अब पुरुषों को भी है आयोग की दरकार

9:00 am or October 13, 2014
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– डा. गीता गुप्त –

आजकल पूरे देश में वैवाहिक संबंध, घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद की वजह से मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताडि़त हो रहे पुरुषों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। ऐसे पुरुषों को शोषण से मुक्ति दिलवाने हेतु ‘सेव इण्डिया फैमिली मेन’ आरम्भ करने की योजना बनायी है। मध्यप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में भी हेल्प लाइन की शुरुआत कर दी गई। दरअसल महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने तथा उनके अधिकारों के संरक्षण हेतु बनाये गए कठोर कानूनों के दुरुपयोग ने पुरुषों और उनके परिजनों का जीवन नारकीय बना दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्वीकार किया है कि स्त्री-हितैषी कानूनों का उपयोग पुरुषों के विरुद्ध घातक हथियार की तरह किया जा रहा है, दहेज अधिनियम 498-ए उनमें से एक है। इस कानून के दुरुपयोग के मामलों में वृद्धि के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने भी धारा 498-ए में संशोधन की आवश्यकता जतलायी थी और अब पुनः कहा है कि दहेज प्रताड़ना के मामलों में तत्काल गिरफ्तारी न की जाए। पहले आरोपों की पुष्टि की जाए, फिर कार्रवाई की जाए।

ज्ञातव्य है कि वर्ष 1984 में कानून में दहेज प्रताड़ना की धारा 498-ए और दहेज हत्या की धारा 304-बी जोड़ी गई। इसका उद्देश्य स्त्रियों को राहत पहुंचाना था मगर इस कानून का दुरुपयोग अधिक हो रहा है। वर्ष 2012 में केवल मध्यप्रदेश में दहेज प्रताड़ना के सर्वाधिक 3988 केस दर्ज किए गए। जिनमें से सिर्फ 697 में सजा हुई, बाकी मामले झूठे साबित हुए। झूठे दहेज-प्रकरण या हिंसा के आरोप में पुरुषों को फंसा देना स्त्रियों के लिए मामूली बात है। कुछ कानून पुरुषों के लिए ऐसी मुसीबत बन गए हैं कि अकेले मध्यप्रदेश की संस्कृतिधानी जबलपुर में विगत पांच वर्षों में पत्नियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद 4500 पति ऐसे फरार हुए कि अब तक लापता हैं। दरअसल पत्नियों द्वारा थाने में शिकायत दर्ज करवाने के बाद पतियों पर गिरफ्तारी के अलावा जिन मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है उनसे बचने के लिए घर से भाग जाने या आत्महत्या के अलावा अन्य कोई विकल्प उन्हें नहीं सूझता। सन 2012 में 1554 पुरुषों ने केवल मध्यप्रदेश में ही, पत्नी से विवाद के कारण आत्महत्या कर ली।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के आई.जी. अमिताभ ठाकुर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ‘पुरुष आयोग’ बनाने की मांग की है। आई.जी. ने कहा कि ‘समाज के बदलते स्वरूप में आज कई क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले सशक्त हैं। ऐसी महिलाओं द्वारा प्रभाव और कानूनों का उपयोग कर उत्पीड़न की बातें सामने आने लगी हैं। अतएव कोर्ट राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पुरुष-आयोग के गठन का निर्देश दे।’ सचमुच, यह विडम्बना ही है कि सारे कानून स्त्री के पैरोकार हैं जबकि स्त्री की हरकतों से परेशान होने वाले पुरुषों की संख्या भी कम नहीं। भोपाल की एक युवती विवाह के डेढ़ माह बाद ही मायके आ गयी। उसकी जि़द थी कि पति उसके खाते में पांच लाख रुपये जमा कराये। काउंसिलिंग के बाद दोनों में इस शर्त पर समझौता हुआ कि पति पचास हजार की फिक्स डिपाजिट, एक अलग मकान और पचास हजार की बीमा योजना लेकर देगा। मगर शर्तों के अनुसार व्यवस्था करके जब पति उसे लेने पहुंचा तो परामर्श केन्द्र में पत्नी अपनी बात से पलट गई और झूठी प्रताड़ना की शिकायत कर उसने पति को गिरफ्तार करवा दिया। यद्यपि कुटुम्ब न्यायालय के एक निर्णयानुसार, परामर्श केन्द्र में काउंसिलिंग हेतु बुलाये जाने पर दोनों पक्षों की बात सुने बिना अनावेदक की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। पर उक्त प्रकरण में गिरफ्तारी हुई और गिरफ्तारी से घबराये पति की हालत अचानक बिगड़ जाने पर उसे पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां से उसे कोर्ट ले जाया गया और उसकी गंभीर हालत देखते हुए कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।

कई प्रकरणों में यह सच उजागर हुआ है कि यदि महिला अपनी ससुराल में नहीं रहना चाहती तो वह पति के साथ उसके परिवार से अलग रहने के लिए झूठ का सहारा लेती है। यदि पति उससे सहमत नहीं होता तो उसे दहेज प्रताड़ना के केस में फंसा देने की धमकी देती है। नवविवाहिता से लेकर बाल-बच्चेदार स्त्रियां तक झूठी शिकायत दर्ज करवाने आगे आती हैं। पेशे से सिविल इंजीनियर एक युवक ने प्रेम विवाह किया। ससुराल वालों ने शादी के बाद उससे घर डिजायन करवाया और आर्थिक मद्दस्वरूप दस लाख रुपये भी ले लिये। जब वह पत्नी को लेने ससुराल गया तो उसे बुरी तरह पीटा गया और पत्नी ने थाने में शिकायत कर दी कि उससे दहेज मांगा जा रहा है। जबकि पति से उसने कहा कि यह शादी उसने पैसा लेने के लिए ही की थी। अब पुलिस पति को नाकों चने चबवा रही है, पर वह अपनी बेगुनाही कैसे सिद्ध करे ?

हमारे कानून-निर्माता मानते हैं कि हिंसा केवल स्त्रियों के प्रति होती है, अन्याय एवं उत्पीड़न का शिकार केवल महिलाएं होती हैं और सुरक्षा केवल उन्हें ही चाहिए। जबकि पुणे की संस्था ‘मेन्स राइट्स एसोसिएशन’ के अनुसार, 99 प्रतिशत उत्पीड़न के शिकार पुरुष ऐसी घटनाएं उजागर नहीं कर पाते। वे बहुत लज्जित और भयभीत होने के कारण किसी से भी खुलकर अपनी पीड़ा नहीं बता पाते। मगर जब कानून में यह प्रावधान है कि झूठी शिकायत करने वाली स्त्री के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, तो उत्पीड़न के शिकार पुरुषों को इस कानून के दायरे में क्यों नहीं लाया जाता ? आखिर पुरुषों को भी तो उत्पीड़न से बचाने का कानूनन इंतजाम होना चाहिए। प्रायः दहेज प्रताड़ना के मामलों में काउंसिलिंग कराये जाने पर पता चलता है कि आपसी मनमुटाव के कारण पत्नी द्वारा शिकायत कर दी गई। ऐसे में केस वापस हो जाता है। प्रकरण झूठा साबित होने पर न्यायालय को चाहिए कि वह झूठी रपट लिखवाने वाली महिला पर दंडात्मक कार्रवाई करे। मगर प्रकरणों की संख्या बढ़ जाने के विचार से न्यायालय इस पर संज्ञान नहीं लेता। झूठी रपट करने वालों पर दण्डात्मक कार्रवाई के प्रति न्यायालय की उदासीनता के कारण ऐसे प्रकरण तेजी से बढ़ रहे हैं।

यह सर्वविदित है कि सारे कानून पूर्णतः महिला-हितैषी हैं। थोड़ा भी विवाद होते ही पुरुषांे का जीवन नर्क बना दिया जाता है। न्यायपालिका को कानून के दुरुपयोग की जानकारी है। मगर सरकार ने इस तथ्य पर कभी गौर नहीं किया है। राज्य एवं राष्ट्रीय महिला आयोग का ध्यान भी सिर्फ स्त्री की सुरक्षा तक ही सीमित है। यह सोचने की बात है कि जब महिलाओं के साथ कुछ गलत किया जाता है तो उन्हें सुरक्षा दी जाती है। पुरुषों के मामले में ऐसा क्यों नहीं किया जाता ? घर परिवार में अमन-चैन के लिए पति-पत्नी और परिजनों के बीच सामंजस्य आवश्यक है। लेकिन आज दम्पतियों में परस्पर सद्भाव, सौहार्द्र, सहयोग और सहिष्णुता का अभाव है। इसलिए परिवार का अस्तित्व संकट में है। पुरुष के सामने स्त्री विरोधी की मुद्रा में खड़ी है। स्त्रीवादी निरंतर उसे पुरुष के खिलाफ उकसा रहे हैं और वह स्वतंत्रता व समानता के नाम पर उच्छृंखलता की राह पर चलने में ही अपने जीवन की सफलता मानती है। फिर परिवार की रक्षा कैसे होगी ? एक सुंदर, शांत, सुखी पारिवारिक जीवन की परिकल्पना कैसे साकार होगी ? महिलाओं द्वारा प्रताडि़त पुरुषों का तो कथन है कि ‘महिला आयोग’ की तरह देश में ‘पुरुष आयोग’ भी बनना चाहिए, जो पुरुषों पर होने वाले अत्याचारों की सुनवाई करे।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में दिल्ली की ‘सेव इण्डियन फैमिली’ नामक संस्था ने महिलाओं द्वारा प्रताडि़त पुरुषों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर हेल्प लाइन मोबाइल फोन नंबर 08882498498 और एड्रायड मोबाइल एप्लीकेशन SIF ONE*’ एप भी जारी किया है। इसमें महिला कानूनों के दुरुपयोग से संबंधित मामले सुने जाएंगे और पीडि़त पुरुषों की निःशुल्क सहायता की जाएगी। वर्ष 2005 में आरंभ की गई इस संस्था का मुख्यालय दिल्ली में है। इसकी शाखाएं हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरू, त्रिशूर, कोलकाता, पुणे, मुंबई और फरीदाबाद में कार्यरत हैं। इसके अलावा अन्य बीस शहरों में इसके प्रतिनिधि हैं और अब इन्दौर की फोरम अगेन्स्ट मिसयूज आॅफ सेक्शन (फेमस) 498-ए संस्था भी इससे जुड़ गई है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ‘भाई’ (भोपाल अगेन्स्ट इनजस्टिस) ने सेवा आरंभ कर दी है। संस्था प्रताडि़त पुरुषों व पति परिवारों को कानूनी जानकारी देकर समस्या का समाधान बताएगी और निःशुल्क सहायता करेगी। हेल्प लाइन सेवा शुरू होने के पहले ही दिन महिलाओं द्वारा प्रताडि़त 635 पुरुषों ने दूरभाष पर संपर्क  साधा जबकि 150 पुरुषों ने ई-मेल पर मदद मांगी। इससे पता चलता है कि महिला हितैषी कानूनों ने पुरुषों का जीवन कितना असहज बना दिया है। हमारे नीति नियंताओं और सरकार द्वारा इसकी अनदेखी उचित नहीं। उन्हें इस दिशा में आवश्यक पहल करनी चाहिए।

ख़बर है कि दहेज विरोधी कानून के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार अब इसमें संशोधन पर विचार कर रही है। झूठे आरोप लगाने वालों पर अब जुर्माना या सजा का प्रावधान हो सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग इस कानून को और सख्त बनाना चाहता है। पर यह ध्यान रखना चाहिए कि कानून समाज में व्यवस्था एवं अपरिहार्य स्थितियों से निपटने के लिए हो। हथियार की तरह उसका उपयोग परिवार के हित में नहीं है। एक महत्वपूर्ण बात और, महिलाओं की तरह उत्पीडि़त पुरुषों को भी अपनी बात रखने के लिए सरकार क्यों न पुरुष आयोग‘ जैसा एक मंच मुहैया कराये ? पुरुषों द्वारा अपने लिए आयोग के गठन की मांग अनुचित तो नहीं।

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16 Comments

  1. Jagdish

    Sir ,myself Jagdish Kumar from Kaithal ,haryana ,I want some help in favor of blackmailed​ by my in laws family of my brother ,they asked us for a huge amount against given divorce by his girl

  2. Ravi arora

    sir i leave i lucknow my name is ravi arora
    mare wife n mjhpai 498a lagai hai jabki ye sab usne apne premi k or apne gharwalo k khne s kiya is baat k mere pass proof hai recording hai or wtsapp chat bhi mjhe madad ki jaroorat hai
    my no 08175089994

  3. himmat singh

    Sir i am himmat singh 9111981414 mujse con.karo sir me 304b me fsa hua hu

  4. Paramjeet kumar

    नमस्कार,मेरा नाम परमजीत जैसवाल है मैं लुधियाना का रहने वाला हूँ।मेरी शादी 2009 में मीरा रानी से हुई थी। मेरी शादी के बाद कि ज़िंदगी अच्छे से चल रही थी लेकिन इतने सालों से मे मेरी पत्नी को संतान सुख नही दे सका जिसके कारण दोनों के बीच मन मोटाव हो गया। लेकिन मेने अपने इलाज में कोई कमी नही छोड़ी।बच्चे नही होने के कारण मेरी सास अपनी बेटी को घर से ले गई और फोन पर धमकिया आने लग गई।फिर भी इन सब बातों को इग्नोर करते हुए लेन की बहुत कोशिश की लेकिन उसकी माँ नही मानी। लेकिन हद तो तब हो गई जब कल 22/11/2017 को क्रिमनल कोर्ट की तरफ से हमारे पूरे परिवार के नाम का सम्मन आया वो भी घरेलू हिंसा के तहत?अब आप ही बताये हम क्या करे आप ही एक मात्र सहारा है।
    नाम- परमजीत कुमार
    मो:- 9815485015

  5. n.alam

    I am n.Alam from west Bengal . mai wife Aur unke family ki traf se hone wale harkat se preshan hun . baar baar bila wazah ke suicide ki koshish karti hai . pure family ko phasane ki baat kahti hai . mai Kiya karun Ab

  6. Vinod

    सर मेरे पूरे परिवार को भी झूठे 304B केस मे फंसाया गया है 9953332997

  7. pradeep kumar mehra

    नमस्ते मेरा नाम प्रदीप कुमार मेहरा हे मे
    राज . के अलवर जिले के एक गाँव मे रहेता हूँ
    मेरी शादी 2012 मे बड़े भाई के सात हो गई मेरा
    गौना 4 dec. 2017 मे हुई मेरी wife 1महीने ही रही
    और चली गई . मे लेने गया तो मेरे सात नही भेजी
    मे बहुत दुखी हूँ और उनके घर वले मेर्को नही चहेते
    मे बहुत दुखी हूँ किर्पया मेरे से बात करे
    9928066718

  8. Sanjeev

    Sir mera name sanjeev h mare wife ne mhuje ghute 498a me fswa diya h mare shaade mare bhabhe se hue the kyuke tau ka ladka expire ho gya tha isliye mere ko gaud le liye or ghar se bhar nikal diya ap mare wife ne cash kr diya please help me9729194366

  9. santosh Gupta

    सर मेरा नाम संतोष गुप्ता है मेरी शादी को एक वर्ष हुआ है मेरी पत्नी मेरी मां से खुश नहीं रहती जब कि मेरे सिवा उस बूढ़ी माँ का कोई नहीं मैंने शादी इसलियें की थी कि मैं बाहर काम पर जाता हूँ तो मेरी माँ की देख रेख हो जाएगी मेरी मां बीमारी से ग्रसित हैं पता नहीं कब क्या हो जाये मैने उसे समझाने की कोशिस की लेकिन नही समझती कुछ भी होता है उसके घर वाले उसकी मां हमेशा उसको बढ़ावा देती है ।अगर डराता हूँ या कुछ कहता हूँ तो उसे उसकी माँ लेकर घर चली जाती है उसने कई बार हाथ काटे और कई बार मार्टिन खाने की कोसिस की हम क्या करे हमे सलाह दे क्या मैं उससे तलाक़ ले सकता हूँ या नहीं।उनके घर वाले कई बार धमकी दे चुके हैं हम केस कर देगें हम बहुत परेशान है कभी मन करता है कि मैं आत्महत्या कर लूं फिर मैं अपनी मां की खातिर शान्त हो जाता हूँ।शायद ये प्रेम विवाह का ही नतीजा है जिसे हम भोग रहे हैं।हमें उचित सलाह दें।

  10. Keshav kumar choudhary

    Mai Keshav Choudhary Bihar se
    Meri Sadi 24 /4/13 Ko huee
    Kuchh DIN tak sab sahi chal raha tha
    2 bachche bhi hue
    Meri nokri thik se chalti nhi
    Biwi ne chhoti moto nokri pakr li
    Jabki Hum bivi ke ilazz k Time se
    Karj me doob chuke hai
    Wo khatam na hua Upar se meri biwi ka Manager ne use scooty dilwa diya
    Wo apne sprich se ye Kah k ki Har mahine use kist chukana hoga
    Kahne Is ghatna k virodh Kiya
    Tab se Relation kharab ho gya hai
    Nobat Yaha hai k
    Wo mere khilaf mansik utpiran ka case kar di hai
    Kya karun
    Kuchh sujhaee nahi de raha
    Help kijiye
    Please
    Bahut Depression me hu
    Help me please
    7779864840

  11. Rahul Sable

    नमस्कार, पिढीत पती, राहणार मुंबई,
    क्रुपया लवकरात लवकर मला संपर्क करण्यात यावे हीच नम्र विनंती धन्यवाद संपर्क :- 9768808601, 7021914491.

  12. Praveen Singh

    सर में प्रवीण सिंह उत्तराखंड का रहने वाला हूँ सर हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत मेरी शादी जनवरी 2015 में दोनो की पारिवारिक सहमति हुई थी। शादी के पहले से ही मेरी पत्नी व उसके माता पिता द्वारा मेरे साथ बहुत बङा विश्वासघात किया। और शादी कुछ महिनो के बाद मेरी पत्नी का मेरे परिवार में अपना एकाधिकार चलाना लगा। अधिकांश समय अपने माता-पिता के साथ अपने मायके रहना। और अपने माता-पिता के कहे अनुसार चलना। यदि में ऐसा करने से रोकूँ तो उसके माता पिता द्वारा मुझे जेल धमकी देना। इस प्रकार का क्रूर व्यवहार मेरे परिवार के साथ होने लगा। महोदय मेरी पत्नी अचानक 3नवम्बर 2016 को वेवजह मायके जाने की बात करती है मेरे द्वारा मना करने पर मेरी 5 महिने की बच्ची को लेकर बिना आज्ञा के चली जाती है और जब मैं उसे बुलाने के उसके माता पिता घर जाता हूं तो उसके माता पिता द्वारा मेरे साथ मार पीट की जाती है जेल डालने की धमकी दी जाती है। तब मेरे द्वारा कोर्ट में28 जून 2017 सेक्शन 9 का दावा किया जाता है लेकिन ना तो कोर्ट में मेरी कोई सुनवाई हो रही है ना ही मुझे कोई न्याय मिल रहा है। और विपक्षी पार्टी कोर्ट में आने को तैयार नहीं है। जिससे दिन प्रतिदिन मेरे और मेरे परिवार का उत्पीड़न किया जा रहा है इसमें मेरे पास क्या ऑप्शन है कि मुझे न्याय मिले हैं।

  13. Raju kumar

    सर मैं एक लधु विचार लिखना चाहता हूँ ।

  14. varun

    sir mujhe aur mere pure pariwar ko bhi fhasa rakha hai498,323,504,506 itni dhara lagwa rahki rakhi hai mere pariwar ke upar aur mere rishtedaro ke upar sir help me…..plzz help me 6387643028

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