‘सरदार’ पर राजनीति आखिर कहाँ तक होगी ‘असरदार’ ? – योगेन्द्र सिंह परिहार

2:38 pm or November 1, 2018
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‘सरदार’ पर राजनीति आखिर कहाँ तक होगी ‘असरदार’ ?

  • योगेन्द्र सिंह परिहार
सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत का वो जाना माना नाम है जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में प्रचलित है। बारडोली सत्याग्रह में अग्रणी भूमिका निभाने की वजह से वहां की महिलाओं ने उन्हें सरदार कहकर संबोधित और सम्मानित किया। वे देश की एकता और अखंडता के परिचायक थे।
याद रहे की सरदार वल्लभ भाई पटेल ही वह व्यक्तित्व रहे जिन्होंने लगभग छह सौ रियासतों का अखंड भारत में विलय करने का अदम्य कार्य संपन्न किया, राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने के जज्बे ने उन्हें महात्मा गाँधी के हृदय में विशेष स्थान पाया तब महात्मा गाँधी जी ने उनसे कहा था “रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी, जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे।”
मैं आज लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर गुजरात में उनकी ही लोहे से बनी 182 फ़ीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण समारोह देख रहा था। समारोह देखकर ये साफ समझ आ रहा था कि सरदार पटैल की प्रतिमा स्थापित कर माननीय नरेंद्र मोदी जी छोटी और तुच्छ राजनीति करने का प्रयास कर रहे हैं जो की भारत के गणतंत्र ने अभी तक देखी ही नहीं थी, क्योंकि इस कार्यक्रम के मंच पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी के अन्य प्रदेशों के गुजराती राज्यपाल की मौजूदगी से साफ संदेश दिया गया कि ये एक पार्टी (भाजपा) विशेष का कार्यक्रम है न कि भारत सरकार का। जबकि प्रतिमा के निर्माण में लगभग 3 हज़ार करोड़ रुपया जनता की गाढ़ी मेहनत की कमाई का लगा है जो कर के रूप में जनता सरकार को देती है। सरदार पटेल बहुलतावादी सोच के व्यक्ति थे उनमें सबको साथ लेकर चलने की अपार क्षमताएं थी। मोदी जी के ज़हन में यदि थोड़ा सा भी चिंतन सरदार पटेल का होता तो उन्होंने जिस तरह कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को आमंत्रित किया, वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जी को भी आमंत्रित कर सकते थे। लेकिन ये काम वही कर सकता था जिसका बड़ा दिल हो और सरदार पटैल की तरह सबको साथ लेकर चलने की ऊंची सोच हो। चूंकि प्रधानमंत्री मोदी 24 घंटे चुनावी मोड में रहते हैं “सबका साथ सबका विकास” कहना तो मोदी जी सीख गये लेकिन कथनी करनी के अंतर को नहीं पाट सके।
समझना होगा कि आखिर सरदार पटैल के नाम पर की जा रही राजनीति कितनी असर कारक होगी। भारतीय जनता पार्टी समूचे देश में ये भ्रम फैला रही है कि नेहरू जी और सरदार पटेल के संबंध अच्छे नही थे और बाद में भी गांधी परिवार ने उन्हें अनदेखा किया। भाजपा ये बातें फैलाकर कांग्रेस के खिलाफ माहौल तैयार कर रही है खासकर नरेंद्र मोदी जी। इस भ्रम पर पर्दा उठाने के लिए वल्लभ भाई पटैल की सबसे अच्छी जीवनी लिखने वाले महात्मा गांधी के प्रपौत्र राजमोहन गांधी का ज़िक्र ज़रूर करूंगा जिन्होंने ‘पटेल: ए लाइफ’ में लिखा कि ‘व्यापक तौर पर देखें तो स्वतंत्र भारत के तंत्र को जो वैधता और ताकत मिली, वह तीन व्यक्तियों की कोशिशों का नतीजा थी, गांधी, नेहरू और पटैल। यद्यपि राजमोहन गांधी नेहरू जी के प्रशंसक नही थे लेकिन उन्होंने फिर भी सच्चाई लिखी।
वरिष्ठ पत्रकार राम चन्द्र गुहा ने लिखा कि “ऐसी चर्चाओं से तमाम भारतीयों को यह भरोसा होने लगता है कि नेहरू और पटेल निजी तौर पर प्रतिद्वंद्वी और राजनीतिक विरोधी थे। इसकी वजह यह है कि पटेल पर भारतीय जनता पार्टी खासकर नरेंद्र मोदी अपना कब्जा मानने लगे हैं। मगर मोदी द्वारा पटेल के आह्वान में दो विरोधाभास दिखते हैं। पहली बात तो यह कि पटेल खुद जीवन भर कांग्रेसी बने रहे। महात्मा गांधी की हत्या के बाद गृह मंत्री के तौर पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाने का भी फैसला किया था। दूसरी बात यह कि नेहरू और पटेल एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि दोनों ही कॉमरेड और सहयोगी थे। 1920 के दशक से 1947 तक दोनों ने कंधे से कंधा मिलाते हुए कांग्रेस के लिए काम किया था, और इसके बाद भी स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में बतौर प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू और उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटैल दोनों का तालमेल अनुकरणीय था।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आज अपने भाषण में कह रहे थे कि सरदार पटैल ने हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई, बिल्कुल सही बात है उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस को प्रतिबंधित कर दिया था। इसीलिए तो वे लौह पुरुष थे। लौह पुरुष का मतलब इरादों और बातों से जो मजबूत हो। सरदार वल्लभ भाई पटैल का लोहा पूरा देश मानता था। जो ठान लेते थे वो करके दिखाते थे।
भाजपा सुनियोजित तरीके से ये बात फैला रही है कि सरदार पटेल के नाम से कांग्रेस ने कुछ नही किया और इंदिरा गांधी जी को ज्यादा तबज़्ज़ो दी तो ये बताइए की कांग्रेस ने आयरन लेडी इंदिरा गांधी जी की 3000 करोड़ रुपये की लोहे की इतनी ऊंची प्रतिमा कब बनवाई? हाँ इंदिरा गांधी जी के नाम पर एयरपोर्ट और यूनिवर्सिटीज बनाई होंगी जो देश की जनता के काम आ सके। लेकिन ये कहना सरासर गलत है कि सरदार पटेल के नाम की अनदेखी की गई। कांग्रेस ने सरदार सरोवर डैम की स्थापना की जिसमे 6400 करोड़ रुपये खर्च किये वो भी सिर्फ इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए कि अन्नदाता किसानों को सिंचाई के लिए खेतों में पानी पहुंचाया जा सके और आपके घरों में दो वक्त की रोटी के लिए अनाज की पैदावार बढ़ाई जा सके। जिस क्षेत्र में मोदी जी ने ये  प्रतिमा स्थापित की है वहां के करीब 300 किसानों की ज़मीन जबरिया अधिग्रहित की गई। वे किसान आज तक न्याय की गुहार लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। मोदी जी यदि आपको लग रहा था कि काँग्रेस सरदार पटैल को पूछ नही रही है तो उसका बदला लेने के लिए आप कोई दूसरा रास्ता निकाल सकते थे लेकिन उसके लिए किसानों का हक़ मारने की क्या ज़रूरत थी? 3 हज़ार करोड़ की इतनी बड़ी राशि राज्यों के किसानों के कल्याण के लिए लगाना चाहिए थी।
कांग्रेस ने देश मे सबसे ज्यादा समय शासन किया चाहते तो वे भी महापुरुषों की बड़ी बड़ी प्रतिमाएं लगा सकते थे लेकिन कांग्रेसियों के मन में देश की अधोसंरचना के निर्माण का जुनून सवार था वे देश के हर नागरिक को बढ़ते और समृद्ध देखना चाहते थे इसलिए उन्होंने हज़ारों करोड़ की मूर्तियां स्थापित करने की बजाए बड़े-बड़े बांध, विश्वविद्यालय, आईआईटी-एम्स जैसे उत्कृष्ठ संस्थान, एयरपोर्ट, बंदरगाह, रेलवे स्टेशन, एचएएल-बीएचईएल, इसरो जैसी संस्थाएं स्थापित की जिससे भारत का नाम पूरे विश्व मे गर्व के साथ लिया जा सके। कांग्रेस ने ही अहमदाबाद में सरदार वल्लभ भाई पटैल अंतर्राष्ट्रीय विमान क्षेत्र बनाया। सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि जिस सरदार पर प्रधानमंत्री जी आज इतने मोहित हैं उन्ही के नाम पर जब अहमदाबाद में हवाई अड्डा बन रहा था तो भाजपा के कार्यकर्ताओं ने उनके नाम पर विरोध दर्ज किया था। हालांकि विपक्ष में रहते हुए विरोध करना फिर सत्ता में आने पर तारीफ करना भाजपा की राजनीति का प्रमुख हिस्सा है। समूचे देश में सरदार वल्लभ भाई पटैल के नाम पर विश्वविद्यालय, शोध संस्थान और मेडिकल कॉलेज बने हैं। दूर मत जाइये, मध्यप्रदेश की सरकार जिस भवन से चलती है उसका नाम वल्लभ भवन है यानी सरदार वल्लभ भाई पटैल के नाम पर।
मोदी जी देश में अलग तरह की राजनीति स्थापित कर रहे हैं। फूट डालो और राज करो की नीति जो कि अंग्रेजों की थी लेकिन भाजपा खासकर मोदी जी उसका अनुसरण अक्षरसः कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस की यही रणनीति रही है हिन्दू और मुसलमान को लड़ा दो, अगड़ों और पिछड़ों को लड़ा दो।आरएसएस की सोच ही यही है कि जितना वर्ग, वर्ण और धर्म संघर्ष होगा उतना ही बीजेपी को फायदा होगा। मोदी जी एक कदम आगे चल रहे हैं वे ये मानकर चल रहे हैं कि देश की जनता से वोट लेना है तो कांग्रेसियों पर झूठी कहानियां बताते रहो, कभी महात्मा गांधी पर, कभी नेता जी सुभाष चंद्र बोस पर तो कभी सरदार पटेल पर। मोदी जी ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि 70 साल में कांग्रेस ने देश में कुछ नही किया और इन महापुरुषों की अनदेखी कर देश का अपमान किया जबकि हकीकत बिल्कुल विपरीत है। मैं तो कहता हूँ देश के लोगों को राहुल गांधी जी की बात भी सुनना चाहिए, राहुल जी पूछ रहे हैं क्या मोदी सरकार के इन 4 सालों से पहले देश मे कुछ नही हुआ? क्या मोदी जी देश की जनता के पुरुषार्थ को ललकार रहे हैं? राहुल जी साफ-साफ कह रहे हैं देश आज जो कुछ भी है वो किसानों की मेहनत, छोटे-बड़े सभी व्यापारियों की मेहनत और देश के एक-एक व्यक्तियों की मेहनत का नतीजा है।
मोदी जी की बातों में अनायास ही बदनीयत और विरोधाभास झलक जाता है। देश की जनता से सरदार पटैल जी की प्रतिमा के लिए लोहा एकत्रित करने के लिए समूचे देश को एक मुहिम की तरह जूझा दिया गया। जिस तरह भाजपा ने चुनावों में फायदा लेने के लिए राम मंदिर के लिए ईंट इकट्ठी की उसी तरह सरदार की प्रतिमा के लिए लोहा एकत्रित किया गया। ईंट कहाँ गईं किसी को नही मालूम और लोहा कहाँ गया वो भी किसी को नही मालूम। एक कंपनी को मूर्ति बनाने का टेंडर दिया गया और उस कंपनी ने चीन की किसी कंपनी को सबलेट कर दिया। हैं न विरोधाभास! अभी दिवाली आएगी फिर मुहिम चलेगी कि चीन की झालर कोई न खरीदे। देश भक्ति जगाई जाएगी। देश के भोले भाले लोग टेक्स्ट बना कर सोशल मीडिया में सबसे अपील करेंगे कि चीन की झालर नही लेना नही तो देशद्रोही कहलाओगे और भावना प्रधान देश संकल्प लेने लगेगा कि देश सर्वोपरि है चीन में बनी 10-20 रुपए की झालर न खरीदकर चीन को सबक सिखाने की बड़ी-बड़ी बातें होंगी। जब देश पूरी तरह भक्ति में लीन होगा तब हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी पीछे के दरवाजे से सरदार पटेल की 3 हज़ार करोड़ की मूर्ति बनाने का ठेका चीन को दे देंगे ठीक वैसे ही जैसे राफेल लड़ाकू विमान सौदे में किसी मित्र को फायदा पहुंचाने के लिए देश की सुरक्षा को भी ताक पर रख दिया गया।
सरदार पर राजनीति कितनी असरदार होगी ये तो वक़्त ही बता पायेगा। सरदार पटैल के नाम पर लोगों के मानस में नफरत के बीज बोना कहां तक उचित है? नरेंद्र मोदी जी के ऐसे विभाजनकारी प्रयोग देश की एकता और अखंडता के लिए घातक हो सकते हैं। प्रधानमंत्री जी को भाजपा कार्यकर्ता का चोला उतारकर समूचे देश को एक तराजू में तौलने का काम करना चाहिए और सर्वजन हिताय की भावना के साथ कार्य करना चाहिए जो कि कांग्रेस की मूल अवधारणा है।

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