आम आदमी की सिर्फ अर्ज़ियां पहुंचती हैं, उम्मीदें नहीं ! – अब्दुल रशीद

3:51 pm or August 1, 2019
maxresdefault

आम आदमी की सिर्फ अर्ज़ियां पहुंचती हैं, उम्मीदें नहीं !

  • अब्दुल रशीद

दुनियाभर में होने वाली हिंसा का सबसे विभत्स  रूप है बलात्कार। बलात्कार एक ऐसा लफ्ज़ है, जिसे सुनते ही रूह कांप उठती है।समाज में ऐसे लफ्जों के सुनने का मतलब है,मानवता का पतन। अफ़सोस आजकल यह लफ़्ज हमारे कानों में अक्सर टीस देता है कारण बलात्कार जैसी घटनाओं का बढ़ना और बलात्कारियों के समर्थन में झंडाबरदार बने सभ्य समाज के असभ्य लोगों का झुंड।

ऐसी खबरें जिनको सामान्य लगती है वह अपने अंतर आत्मा को टटोल कर देखें क्या उनकी आत्मा जिंदा भी है,क्योंकि एक स्वस्थ् और सभ्य इंसान के रूह को तो ऐसी ख़बरें तड़पा देती है।

बलात्कार के मामले से जुड़े आंकड़े हमारे तथाकथित पढ़े लिखे और नारों की चिल्ला चोट करने वाले समूह के कुरूप चेहरे को ही उजागर कर रहे हैं। देशभर के हाई कोर्ट से आए आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 6 महीनों में यानि 1 जनवरी 2019 से 30 जून 2019 के बीच भारत में बच्चियों के बलात्कार के 24,212 मामले दर्ज़ किए गए हैं। इस हिसाब से 1 महीने में 4000, एक दिन में 130 और हर 5 मिनट में एक बलात्कार की घटना दर्ज़ हुई है।

उन्नाव में पहले लड़की के साथ बलात्कार होता है, उसके बाद लड़की की FIR हीं नहीं  लिखी जाती, उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ती है। फिर लड़की के पिता को मरवा दिया जाता है, लड़की को मुकदमा वापस लेने के लिए मजबूर किया जाता है। जब लड़की मुकदमा वापस नहीं लेती, तो उसका एक्सीडेंट हो जाता है,या करवा दिया जाता है? एक्सीडेंट में लड़की और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं, उसकी चाची और मौसी की मौत हो जाती है।

एक राजनीतिक स्लोगन के लिए ट्वीटर पर ऐसे टूटे की करोड़ों ट्वीटर हैंडल के स्टेटस बदल गए,लेकिन बलात्कार की इस पीड़िता के लिए एक ट्वीट भी नहीं, ऐसा सोंचने वाले गलत सोंचते हैं। शायद उनकी याददाश्त कमज़ोर है, डिस्कवरी शो के शूटिंग के दौरान क्या क्या नहीं हुआ और उस क्या क्या से क्या हुआ क्या आप सब नहीं जानते हैं, ऐसे में इन छुटभैये मुद्दों पर ध्यान देने से होगा क्या, मामला ज्यादा तूल पकड़ेगा तो दिल से माफ़ नहीं करेंगे  वाला रेडीमेड स्टेटमेंट तो है ही ना।

आम जनता भी न आम ही की तरह होती है पहले चूसी जाती  है और फेंके जाने पर गुठली की तरह कड़क हो, वृक्ष का रूप धर लेती है, इस उम्मीद में कि  अकेले थे इसलिए चूस लिए गए अब विशाल रूप है। लेकिन वो कहावत है न तू डाल-डाल तो हम पात-पात वृक्ष से फिर आम को अलग कर एक-एक करके चूसने वाले चूस कर फिर फेंक देते हैं। जनाब,साहेब के पास आम आदमी की सिर्फ अर्ज़ियां पहुंचती हैं, उम्मीदें नहीं !

Tagged with:     , , , ,

About the author /


Related Articles

Leave a Reply

Humsamvet Features Service

News Feature Service based in Central India

E 183/4 Professors Colony Bhopal 462002

0755-4220064

editor@humsamvet.org.in