जागो मातृ शक्ति जागो ! – योगेन्द्र सिंह परिहार

4:46 pm or May 7, 2019
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जागो मातृ शक्ति जागो !

योगेन्द्र सिंह परिहार
भोपाल लोकसभा चुनाव में जबसे भाजपा ने प्रज्ञा ठाकुर को मैदान में उतारा है तब से ही हर मतदाता अपने आपको ठगा से महसूस कर रहा है। लोग आपस मे बात कर रहे हैं “प्रज्ञा ठाकुर ही मिली थी भाजपा को चुनाव लड़ाने के लिए, इससे अच्छे तो आलोक संजर थे कम से कम साफ छवि के तो थे” वहीं प्रज्ञा ठाकुर रो-रो कर महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर अपना उल्लू सीधा करना चाह रही हैं।
आश्चर्य की बात ये है कि भोपाल की भोली-भाली जनता, खासकर महिलाएं प्रज्ञा के रूदन को ही सही मान रही हैं। जबकि सच्चाई ये है कि प्रज्ञा ठाकुर पहली बार मध्यप्रदेश में जब गिरफ्तार हुई तो प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री थे। जानने वाली बात ये है कि प्रज्ञा ठाकुर को संघ प्रचारक सुनील जोशी की हत्या के आरोप में शिवराज सिंह चौहान की सरकार की पुलिस ने 2 बार गिरफ्तार किया था। जब रोती हुई प्रज्ञा अपनी गाथा सुनाती हुई कहती हैं कि उन्हें दिग्विजय सिंह जी ने फंसाया तो महिलाएं एक बार ये क्यों नही पूछती कि क्या शिवराज सिंह चौहान की पुलिस दिग्विजय सिंह जी के इशारे पर चल रही थी जो उन्होंने सुनील जोशी हत्याकांड में प्रज्ञा ठाकुर को जेल भेजा?
प्रज्ञा ठाकुर की बातों में द्रवित होने वाली महिलाएं एक बार हिम्मत जुटा के उनसे पूछें कि छत्तीसगढ़ के बिलाईगढ़ में जब वे अपने जीजा जी के यहां रहती थी तब उन्होंने एक युवक को चाकू क्यों मारा था? लड़ने झगड़ने वाली प्रवृत्ति की प्रज्ञा ठाकुर के लक्षण आदतन अपराधी के ही दिखाई देते हैं।
अब मैं आता हूँ मालेगांव ब्लास्ट मामले में। मालेगांव में जब आतंकी हमला हुआ तब हमले में जिस दोपहिया वाहन का इस्तेमाल हुआ वह प्रज्ञा ठाकुर के नाम पंजीकृत थी। तो ऐसे में प्रज्ञा ठाकुर का इस मामले में गिरफ्तार होना कोई आश्चर्य जनक बात नही थी। प्रज्ञा ठाकुर इस मामले में 1 नही 2 नही पूरे 9 साल जेल में रहीं। प्रज्ञा ठाकुर को महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते(ATS) ने गिरफ्तार किया था। अब हमारी भोली भाली महिलाएं जो प्रज्ञा ठाकुर की बातों में आ रही हैं कि दिग्विजय सिंह जी ने उन्हें प्रताड़ित किया। तो वे प्रज्ञा ठाकुर से एक बात पूछें कि मालेगांव ब्लास्ट मामले में जब वे गिरफ्तार हुई तब क्या दिग्विजय सिंह जी केंद्र में मंत्री थे, क्या दिग्विजय सिंह जी के पास कोई  प्रशासनिक पद था जो उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए प्रज्ञा ठाकुर को प्रताड़ित करवाया? तो मैं आपको जानकारी देता हूँ कि दिग्विजय सिंह जी न तो केंद्र में मंत्री थे और न ही किसी पद पर थे। दिग्विजय सिंह जी द्वारा प्रज्ञा ठाकुर को प्रताड़ित किये जाने वाली बात मनगढंत कहानी है जो वोटों की खातिर गढ़ी गई है।
लोग कह रहे हैं उनपर झूठे प्रकरण लादे गए हैं जबकि वारदात की जगह अलग-अलग हैं और अपराध भी अलग-अलग हैं और बड़ी बात ये है कि 3 मामले जो उजागर हुए हैं वे तीनों मामले अलग अलग राज्यों के हैं। ये महज झूठे प्रकरणों में फंसाने वाले मामले तो नही दिखाई पड़ते। ये सीधे-सीधे गंभीर आपराधिक मामले हैं। ऐसे अपराधी की जगह सिर्फ जेल की सलाखों के पीछे है।
मैं भोपाल लोकसभा क्षेत्र की समस्त मातृ शक्ति से जागृत होने की अपील करता हूँ कि जाग जाइये और जिस महिला के एक नही 3 आपराधिक मामले अब तक उजागर हो चुके हैं वो निश्चित ही शातिर दिमाग की अपराधी होगी और हर तरह के फ़न में माहिर होगी। उसके लिए रोना-गाना अपनी बात को मनवाने का महज एक तरीका मात्र है।
मेरा भोपाल के सभी मतदाताओं से आग्रह है कि एक बार गूगल और यूट्यूब में सर्च करके ये ढूंढने का प्रयास कीजिये कि एक आध कोई उनका वीडियो मिल जाये जिसमे वे धर्म और भगवत विषयों पर कोई प्रवचन दे रहीं हो। आपको निराशा ही हाथ लगेगी क्योंकि मैं हर तरह से कोशिश कर चुका हूँ मुझे एक भी उदाहरण नही मिला जब गेरुआ वस्त्र पहनी इस महिला के भगवत प्रवचन देने के कोई प्रमाण मिले हों।
हे मातृ शक्ति रंगे हुए वस्त्रों के पीछे छुपी एक खूंखार अपराधी को पहचानिए कहीं ऐसा न हो कि आप मोदी जी के अंधे प्रेम में एक आतंक की पर्याय बन चुकी महिला को अपने शहर में पनाह दे दो और बाद में पछताने के अलावा आपके पास कुछ भी न रहे।
सोच समझकर अपने कीमती मत का इस्तेमाल करें, हमारा वोट निर्माण के लिए हो न कि विध्वंश के लिए।
जय हिंद जय भारत।।

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