्यून होके चल रही है। अमूमन कांग्रेस की कार्यशैली ऐसी नही होती जैसी दिखाई दे रही है। एकता, आक्रामकता, नियोजन हर पहलू में काँग्रेस की जबरदस्त कसावट दिखाई दे रही है।
विपक्षी दल ने शहरी क्षेत्रों में ये अफवाह फैला रखी है कि काँग्रेस नेता ज़मीन पर कहीं नही हैं जबकि हाल ही में एबीपी न्यूज़ के सर्वे ने ये साफ कर दिया है कि मध्यप्रदेश में काँग्रेस की सरकार बनेगी।  पिछले दिनों आये चुनावों के परिणाम सर्वे की सच्चाई पर मुहर लगाते हैं। काँग्रेस विरोधियों के मुंह बंद करने में इसीलिए सफल हो रही है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के नगरीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की एकतरफा जीत हुई है वहीं पचमढ़ी में छावनी परिषद के चुनाव में बीजेपी खाता भी नही खोल पाई।  बहोरीबंद, चित्रकूट, अटेर, मुंगावली व कोलारस विधानसभा उपचुनाव और झाबुआ-रतलाम लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी सरकार के मंत्रियों, जिला व जनपद के नेताओं और सरकारी मशीनरी के भारी दुरुपयोग के बाद भी कांग्रेस के प्रत्याशियों को ही विजय हासिल हुई और बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी।
महाभारत में चक्रव्यूह की रचना कौरवों ने अधर्म की स्थापना के लिए अर्जुन पुत्र अभिमन्यु को षड्यंत्रत पूर्वक कूट रचित योजना बनाकर घेरकर मारने के लिए की थी। मध्यप्रदेश में काँग्रेस का कहना है कि वे धर्म की स्थापना और सुशासन के लिए चारों तरफ से बीजेपी नेताओं की घेराबंदी कर रहे हैं। वैसे भी बीजेपी के पास पिटे पिटाये नेता हैं जो अपने क्षेत्र की ही जनता द्वारा भगाए जा रहे हैं। 3 महीनों में काँग्रेस का चक्रव्यूह भेद पाना अब बीजेपी के वश की बात नही है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है, पानी भी एक जगह जमा हो जाये तो वो दूषित हो जाता है। मध्यप्रदेश के राजनैतिक फ़िज़ाओं में परिवर्तन की बयार चल चुकी है।

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