राजस्थान : जनता अब बदलाव के मूड में – शैलेन्द्र चौहान

4:26 pm or September 29, 2018
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राजस्थान : जनता अब बदलाव के मूड में

शैलेन्द्र चौहान
राजस्थान की भाजपा सरकार के लिए इस बार विधानसभा चुनाव में राह आसान नहीं है। राज्य के ज्यादातर लोग वसुंधरा सरकार को दोहराने के मूड में दिखाई नहीं दे रहे हैं। राज्य में यदि ऐसा होता है तो यह पहला मौका नहीं होगा क्योंकि यहां लोगों की तासीर ही ऐसी है कि वे किसी भी दल की सरकार को दोबारा मौका नहीं देते हैं। चुनाव में महज एक महीना शेष हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गौरव यात्रा के बहाने तैयारियां शुरू कर चुकी हैं। वसुंधरा राजे की गौरव यात्रा पूर्वी राजस्थान के बाद अब राजस्थान के पश्चिमी धोरों से भी गुज़र चुकी है। गौरव यात्रा और चुनावी अभियान के साथ-साथ वसुंधरा राजे इतिहास को भी याद कर रही हैं और ऐतिहासिक स्मारकों का लोक अर्पण भी कर रही हैं, ताकि राजपूतों को लुभाया जा सके। राजस्थान में चुनावों की पूरी रणनीति और प्रचार सिर्फ मुख्यमंत्री राजे के पास है या फिर अमित शाह वहां जाकर माहौल बनाते हैं। लेकिन कोई दूसरा बड़ा स्थानीय नेता या तो बहुत सक्रिय नहीं दिखता या फिर उनके लिए कोई मौका नहीं है। बहुत से बड़े नेता अब मुख्यमंत्री के शरणागत हो गए हैं, इससे उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों में कुछ निराशा का भाव लगता है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी लोकप्रिय नेता नहीं है, वे संगठन को संभाल सकते हैं। बूथ के स्तर पर उन्होंने अब तक 25 हजार से ज़्यादा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दे दिया है, इसका फायदा हो सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चुनावी राजनीति पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यानी उनके राजस्थान के लगातार दौरों से लगता है कि प्रदेश में पार्टी के स्तर पर या फिर सरकार के स्तर पर सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है। वैसे अमित शाह ने जयपुर में समारोह में इस बात का दावा किया कि वहां फिर से बीजेपी की सरकार बनेगी और वसुंधरा राजे ही मुख्यमंत्री बनेंगी। यह भी बात सही है कि अमित शाह हर चुनाव को बहुत गंभीरता से लेते हैं और कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। इसलिए भी वे जल्दी जल्दी राजस्थान जा रहे हैं। जयपुर में शाह ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात की और जीत का मंत्र बताया और यह इशारा भी कर दिया कि चुनावों में सबको साथ मिल कर चलना होगा और पूरी ताकत लगानी होगी। प्रदेश के नेताओं का कहना है कि पार्टी अब भी अंदर से बंटी हुई है। पिछले चार साल में राजे सरकार के दौरान जिन लोगों को अपमान झेलना पड़ा, वे उसे भूलने को तैयार नहीं हैं। मोदी भी राजस्थान में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रवाद, विकास, गौरक्षा, राम मंदिर, मुस्लिम तुष्टिकरण तथा कांग्रेस की अक्षमता आदि मुद्दों को भुनाने पहुँच रहे हैं। लेकिन बहुत लाभ नहीं दिखाई दे रहा है। आजतक चैनल तक के एक सर्वे में राजस्थान के लोगों की जो राय सामने आई है, वह निश्चित ही भाजपा और वसुंधरा दोनों के लिए ही खतरे की घंटी है। इस सर्वे के मुताबिक राज्य के 48 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि इस बार सत्ता परिवर्तन होना चाहिए। 32 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वसुंधरा सरकार का कामकाज अच्छा है, जबकि 12 फीसदी लोग सरकार के कामकाज को ठीकठाक मानते हैं। जहां तक मुख्यमंत्री पद की बात है तो यहां कांटे की टक्कर है। 35 प्रतिशत लोग जहां एक बार फिर वसुंधरा को मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं, वहीं इतने ही लोग पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस पद पर देखना चाहते हैं। राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इसके लिए सरकार ने जियो के साथ मिलकर जियो भामाशाह प्रोग्राम तैयार किया है। जिसके अनुसार भामाशाह कार्ड धारकों को जल्दी ही केवल 95 रुपए में मोबाइल फोन उपलब्ध कराया जाएगा।  खबरों के मुताबिक, राज्य में चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए सरकार केवल 95 रुपए में नए मोबाइल फोन की सौगात देने जा रही है। इसके लिए सरकार ने जियो के साथ मिलकर जियो भामाशाह प्रोग्राम तैयार किया है। योजना के तहत कंपनी की ओर से कैंप, जियो स्टोर और रिटेलर्स के माध्यम से मोबाइल का वितरण किया जाएगा। इसके लिए उपभोक्ता को मोबाइल के लिए 1095 रुपए देने होंगे। इसके साथ भामाशाह कार्ड भी देना होगा। बाद में आप अपने आधार नंबर के जरिए इस सिम को एक्टिवेट कर सकते हैं। इस तरह फोन के साथ 95 रुपए का टैरिफ प्लान मिल जाएगा, जिसमें कॉलिंग के अलावा यूजर्स को 126 जीबी 4जी डाटा दिया जाएगा, साथ ही एसएमएस बेनिफिट्स भी दिए जाएंगे। प्‍लान की वैधता 6 महीने की रहेगी। सॉफ्टवेयर में भामाशाह कार्ड का नंबर डालने के बाद उपभोक्ता के भामाशाह से लिंक बैंक खाते में सरकार 500 रुपए की सब्सिडी देगी। इसके अलावा 500 रुपए का बैलेंस मोबाइल के वॉलेट में मिलेगा। इस बैलेंस को पेटीएम या अन्य किसी रिचार्ज सेवा में ट्रांसफर किया जा सकेगा। योजना के तहत 500 रुपए का बैलेंस जो ई-वॉलेट में मिलेगा, उसके लिए शर्त रखी गई है। यह बैलेंस भामाशाह ऐेप डाउनलोड करने की स्थिति में ही उपभोक्ता को दिया जाएगा। दरअसल ऐप में सरकार की तमाम लाभकारी योजनाओं का जिक्र है। यह योजना केवल जियो फोन के लिए ही वैध है।
राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा में बगावत के स्वर उठ रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंतसिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह और बहू चित्रा सिंह ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चित्रा ने कहा कि वसुंधरा सरकार को उखाड़ फेंकने का वक्त आ गया है। पश्चिमी राजस्थान में बीजेपी के दिग्गज नेता जसवंत सिंह पिछले चुनाव में ही बीजेपी छोड़ गए थे और फिर कांग्रेस से बीजेपी में आए नेता से हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन उनके बेटे मानवेन्द्र सिंह उससे पहले बीजेपी के विधायक बन गए थे, चार साढ़े चार साल तक पार्टी में ही रहे। अब पार्टी छोड़ दी है, कांग्रेस से टिकट लेकर चुनाव लड़ने की तैयारी में लगते हैं लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेता उनके लिए दरवाजा खोलने को तैयार नहीं हैं। मानवेंद्र ने 22 सितंबर को भाजपा से अलग स्वाभिमान रैली का ऐलान किया है। सिंह का कहना है कि 22 सितंबर की इस रैली में ही उनकी आगे की राजनीतिक राह का फैसला होगा। स्वाभिमान रैली की तैयारियों की बागडोर चित्रा सिंह संभाल रही हैं। मानवेंद्र अभी प्रदेश की शिव विधानसभा सीट से विधायक हैं। चित्रा सिंह ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ये जो युद्ध है इसको अब खत्म करने का वक्त आ गया है। ये मौका ईश्वर ने अच्छा दे दिया है, आप लोग एकतारूपी शस्त्र को हाथों में उठा लें। वसुंधरा सरकार को गिराना है। वैसे वसुंधरा और जसवंतसिंह की यह लड़ाई पुरानी है, लेकिन 2014 में जसवंत को लोकसभा टिकट नहीं मिलने के बाद ये लड़ाई खुलकर सामने आ गई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता कर्नल सोना सिंह को भाजपा ने बाड़मेर से टिकट दिया था, जबकि जसवंतसिंह इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे। चुनाव में जसवंत को हराने के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पूरी ताकत झोंक दी थी, जिससे बाड़मेर लोकसभा चुनाव में जसवंत को हार मिली थी। बाद में अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें पार्टी से भी निष्कासित कर दिया गया। भाजपा और मानवेंद्र सिंह के बीच जारी खींचतान के मुद्दे पर जब पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन सैनी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी ने मुद्दों पर विचार के लिए मानवेंद्र से संपर्क किया है। उन्होंने कहा, बातचीत चल रही है। हमने उनसे पहले भी संपर्क किया था और जो भी मुद्दे हैं, उन पर बात करेंगे। उल्लेखनीय है कि अटल बिहारी सरकार में विदेश मंत्री और वित्तमंत्री जैसे पदों पर रहे जसवंतसिंह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे हैं। उस समय उनकी गिनती वाजपेयी के बाद दूसरे पंक्ति के शीर्ष नेताओं में होती थी। वहीँ आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के निर्वाचन क्षेत्र झालरापाटन से भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी की पत्नी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगी। मुख्यमंत्री को कुशासन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनौती देने के लिए 2009 बैच के राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी की पत्नी मुकुल चौधरी झालरापाटन से चुनाव लड़ेंगी। चौधरी ने बताया कि लोकतंत्र में राजे के शासन में अन्याय से लड़ने के लिए उन्होंने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। चौधरी ने रविवार को बताया कि मैं निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भ्रष्टाचार और कुशासन के मुद्दे पर अपने जन्म स्थान झालरापाटन से चुनाव लडूंगी। मुख्यमंत्री के शासन में पूरा प्रदेश भ्रष्टाचार और कुशासन की मार झेल रहा है। प्रदेश में अपराधों की संख्या बढ़ रही है। मैं इन मुद्दों पर जमीनी स्तर पर काम कर रही हूं। चौधरी ने बताया कि उनके पति को प्रताड़ित किया गया और ईमानदारी से काम करने के बावजूद उन्हें चार्जशीट और लगातार स्थानांतरण से रूबरू होना पड़ा। उन्होंने बताया कि ईमानदार अधिकारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है और मेरे पति भी उसका हिस्सा हैं। मैं पहले झालरापाटन की बेटी और उसके बाद ईमानदार आईपीएस अधिकारी की पत्नी हूं। उन्होंने कहा कि झालरापाटन से चुनाव लडने की वजह यह है कि सरकार की मुखिया मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे यहां से विधायक चुनी जाती हैं। मुझे भ्रष्टाचार, कुशासन और लोगों की परेशानियों के लिए चुनाव लड़ने की प्रेरणा मिली है। चौधरी की मां शांति दत्ता 1993 में पूर्व भैरोसिंह शेखावत सरकार में कानून मंत्री थीं जबकि उनके पति जयपुर में स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो में पुलिस अधीक्षक हैं।
राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कई तरह के विरोधी समीकरणों का सामना कर रही बीजेपी के सामने अब एक और मुश्किल खड़ी हो गई है। एक ओर तो वह राजपूत वोटबैंक को साधने की कोशिश कर रही है तो दूसरी ओर उसके सामने एससी समुदाय के वोटबैंक की चिंता सताने लगी है। एससी/एसटी एक्ट को लेकर भी बीजेपी मुश्किल में दिख रही है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में अपना खासा दबदबा रखने वाली करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी ने आरक्षण और एट्रोसिटी सिटी बिल की समीक्षा की मांग की है। कालवी ने एक्ट को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एट्रोसिटी को पास करने उसका दोहरा चरित्र सबके सामने उजागर हो गया है। भाजपा को घेरते हुए कालवी ने कहा कि राम मंदिर और धारा 370 पर सरकार मामला कोर्ट में होने का हवाला देती है, दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी एट्रोसिटी बिल पास हो जाता है। कालवी ने आरक्षण का समर्थन तो किया, लेकिन एट्रोसिटी बिल का विरोध जताया, वहीं 23 सितंबर को करणी सेना के स्थापना दिवस के अवसर पर चित्तौड़ में क्षत्रिय समाज का अभी तक का सबसे बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें 3 मुख्य विषयों पर चर्चा की जाएगी। फिल्म ‘पद्मावत’ की समीक्षा, आरक्षण के 70 साल और एट्रोसिटी बिल पर समीक्षा की जाएगी।
दूसरी ओर कांग्रेस की राजस्थान इकाई के प्रमुख सचिन पायलट कह रहे हैं कि भाजपा राजस्थान में अंदरुनी कलह और गुटबाजी का सामना कर रही है और यह इस बात से साबित होता है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे दो अलग-अलग प्रचार अभियान चला रहे हैं। पायलट ने इसके साथ ही कहा कि उनकी पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता एकजुट हैं। राजे सरकार के खिलाफ कांग्रेस की कमान संभाल रहे पायलट ने चुनावी राज्य राजस्थान में बड़ी जीत का भरोसा जताया। पीटीआई को दिए साक्षात्कार में पायलट ने कहा कि राज्य इकाई प्रमुख के नाते उन्होंने गठबंधन के मुद्दे पर अपने इनपुट दिए हैं और अब इस पर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को फैसला करना है। पायलट ने कांग्रेस में अंदरुनी झगड़े की भाजपा की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि मुझे बहुत गर्व है कि राजस्थान में कांग्रेस के बहुत मजबूत और बहुत बड़े नेता हैं। सभी ने पार्टी को आज की स्थिति वाली मजबूती देने के लिए बहुत योगदान दिया है। जितने ज्यादा हैं, उतना अच्छा है। उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय की, जब शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि उसे इस बारे में फैसला करना होगा कि पार्टी का मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार पायलट और अशोक गहलोत में से कौन होगा?
भाजपा पर पलटवार करते हुए पायलट ने कहा कि इसके उलट दरअसल भाजपा अंदरुनी कलह और गुटबाजी का सामना कर रही है। भाजपा की तरफ से शाह राजस्थान में अलग प्रचार कर रहे हैं और मुख्यमंत्री अलग प्रचार कर रही हैं। पायलट ने कहा कि अमित शाह राज्य में अपनी पसंद का अध्यक्ष 75 दिन रख सके, उन्हें वसुंधराजी के दबाव में झुकना पड़ा और भाजपा अध्यक्ष के रूप में समझौते वाला उम्मीदवार सामने आया। राफेल मुद्दे पर पायलट ने कहा कि भाजपा को घोटाले पर जवाब देना होगा, क्योंकि यह आगामी विधानसभा चुनावों में जनता के मन में ज्वलंत मुद्दा रहने वाला है। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के खुलासों से इसे बारे में कोई संदेह नहीं रह गया है कि राफेल सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनावी वादों पर कटाक्ष करते हुए पायलट ने कहा कि दावे किए गए थे कि ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ और अब सरकार रंगे हाथों पकड़ी गई है। पार्टी की संकल्प यात्रा के तहत राजस्थान का दौरा कर रहे पायलट ने कहा कि कांग्रेस पांचों विधानसभा चुनावों में जीत को लेकर आशान्वित है, क्योंकि वह चुनावी राज्यों में अच्छी स्थिति में है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं।
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