दिग्विजय सिंह के मैदान में उतरने से भाजपा में बेचैनी – मोकर्रम खान

6:36 pm or March 29, 2019
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दिग्विजय सिंह के मैदान में उतरने से भाजपा में बेचैनी

  • मोकर्रम खान

कांग्रेस ने जब से दिग्विजय सिंह जी को भोपाल से लोकसभा प्रत्‍याशी घोषित किया है तब से भाजपा में खलबली मच गई है. हालांकि भाजपा नेता अपनी घबराहट छिपाने के लिये यह कह रहे हैं कि दिग्विजय सिंह भोपाल से चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा की जीत बहुत ही आसान होगी, किंतु वास्‍तविकता यह है कि भाजपा तथा आरएसएस मिल कर अभी तक भोपाल के लिये प्रत्‍याशी तक नहीं ढूंढ पाये हैं. उमा भारती जिन्‍हें पहले मुख्‍य मंत्री पद से हटाया गया फिर मध्‍यप्रदेश से ही निर्वासित कर दिया गया और अब जब 2019 के लोकसभा चुनाव आये तो उन्‍हें अचानक पार्टी का उपाध्‍यक्ष बना कर चुनावी मैदान से ही बाहर कर दिया गया और यह घोषित कर दिया गया कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगी जबकि उमा भारती कह रही हैं कि वे 2024 का चुनाव अवश्‍य लड़ेंगी, फिर 2019 में क्‍यों नहीं लड़ रहीं इस प्रश्‍न का उत्‍तर किसी के पास नहीं है. बहरहाल इतनी दयनीय स्‍थिति झेल रही उमा भारती ने कहा है कि दिग्विजय सिंह से तो वर्तमान सांसद आलोक संजर ही जीत जायेंगे, यद्यपि ऐसा दावा न तो आलोक संजर ने किया है न ही किसी अन्‍य भाजपा नेता ने. भाजपा हाई कमान दिग्विजय सिंह की काट ढूंढने में रात दिन एक कर रहा है. उमा भारती भोपाल से एक बार लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं और मध्‍य प्रदेश की मुख्‍यमंत्री भी रह चुकी हैं, वह भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ कर अपने हाईकमान की चिंता दूर कर सकती हैं किंतु न तो वह स्‍वय दावेदारी कर रही हैं, न ही भाजपा द्वारा उनके नाम का कहीं जिक्र किया जा रहा है. एक नाम उछाला जा रहा है, पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का किंतु उन्हीं के शासनकाल में व्‍यापम तथा अन्‍य घोटालों तथा बेलगाम नौकरशाही के कारण सत्‍ता के प्रति नाराजगी की वजह से प्रदेश तथा भाजपा का बंटाधार हुआ, इस कारण उनके नाम पर भी असमंजस है. दूसरा नाम आया भोपाल के महापौर आलोक शर्मा का किंतु उनकी लोकप्रियता कितनी सीमित है इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि उन्‍हीं की अगुवाई में स्‍व. रसूल अहमद सिद्दीकी की पुत्री फातिमा को मुस्लिम बहुल भोपाल (उत्‍तर) विधान सभा जो स्‍व. सिद्दीकी साहब का क्षेत्र था, से विधानसभा चुनाव लड़ाया गया किंतु वह कांग्रेस प्रत्‍याशी आरिफ अकील से भारी अंतर से पराजित हुईं जबकि आलोक शर्मा ने फातिमा को जिताने के लिये एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था. जो व्‍यक्ति एक विधानसभा चुनाव नहीं जिता सका, वह 10 गुना बड़े 21 लाख मतदाताओं वाले लोकसभा क्षेत्र में क्‍या प्रदर्शन कर पायेगा, स्‍वत: स्‍पष्‍ट है. बीच बीच में एक नाम और उछला जाता हैं वह है कैलाश विजयवर्गीय का जिनका भोपाल से कभी सीधा संबंध नहीं रहा, जब तक मंत्री रहे तो कुछ समय भोपाल में भी बिताना पड़ जाता था. शिवराज सिंह का तख्‍तापलट कर मुख्‍यमंत्री बनने के चक्‍कर में मध्‍यप्रदेश से ही बाहर कर दिये गये. इंदौर जहां के वे रहने वाले हैं, वहां से दावेदारी छोड़ भोपाल में ताल ठोकने का दावा करने का स्‍वांग कर रहे हैं जबकि उन्‍हें दिग्विजय सिंह जी के सामने अपनी हैसियत बखूबी मालूम है इसीलिये कैलाश जी इस बारे में ज्‍यादा नहीं बोल रहे हैं.

वास्‍तविकता यह है कि भाजपा ने 15 वर्ष पूर्व प्रदेश में बिलकुल रामराज्‍य लाने का वादा किया था जिसके कारण लोगों ने भाजपा को सर आंखों पर बैठाया और लगातार तीन बार मौका दिया किंतु इन 15 वर्षों में रामराज्‍य तो नहीं आ सका अपितु भ्रष्‍टाचार नियंत्रण से बाहर चला गया. व्‍यापम घोटाला जिसने हजारों मेधावी छात्र छात्राओं का भविष्‍य बर्बाद कर उन्‍हें आत्‍महत्‍या करने हेतु विवश किया, अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर चर्चित हुआ जिसके कारण न केवल मध्‍यप्रदेश बल्कि पूरे देश की बदनामी हुई. कई अन्‍य विभागों में भी बड़े बड़े घोटाले हुये जिससे सरकार की बदनामी हुई. सड़क, पानी और बिजली के मुद्दों पर भी भाजपा की किरकिरी हुई. सड़कें तो राजधानी भोपाल के अंदर ही गड्ढों से भरी पड़ी हैं, अन्‍य शहरों तथा गांवों का हाल बुरा है. यही हाल पानी का है, राजधानी में ही 15 सालों से एक दिन छोड़ कर पानी आता है. बिजली का वितरण तथा बिल वसूली निजी हांथों में दे दिये जाने के कारण आम जनता अनाप शनाप बिजली बिलों से त्रस्‍त है. इन सबके ऊपर बेरोजगारी मुख्‍य मुद्दा है जिसके कारण कई जगह लोगों को भुखमरी की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.

भाजपा के नेताओं को मालूम है कि कांग्रेस उक्‍त मुद्दों पर उन्‍हें घेरेगी और इसका उत्‍तर देना असंभव होगा. दिग्विजय सिंह जी कांग्रेस के स्‍थापित नेता हैं, उनके समर्थक लाखों की तादाद में हैं, उन्‍हें हरा पाना भाजपा के किसी नेता के बस की बात नहीं है, स्‍वयं नरेंद्र मोदी की भी नहीं. शायद इसीलिये कुछ समय पूर्व यह खबर चली थी कि नरेंद्र मोदी भोपाल से लोकसभा चुनाव लडेंगे क्‍योंकि यह भाजपा की सब से सुरक्षित सीट है किंतु जब से कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह जी को भोपाल से प्रत्‍याशी घोषित किया है, इस चर्चा पर पूर्ण विराम लग गया है.

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