पोर्न रोकने में क्यों लाचार है सरकार; पोर्न के खिलाफ बड़े अभियान की जरुरत

2:29 pm or October 20, 2014
say no to porn

– शशांक द्विवेदी –

इंटरनेट पर पॉरनॉग्रफी के बढ़ते चलन से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने लगभग एक महीने पहले सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का वक्त दिया गया था, जो अब पूरा होने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अश्लील वेबसाइटें, खासकर बच्चों से जुड़ी वेबसाइटें भारत में बच्चों को पॉरनॉग्रफी की तरफ  धकेल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को पॉरनॉग्रफिक वेबसाइट्स, खासकर चाइल्ड पॉरनॉग्रफिक वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के लिए तकनीकी मंत्रालय, कानून मंत्रालय और प्रशासनिक विभाग के बीच तालमेल बैठाकर जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

असल में सुप्रीम कोर्ट ने इस सम्बंध में इसके पहले भी कई बार पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को नोटिस दिया था लेकिन हर बार केंद्र सरकार ने इन्हें न रोक पाने की लाचारी दिखाई थी । इस बार एनडीए की सरकार ने भी पोर्न साइट्स न रोक पाने के लिए लगभग वही दलीलें दी है । सरकार ने कहा कि ऐसी वेबसाइटों के सर्वर विदेशों में होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय पोर्न साइटों पर उसका नियंत्रण नहीं है इसीलिए इन पर रोक लगाना काफी मुश्किल है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि अगर विदेशों में ऐसी साइटों पर रोक लग सकती है तो भारत में इन्हें प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जा सकता है। केंद्र सरकार के अनुसार इंटरनेट पर करीब चार करोड़ से ज्यादा इस तरह की वेबसाइट मौजूद हैं। हम जितने समय में एक साइट को ब्लॉक करते हैं उतनी ही देर में एक नई वेबसाइट आ जाती है। जबकि याचिकाकर्ता के अनुसार पिछले 18 महीने में सरकार ने एक भी ऐसी वेबसाइट को ब्लॉक नहीं किया है । वास्तव में पॉर्नोग्राफी साइट्स को बैन किया जाना चाहिए, क्योंकि इस कारण महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। इंटरनेट कानूनों के अभाव में पॉर्न वीडियो को बढ़ावा मिल रहा है। बाजार में 20 करोड़ पॉर्न वीडियो और क्लिपिंग उपलब्ध हैं और इंटरनेट से सीधे इसे डाउनलोड किया जा सकता है। इस मुद्दे पर साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी एक्ट  एडल्ट पॉर्न को गैरकानूनी नहीं बना सकता, लेकिन चाइल्ड पॉर्न देखना अपराध है। और यह कानून उन सभी लोगों पर लागू होता है जो इससे संबंधित टेक्स्ट  और तस्वीरें बनाते हैं, देखते हैं या उन्हें डाउनलोड करते हैं।

इस मसले में सरकारी इच्छाशक्ति की कमी स्पष्ट दिख रही है जबकि दुनियाँ के कई देश इसे लेकर काफी संजीदा है ।और वो इसे रोकने को लेकर कार्यवाही भी कर रहें है । जब पड़ोसी देश चीन पोर्न के विरुद्ध एक बड़ा और सफल अभियान चला सकता है तो भारत क्यों नहीं ?जबकि आईटी के क्षेत्र में भारत महाशक्ति के रूप में जाना जाता है । फिर हम पोर्न को क्यों नहीं रोक पा रहें है ,ये एक बड़ा प्रश्न है । पिछले दिनों ही चीन ने इंटरनेट में अश्लील सामग्री के विरुद्ध एक बड़ा अभियान चलाते हुए 180000 ऑनलाइन प्रकाशनों पर रोक लगा दी थी। ये सभी साइटें इंटरनेट पर पोर्न के अलावा कुछ ऐसी सामग्री परोस रहीं थी जिससे अश्लीलता फैल रही थी। चीन के अश्लील साहित्य और अवैध प्रकाशन विरोधी राष्ट्रीय कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार 10000 वेबसाइटों को नियम और कानूनों के उल्लंघन के आरोप में दंडित किया गया है। अभियान ने 56 लाख अवैध प्रकाशनों को उजागर किया। चीन ने हाल में ही ऑनलाइन अश्लील साहित्य और अश्लील वेबसाइट्स के खिलाफ  अभियान की शुरुआत की थी।  पिछले दिनों ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने हाल ही में गूगल और माइक्रोसॉट को चेतावनी  देते हुए कहा था कि यदि घ्सा नहीं किया गया तो वे इसके खिलाफ विधेयकर लेकर आएंगे। चाईल्ड पोर्न को रोकने के लिए पड़ रहें वैश्विक दबाव के बाद गूगल के प्रमुख  एरिक स्मिथ ने कहा कि उन्होंने चाइल्ड  पॉर्न से संबंधित वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का फैसला कर लिया है। चाईल्ड पोर्न को रोकने के लिए इसके बाद गूगल  सर्च इंजन ने एक ऐसी तकनीकि विकसित की है, जिसकी बदौलत इंटरनेट पर बच्चों की अश्लील तस्वीरों की खोज बेहद कठिन हो जाएगी। इंटरनेट पर अश्लील तस्वीरों की खोज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एक लाख से अधिक शब्दों पर अब कोई परिणाम नहीं आएगा। इसके साथ ही बच्चों की अश्लील तस्वीरों को गैर कानूनी बताने वाला एक संदेश भी दिखाई देगा। लेकिन गूगल की ये कोशिशें भी अधूरी है और अभी भी कई दूसरे तरीकों से गूगल पर चाईल्ड पोर्न का कंटेंट आसानी से मिल जाता है । इसलिए इसे पूरी तरह से रोकने के लिए  सरकारों को ज्यादा सख्ती से कार्यवाही करने की जरुरत है । इंटरनेट पर आने वाला तकरीबन 30 फीसदी ट्रैफिक पोर्न साइटों से जुड़ा होता है। दुनिया की सबसे बड़ी पोर्न वेबसाइट एक्सवीडियोज को हर महीने 5 अरब पेज व्यूज मिलते हैं। दुनिया भर में 30 हजार लोग हर सेकेंड पोर्न वेबसाइट्स या अश्लील सामग्री देख रहे हैं। कई संगठनों का मानना है कि इस तरह की साइट्स लोगों की मानसिकता पर हमला करती है। देश में कुल इंटरनेट उपयोग का करीब 30 प्रतिशत सिर्फ पोर्न देखने के लिए ही होता है। करीब 90 लाख  इंडियन मोबाइल पर पोर्न देखते हैं। एक मोबाइल कंपनी के अधिकारी के अनुसार दुनियाभर में करीब 7 करोड़ लोग इंटरनेट पर पोर्न देखते हैं जिसमें 13 प्रतिशत लोग भारत से हैं। पोर्न देखना  अब बेहद आम हो गया है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक अधिकांश बच्चे 11 साल की उम्र तक इससे किसी न किसी सूरत में परिचित हो चुके होते हैं। वहीं इंटरनेट पर होने वाले सर्च में से 30 प्रतिशत सामग्री पोर्न से संबंधित होती हैं। पिछले पांच सालों में गूगल पर पॉर्न के सर्च के आंकड़ों पर गौर करने पर देखा गया कि लव की जगह सेक्स और पोर्न बेहद चर्चित की-वर्ड रहे हैं। वेब की शुरुआत के बाद पॉर्न तक लोगों की पहुंच आसान हो गई और जल्द ही इसने एक इंडस्ट्री का रुप ले लिया।

इंटरनेट पर कई मिलियन पोर्न वेबसाइट्स मौजूद हैं  और इनको सौ फीसदी रोकना मुश्किल है। प्रतिबंध के बावजूद तकनीकी रूप से दक्ष यूजर प्रॉक्सी सर्वर और वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क्स का इस्तेमाल कर अश्लील सामग्री देख सकता है। फिर भी विश्व के कई देशों को पोर्न के विरुद्ध आशातीत सफलता मिली है । जिस तरह चीन ने कानून बनाकर सभी किस्म की इंटरनेट पोर्न सामग्री को प्रसारित होने से रोका है और पोर्न के विरुद्ध सफल अभियान छेडा हुआ है वैसा ही अभियान भारत में भी आरंभ किया जाना चाहिए। देश का मौजूदा आईटी एक्ट पोर्न या अश्लील कंटेंट के प्रकाशन और प्रसारण को रोकने में असमर्थ है। इसलिए साइबर लॉ में ठोस और व्यवहारिक बदलाव की तुरंत आवश्यक्ता है। अधिकतर पोर्न कंटेंट विदेशों में होस्टेट है इस कारण इस चुनौती से निपटने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और ठोस रणनीति की जरुरत है । भारत सरकार को पोर्न के विरुद्ध एक अभियान  तो चलाना ही पड़ेगा। पोर्न को नियंत्रण करना मुश्किल जरुर है लेकिन असंभव नहीं है। हम इसके विरूद्ध लड़ाई शुरू तो कर ही सकते हैं। भारत सरकार पोर्न साइटों को प्रतिबंधित कर पायेगा या नहीं यह तो भविष्य बताएगा लेकिन इतना तो जरुर है है कि पोर्न देश के बच्चों और युवाओं के  सांस्कृतिक पतन की निशानी है और इसे बंद होना ही चाहिए।

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