देश फिर से सोने की चिड़िया बन जाएगा – अब्दुल रशीद

1:35 pm or November 17, 2018
8f2380a6fr1-copy

देश फिर से सोने की चिड़िया बन जाएगा

  • अब्दुल रशीद

गरीब किसान के अमीर नेता जब सुबह अपने मखमली बिस्तर पर बैठकर रेशमी चादर ओढ़े गर्म चाय की चुश्की ले रहे होते हैं तब किसान अपने खेतों में फसलों की रोपाई निराई कर रहा होता है ताकि गन्ने की मिठास से चाय मीठी हो सके, दूध जिसमें चायपत्ती डाल कर उबाली गई है। उस दूध को देने वाली गाय के चारे का इंतजाम हो या फिर चाय की पत्ती का स्वाद जो नेता जी के मूड को फ्रेश करता है उसके लिए भी हाड़तोड़ मेहनत और पसीना किसान ही बहाता है। जिस नर्म बिस्तर पर आप बैठे हैं उसके लिए भी किसान ही अपना हांथ खुरदुरा करता है। सुबह से शाम तक लजीज़ व्यंजन बनाने में लगने वाली सभी सामग्री अनवरत मिलती रहे और उसकी पौष्टिकता से नेता जी सेहतमंद रहें इन सभी चीजों का इंतज़ाम करते करते किसान पूरे परिवार के साथ आधे पेट खेतों में जुटा रहता है।

किसान यह सब इस उम्मीद से करता है कि मैं जब अपना कर्तव्य पूरी निष्ठां और इमानदारी से निभाऊंगा तो मेरा देश विकास करेगा।विकास की गुलाबी धूप हम पर भी पड़ेगी,तब भर पेट भोजन कर पाऊंगा,अपने बच्चों का भविष्य संवार सकूंगा,बेटी की डोली ख़ुशी के आंसू संग विदा कर सकूंगा।

यह सब तभी होगा जब किसानों के प्यासे खेत को पानी मिले,लेकिन जीने के आधुनिक तौर तरीकों और आरामपसंद उद्देश्य की पूर्ति के लिए पर्यावरण का वो हाल कर दिया गया है कि मौसम का मिजाज़ ठीक ही नहीं रहता,ना बारिश समय पर होती है ना ही गर्मी आपे में रहती है,अब तो मेढक मेढकी के ब्याह रचाने से भी कुछ नहीं होता। अच्छी तकनीक,अच्छा बीज बेहतर पैदावार के लिए जरुरी है, लेकिन बगैर पैसे यह संभव नहीं,कर्ज लिया और मौसम का मिज़ाज ठीक नहीं रहा,और फसल बर्बाद हो गई तब………….? सोंच के ही मन घबराने लगता है। देश के गरीब किसान को अमीरों की तरह मुंह छुपा के भागना और नेताओं की तरह गोबर से कोहिनूर निकालना थोड़े ही आता है? आता होता तो आत्महत्या और सीने पर गोली खाकर आकाल मौत थोड़े ही मरते।

बहरहाल चुनावी मौसम है और पांच साल बाद नेता जी किसानों के पास जा कर वोट के लिए लुभावने वायदे और क्षणिक प्रेम का दिखावा करते, हाथ जोड़े मिन्नत करते हुए अपनी सफेदी के चमकार से अपने काले कारनामे झूठे वायदे छुपाने का असफल प्रयास के साथ जब किसानों के चौखट पर खड़े दिखते हैं,तब किसान की पथराई आँखों को देखकर मानों ऐसा लगता है की नेता जी से कह रहे हों, आप ख़्वाब दिखाकर वोट मांगने आए हैं,आपसे विनम्र निवेदन है मेरे लिए विशेष कुछ मत कीजिए,झूठे वायदे मत किजिए, मेरी भावनाओं से मत खेलिए बस एक अर्जी मान लीजिए,जिस तरह मैं निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रहा हूं और अनाज पैदा कर रहा हूं, बिना यह सोंचे हुए के इस अन्न से जिसका पेट भरेगा वह अमीर है या गरीब,हिन्दू है या मुसलमान,अगड़ा है या पिछड़ा आप भी बस इतना ही मान लीजिए, देश फिर से सोने की चिड़िया बन जाएगा।

Tagged with:     , ,

About the author /


Related Articles

Leave a Reply

Humsamvet Features Service

News Feature Service based in Central India

E 183/4 Professors Colony Bhopal 462002

0755-4220064

editor@humsamvet.org.in