इस बार गंगा किसे तारती है बेटे को या बेटी को गंगा किसे आशीर्वाद देंगी, बेटे को या बेटी को? – डॉ. महेश परिमल

11:18 am or March 23, 2019
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इस बार गंगा किसे तारती है बेटे को या बेटी को

गंगा किसे आशीर्वाद देंगी, बेटे को या बेटी को?

  • डॉ. महेश परिमल

गंगा नदी अपनी पवित्रता के लिए जानी जाती है। बरसों से यह लोगों के पाप धोते आ रही है। पर इस बार गंगा में राजनीतिक प्रदूषण अधिक देखा जा रहा है। 5 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में खुद को गंगा पुत्र बताकर बेशुमार वोट प्राप्त किए थे। इस बार प्रियंका गांधी अवतरित हुई है, उसने भी खुद को गंगा की पुत्री बताया है, इसे ही आधार बनाकर वे वोट मांग रही हैं। लोगों ने देखा कि इस बार वह नाव पर यात्रा कर लोगों को रिझाने का प्रयास कर रही हैं। अब देखना है कि गंगा मैया इस बार अपना आशीर्वाद किसे देती है?

कांग्रेस की महासचिव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रयागराज से तीन दिनों तक प्रचार यात्रा की। प्रयागराज में हनुमानजी के दर्शन के बाद यात्रा की शुरुआत की। इस नाव यात्रा के माध्यम से प्रियंका ने कई तरह से राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है। इसके पहले के लोकसभा चुनाव में गंगा केंद्र में थी। इस बार भी वह केंद्र में है। पर इस बार गंगा नदी की पवित्रता को भुनाया जा रहा है। इस कार्य में दोनों प्रमुख दल लगे हुए हैं। अपनी गंगा यात्रा के दौरान प्रियंका गांधी ने कांग्रेस के साफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत करने के साथ-साथ गंगा के विकास और सफाई को लेकर सरकार द्वारा किए गए अधूरे वादों को जनता के सामने लाने का प्रयास कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश की कुल 80 लोकसभा सीट में से आधी सीटों पर गंगा मैया अपना असर डालती हैं। बिजनौर से बलिया तक करीब 25 सीटों पर गंगा धार्मिक और आर्थिक रूप से प्रभावित करती है। इसमें से 5 सीटें इस समय विपक्ष के पास हैं। बाकी की सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है। प्रियंका गांधी गंगा नदी की 130 किलोमीटर लम्बी बोट यात्रा की। इसके पहले उनके पिता राजीव गांधी ने गंगा की सफाई के लिए वाराणसी से ही गंगा एक्शन प्लान शुरु किया था। 2014 में वाराणसी से सांसद बने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की सफाई के लिए नमामि गंगे प्रोजेक्ट लांच किया था। ऐसे में प्रियंका की इस गंगा यात्रा में धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़ने की प्रबल संभावना है।

प्राचीनकाल से गंगा हिंदुओं की आस्था और अध्यात्म का स्रोत रही है। प्रियंका गांधी ने खुद को गंगा की बेटी बताकर प्रचार कर रहीं हैं। कांग्रेस भी हिंदुत्व की राह पर चल रही है, यह दर्शाने के लिए उन्होंने प्रयागराज में हनुमानजी मंदिर के दर्शन कर यात्रा की शुरुआत की। इसके साथ ही गंगातट पर पूजा-अर्चना की। गंगा की सफाई को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे प्रहार किए। उनके द्वारा उठाए गए सवालों में दम भी है। चुनाव के दौरान गंगा की सफाई को लेकर भाजपा ने कई वादे किए थे, करोड़ों खर्च होने के बाद भी गंगा उतनी साफ नहीं हो पाई है, जितनी अपेक्षा थी। गंगा आज भी मैली की मैली ही है।

प्रियंका की इस नाव यात्रा से प्रयागराज, भदौही, मिर्जापुर और वाराणसी सीटों पर सीधा असर पड़ेगा, ऐसा माना जा रहा है। दूसरी ओर परोक्ष रूप से कौशांबी, फूलपुर, मछलीशहर, जौनपुर, सोनभद्र, चंदौेली और गाजीपुर की जनता को साधने का प्रयास भी प्रियंका करेंगी। इसके पहले लखनऊ में रोड शो का आयोजन कर चुनाव प्रचार का बिगुल बजाया था। इस दौरान उनके निशाने पर लखनऊ के सांसद और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह थे। इसके बाद नाव यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। वाराणसी में प्रियंका मल्लाह समुदाय के लोगों से बातचीत की। उत्तर प्रदेश में मल्लाहों की आबादी करीब 8 प्रतिशत है। इसमें निषाद, मल्लाह, केवट, कश्यप, मांजी, बिंद, धीमार जैसी कई उपजातियाें का समावेश होता है। उत्तर प्रदेश की करीब 20 सीटों पर इस समुदाय का प्रभाव है, जो हार-जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वास्तव में गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव के बाद निषाद समुदाय एक बड़ी ताकत के रूप में सामने आया है। निषादों को अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा भी प्रयासरत है। इसी कोशिश में योगी सरकार ने निषादराज की प्रतिमा बनाने की घोषणा की है। तो प्रियंका गांधी भी निषादों को साधने का प्रयास कर रहीं हैं। नाव यात्रा से प्रियंका ने निषादों को आकर्षित करने का प्रयास किया है। कांग्रेस का कहना है कि प्रियंका गंगातट पर निषादों द्वारा बसाए गए गांव तक पहुंचना चाहती है। इसे ही सत्ताधारी भाजपा ने कोई खास महत्व नहीं दिया है।

अपनी बोट पर प्रियंका ने हाल ही में भाजपा से नाता तोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाली दलित नेता सावित्री बाई फूले को स्थान दिया है। इसके माध्यम से दलितों को साधने का प्रयास किया गया है। दूसरी ओर मायावती को भी यह संदेश दे दिया कि कांग्रेस भी किसी से कम नहीं है। इसके अलावा प्रियंका ने भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रेशेखर के साथ भेंट की थी। एक समय ऐसा भी था जब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का दबदबा था। तब दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम समुदाय कांग्रेस के मुख्य वोट बैंक थे। समय के साथ दलित मायावती के साथ चले गए। अब प्रियंका दलितों को वापस अपने खेमे में लाना चाहती है।

इस बार लोकसभा चुनावों में युवा मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। ऐसे में अपनी गंगा यात्रा के दौरान प्रियंका गांधी युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहीं हैं। गंगायात्रा की शुरुआत करने के पहले वे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के एक समूह के साथ वोट पर बातचीत की थी। इस बातचीत का उद्देश्य प्रदेश की समस्याओं का निराकरण तलाशना था। प्रियंका ने इन युवाओं के साथ शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार में देश में बेराजगारी चरमसीमा पर पहुंच गई है। ऐसे में ये मुद्दे युवा मतदाताओं को अपने प्रभाव में लेने की ओर एक साहसिक कदम है।

ये निर्विवाद है कि इस बार उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई है। कहने को तो उन्हें पूर्व उत्तर प्रदेश की ही जिम्मेदारी दी गई है। परंतु उनकी उपस्थिति का असर पूरे उत्तर प्रदेश में दिखाई दे रहा है। इससे वे उत्तर प्रदेश में मोदी विरोधी माहौल बनाने में कामयाब हो रही हैं। वास्तव में प्रियंका गांधी, राहुल गांधी का ऐसा ट्रम्प कार्ड हैं, जो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की किस्मत ही पलट सकती हैं। प्रियंका ने नाव यात्रा कर यह संदेश दिया कि इस तरह से भी प्रचार किया जा सकता है। इसके पहले आज तक किसी नेता ने बोट यात्रा नहीं की थी। तीन दिन की बोट यात्रा में कई पर निशाने साधे गए। वे यह अच्छी तरह से जानती हैं कि लोगों को किस तरह से जोड़ा जा सकता है। जोड़ने के लिए लोगों के पास जाना ही होगा, और वे ऐसा ही कर रही हैं।

प्रियंका की खास बात यह है कि वे लोगों को संबोधित करने के बजाए व्यक्तिगत रूप से मिलना अधिक पसंद करती हैं। लोगों से बात कर उनके मन की बात को समझने और फिर उस पर अपने विचार रखना, उनकी व्यूह रचना है। पीएम मोदी ने मन की बात से अपनी बात लोगों को रेडियो से बता ही रहे हैं। पर लोगों की बात को जानने की कभी कोशिश नहीं की। इससे प्रियंका एकदम उलट हैं। इसीलिए उनकी बोटयात्रा को लोग पीएम की मन की बात का जवाब मान रहे हैं। 5 साल पहले नरेंद्र मोदी ने खुद को गंगा पुत्र बताते हुए कहा था कि मां गंगा ने उन्हें बुलाया है। इस बार प्रियंका गांधी खुद को गंगा की बेटी बताकर कह रही हैं कि प्रयागराज तो उनके पूर्वजों की भूमि है। गंगा को मुझे बुलाने की आवश्यकता ही नहीं है। पिछले लोकसभा मेें गंगा पुत्र नरेंद्र मोदी पर मां गंगा का आशीर्वाद बरसा था। परंतु इस बार गंगा की बेटी प्रियंका गांधी भी गंगा से अपना हक मांग रही हैं। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव में गंगा का आशीर्वाद गंगा के बेटे को मिलता है या गंगा की बेटी को?

 

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