एचएमटी, आपका समय खत्म होता है अब!

3:29 pm or September 22, 2014
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– डॉ. महेश परिमल –

हते हैं समय से कोई जीत नहीं सकता। पर समय से हर कोई हार जाता है। पर समय बताने वाला ही यदि समय से हार जाए, तो क्या होगा? जी हाँ, देश की प्रतिष्ठित घड़ी एचएमटी समय से हार गई। पूरी कंपनी ही बंद हो गई। इससे यह कहा जा सकता है कि एचएमटी आपका समय खत्म होता है अब!एक घड़ी के समय का पूरा होना शायद इसे ही कहते हैं। समय बताने वाली घड़ी शायद समय के साथ नहीं चल पाई। एक समय वह भी था कि वह सबको चलाती थी, ससम्मान चलाती थी, आज वही चलने में नाकाम हो गई।

कहते हैं कि समय बदलते समय नहीं लगता। देश के लाखों लोगों को समय बताने वाली एचएमटी घड़ी का समय खत्म होने जा रहा है। 1961 में जापान की सिटीजन वॉच के साथ मिलकर शुरू होने वाली एचएमटी लिमिटेड कंपनी में सन् 2000 से ही विवाद चला आ रहा था। जिसका अंत कंपनी को बंद करने के निर्णय के साथ हुआ। एक समय बाजार में एचएमटी घडिय़ों की काफी इज्जत थी। उसे प्रतिष्ठा की दृष्टि से देखा जाता था। बेटे या बेटी के जन्म दिन पर यदि पिता ने उन्हें एचएमटी की घड़ी उपहार में दे दी, तो मानों बच्चों को पूरी दुनिया ही मिल गई। इसी तरह बच्चे भी अपने माता-पिता की शादी की वर्षगांठ पर यदि उन्हें एचएमटी की घड़ी उपहार में दे दी, तो माता-पिता के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती। रक्षाबंधन पर यदि भाई अपनी बहन को एचएमटी की घड़ी देता, तो बहन खुशी से झूम उठती। देश के लाखों-करोड़ों जनता को समय बताने वाली आखिर समय के आगे हार गई। इस समय कंपनी की हालत इतनी अधिक खराब है कि कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं कर पा रही है। ऐसा समय के साथ न चलने के कारण हुआ। यही गलती कोडक ने भी की थी। वह भी समय के साथ नहीं चल पाई। दोनों ने ही हमेशा अपने ब्रांड को सर्वश्रेष्ठ माना। उनकी यही सोच उन्हें पीछे ले गई। न तो उन्होंने समय के साथ अपने उत्पाद में कोई बदलाव किया, न ही कोई नया मॉडल प्रस्तुत किया। इसी बीच टाइटन से बाजार में प्रवेश कर अपनी धाक जमा ली। लोगों का एचएमटी से मोहभंग होने लगा। उन्हें टाइटन में विश्वास होने लगा। बहुत ही जल्द टाइटन ने लोगों के दिलो-दिमाग पर अपना कब्जा जमा लिया।

ऐसा अक्सर होता है। बदलते जीवन मूल्य के साथ बाजार भी बदलता है। समय की गति उससे भी तेज है। आश्चर्य इस बात का है कि लोगों को समय बताने वाली एचएमटी स्वयं समय को नहीं पहचान पाई और वही समय से हार गई। वैसे एचएमटी का पतन काफी पहले ही होना शुरू हो गया था।

मोबाइल, स्मार्ट फोन आदि बाजार में आने लगे। तो घडिय़ों को कौन पूछता। आज मोबाइल केवल आपकी बात ही नहीं करवाता, वह अन्य कई सुविधाएं भी देता है। लेकिन घड़ी तो केवल समय ही बताती है। इसके अलावा उसका और कोई काम नहीं है। वैसे भी लोगों के पास घड़ी होते हुए भी समय की कमी है। धीरे-धीरे समाज में यह धारणा फैलने लगी कि घड़ी वही पहनते हैं, जिनके पास समय होता है। आज किसी के पास घड़ी देखने तक का समय नहीं है। तो फिर उन्हें घड़ी की आवश्यकता ही क्यों हो? वक्त बदल रहा है, इसके साथ ही बदल रहे हैं वक्त के पैमाने। आज तेज से तेज दौडऩे वाली बाइक बाजार में आ रही हैं। ये बाइक केवल 6 सेकेंड में 100 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती हैं। यही उनकी विशेषता है। आज के युवाओं को भी यही चाहिए। धीमे चलने वाले मोबाइल या कंप्यूटर को इस्तेमाल करने वालों को वे पिछली सदी का इंसान मानते हैं। हर रोज कंप्यूटर को तेज से तेज चलाने वाले नए-नए प्रोसेसर बाजार में आ रहे हैं। आज किसी को इंतजार करना पसंद नहीं है। समय खोटा करना कोई नहीं चाहता। इसलिए लोगों ने रतार से अपना नाता जोड़ लिया है। रफ्तार भले ही जिंदगी की हो या फिर वाहन की। सभी में तेजी चाहिए।

इसी तेज रफ्तार के कारण आज वैवाहिक संबंध भी तेजी से बिगड़ रहे हैं। धीमा काम और निठल्लापन किसी को भी पसंद नहीं है। आलस का आज किसी भी क्षेत्र में कोई स्थान नहीं है। गति है, तो जीवन है। गति ही इंसान की पहचान बन गई है। किसी काम को कितनी जल्दी और पूर्ण करके देते हैं आप, यही आपकी पहचान होगी। लोग अपनी पहचान कायम करने के लिए क्या-क्या नहीं करते। इन सभी कामों में गति को सभी प्राथमिकता देते हैं। गति जीवन है, तो आलस दुर्गति का कारण। यही कारण है कि एचएमटी पीछे रह गई। टाइटन आगे निकल गई। गति नए सोच को जन्म देती है। एचएमटी ने इसे नहीं समझा। उसे अपनी समझ के कैनवास को बड़ा करना था। जिसकी समझ का कैनवास जितना बड़ा होगा, वह उतना ही सफल होगा। इस बात को गांठ बांधकर रख लें।

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