अत्याचार-भ्रष्टाचार और मोदी सरकार

6:57 pm or June 23, 2014
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विवेकानंद-

रीब साल भर पहले इन्हीं दिनों नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के लिए मशक्कत कर रहे थे। तब वे छतीसगढ़ के सीएम रमन सिंह की विकास यात्रा में हिस्सा लेने गए थे और वहां उन्होंने कहा था कि ‘अपनी जवान बेटियों को लोग दिल्ली न भेजें,क्योंकि वहां मनमोहन सिंह बैठे हुए हैं। अब नरेंद्र मोदी दिल्ली में बैठे हैं और छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री कहते हैं कि बलात्कार धोखे से हो जाते हैं। मुख्यमंत्री रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र के डौडीलोहारा में रहने वाली एक 4 साल की बच्ची बलात्कार हो जाता है। मोदी दिल्ली में बैठे हैं और मध्यप्रदेश के गृह मंत्री कहते हैं कि बलात्कारी बता कर नहीं जाता है। मोदी दिल्ली में बैठे हैं और आए दिन दिल्ली में बलात्कार हो रहे हैं। इतना ही नहीं उनकी कैबिनेट के मंत्री निहालचंद मेघवाल भी रेप के एक मामले में फंसे हुए हैं, लेकिन मोदी खामोश हैं। अब बेटियां किसके भरोसे अपने आप को सुरक्षित समझें? मोदी और उनकी सरकार व पार्टी के तमाम सदस्य बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। यह मामला तब और संगीन हो जाता है जब यह पता चलता है कि केस की शुरूआत बीजेपी कार्यकर्ता से शुरू हुई और मंत्री तक पहुंच गई। जो आरोप हैं वे बहुत घिनौने हैं। लड़की की मानें तो उसका पति ओमप्रकाश गोडरा खाने में नशीली चीजें मिलाता था और उस पर दूसरे पुरुषों के साथ संबंध बनाने का दबाव बनाता था। उसके पति ने घर में सीसीटीवी कैमरे लगा रखे थे और उसकी मदद से अश्लील वीडियो बनाया करता था। बीजेपी के लिए सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि यह व्यक्ति बीजेपी कार्यकर्ता था और राजस्थान बीजेपी युवा मोर्चा का सदस्य था। महिलाओं पर अत्याचार की यह दास्तां पुरानी है, लेकिन बीजेपी को अब दिखाई नहीं देती यह और बात है। बीजेपी रायों में अपराध अन्य किसी रायों से कम नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से इन रायों में अपराधों को दबाया जाता है चाहे प्रशासनिक स्तर पर हो या मीडिया के स्तर पर इसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती। मध्यप्रदेश में तो अपराध सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर चुका है। महिला अपराधों के अलावा यहां आए दिन खनन माफिया अधिकारियों को ही अपना निशाना बनाता रहता है और सरकार तमाशा देखती रहती है। जिस वक्त उत्तरप्रदेश में महिला अत्याचारों की दास्तां मीडिया पर चल रही थी उसी वक्त गुजरात-मध्यप्रदेश-राजस्थान-छत्तीसगढ़ में भी महिलाएं दरिंदगी का शिकार हो रही थीं, लेकिन बीजेपी बजाए अपने रायों के बदायूं का दौरा कर रही थी। गुजरात में भी एक नाबालिग को जिंदा जलाया गया लेकिन किसी के कान में जूं तक नहीं रेगी। मध्यप्रदेश में तो मुख्यमंत्री की मां के गले से भी बदमाश चैन छीन ले गए, इससे अधिक बेलगाम अपराध और क्या हो सकता है।

यही स्थिति भ्रष्टाचार की है। बीजेपी पहले अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को टिकट देती है और फिर संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि साल भर में संसद साफ हो जाना चाहिए। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने भ्रष्टाचारी नेताओं को किस तरह संरक्षण दिया, क्या यह किसी को याद नहीं है? यहां तक कि सजा पाने के बावजूद भी एक नेता को मंत्री पद पर बैठाए रहे और संसद में आकर ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश में इन दिनों व्यापमं घोटाले की धूम है। बीजेपी के पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को हाल ही में गिरफ्तार किया गया है। इस घोटाले को सरकार पिछले चार साल से बड़ी चालाकी से दबाए रही। मध्यप्रदेश की ईमानदार सरकार और चाल चरित्र चेहरे वाली बीजेपी यदि चाहती तो यह घोटाला चार साल पहले न केवल खुल जाता बल्कि कई छात्रों के जीवन से खिलवाड़ भी नहीं हो पाता। सबसे पहले वर्ष 2009 में इस घोटाले को पारस सकलेचा ने उठाया था। इसके बाद वर्ष 2011 में एक बार कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने और एक बार बसपा विधायक राधेलाल बघेल ने उठाया, लेकिन सरकार अपनी संख्याबल का लाभ उठाकर इसे दबाती रही। अब मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि कानून अपना काम करेगा। कानून को यदि काम करने दिया गया होता तो अब तक न जाने कितने सफेदपोश सलाखों के पीछे। मध्यप्रदेश के लोकायुक्त न जाने कितनी बार कह चुके हैं कि सरकार प्रदेश के दर्जनभर मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की इजाजत नहीं दे रही है। इस तथ्य के बाद क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह कथन सही लगता है कि कानून अपना काम करेगा। और इसके बाद क्या संसद में दिए गए नरेंद्र मोदी के बयान से इत्तेफाक किया जा सकता है? जो सरकार, जो पार्टी अपने मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई या जांच करने तक की अनुमति नहीं दे रही हो वह भ्रष्टाचार से जंग का किस मुंह से ऐलान करती है और जतना उस पर भरोसा कैसे करती है शायद यही सबसे बड़ा अजूबा होना चाहिए।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी ने इतने बुलंद तरीके से झूठ बोले हैं जो सच पर भारी पड़े हैं? शायद यही सच है। इस सच की पुष्टि हाल ही में बीजेपी ने कर दी है। बीजेपी जब विपक्ष में थी तब महंगाई को लेकर कहा करती थी कि इसके लिए मनमोहन सिंह की नीतियां जिम्मेदार हैं। एक बार वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। महंगाई का कारण रायों में जमाखोरी भी है। तो उन्हें बीजेपी समेत सभी विपक्षी दलों का विरोध झेलना पड़ा था। चिदंबरम ने जब संसद में सफाई दी कि खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ रही है और सप्लाई साइड को ठीक करके इसका हल निकालने की कोशिश की जा रही है, तो मौजूदा वित्त मंत्री और तत्कालीन नेता विपक्ष (राय सभा) अरुण जेटली ने उन्हें संवेदनहीन कहा था। जेटली ने कहा था कि जिन संवेदनहीन लोगों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि महंगाई का लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ रहा है, वे आंकड़ों की बात करते हैं। आज जेटली कह रहे हैं कि रायों को जमाखोरों पर कार्रवाई करनी चाहिए। महंगाई के लिए विदेशी कारण भी जिम्मेदार हैं। इसका सीधा-सीधा मतलब है कि जब महंगाई को लेकर विपक्ष में रहते बीजेपी कहती थी कि इसके लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नीतियां जिम्मेदार हैं तो वह झूठ बोलती थी। जब कहती थी कि महिलाओं पर अपराधों के लिए यूपीए सरकार जिम्मेदार है तब भी झूठ बोलती थी? और जब कहती थी कि यूपीए ने भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड बना लिया तब भी झूठ बोलती थी, क्योंकि उसकी खुद की राय सरकारों ने भी इस कला में रिकॉर्ड बनाए हैं।

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