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  • 300620146
    मोदी ने कहा था देश को लूटूंगा नहीं, फिर भी लूट प्रारंभ
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    –एल.एस.हरदेनिया- अपने चुनाव प्रचार के दौरान नरेन्द्र मोदी ने जिन मुख्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस के खिलाफ प्रचार किया था उनमें बढ़ती हुई मंहगाई और भ्रष्टाचार प्रमुख थे। परंतु पिछले कुछ दिनों में जो निर्णय नरेन्द्र मोदी की सरकार ने किए हैं उनसे लगता है कि मंहगाई आसमान छू लेगी। नरेन्द्र मोदी ने अपने एक […]

  • 300620147
    पॉलिसी सिस्टम को नियंत्रित कर रहा है काला धन
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    – हरे राम मिश्र ‘टैक्स हेवेन’ के रूप में कुख्यात स्विस बैंकों में अमीर भारतीयों द्वारा अवैध रूप से जमा किए गए धन की असलियत का पता लगाने के लिए मोदी सरकार द्वारा हाल ही में ‘एसआईटी’ के गठन की घोशणा की गई। इस घोशणा के बाद उद्योग संगठन ‘एसोचैम’ द्वारा काली कमाई को देश […]

  • 300620148
    सामाजिक न्याय बनाम हिन्दुत्व की राजनीति
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    –अनिल यादव- सोलहवीं लोकसभा का चुनाव भाजपा की जीत के साथ कई और संदेश लेकर आया है। खास करके सामाजिक न्याय की राजनीति के लिए। कोई भी विचारधारा सिर्फ एक संगठन में बंधाकर नहीं रहती है, बल्कि वह अपने आसपास परत-दर-परत पैठ बना लेती है और दक्षिणपंथी विचारधारा ने इस चुनाव में यही किया। सामाजिक […]

  • 300620149
    जल से मरते जीव
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    –डॉ. सुनील शर्मा- गर्मियों के समय नदी और तालाबों में अक्सर अचानक मछलियों के मरने की खबरें मिलती है। ये मछलियॉ लाखों की संख्या में एक साथ अचानक मर जाती हैं, कारण होता है- जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा में कमी और जिसकी वजह से जीवनदायी जल मृत्युदाता बन जाता है। जल में घुलित […]

  • 3006201410
    अमेरिका से आगे हम
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    –अमिताभ पाण्डेय- दुनियाभर के पर्यावरण प्रेमियों का यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि इन दिनों पर्यावरण और जुडे प्रमुख मुद्दों की सबसे ज्यादा चिंता भारतीय ही कर रहे हैं। अमेरिका ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया है। यह तथ्य पर्यावरण से जुडे एक प्रमुख मुद्दे जलवायु परिवर्तन को लेकर किये गये अंर्तराष्टीय सर्वेक्षण […]

  • 11
    बरसात के पानी को सहेजना होगा
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    – नरेन्द्र देवांगन- पूरे देश को सामने रखकर देखें तो हमारे यहां पानी की कोई कमी नहीं है। कहीं कम और कहीं ज्यादा मानसून खूब पानी बरसाता है पर हमारी सरकारें उसे सहेज कर नहीं रख पातीं। न बांधों में जमा रख पाती हैं और ना ही धरती के भीतर डालकर जलस्तर को बढ़ाने का […]

  • 12
    बहुत कठिन है डगर राष्ट्र-भाषा की
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    -डॉ. गीता गुप्त- सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में भारतीय राजनीतिक धरातल पर हिन्दी की स्वीकार्यता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। पी. चिदम्बरम जैसे राजनेता हिन्दी ज्ञान के अभाववश हिन्दी प्रदेश से चुनाव मैदान में खड़े होने का साहस नहीं जुटा पाये। नयी सरकार के गठन के बाद भव्य शपथ-ग्रहण समारोह में जब अधिकतर सांसदों ने […]

  • 230620141
    आखिर किसके इशारे पर खेल रहे मोदी
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    –हरे राम मिश्र- देश में लगभग दो दशक से गंभीर संकटों का सामना कर रही खेती और बर्बादी के मुहाने पर खड़े किसानों की चिंता उस वक्त और बढ़ गई जब अलनीनो के प्रभाव से पड़ने वाले संभावित सूखे की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनने लगीं। भयानक वैश्विक आर्थिक मंदी के इस दौर में, जब […]

  • 230620142
    अत्याचार-भ्रष्टाचार और मोदी सरकार
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    – विवेकानंद- करीब साल भर पहले इन्हीं दिनों नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के लिए मशक्कत कर रहे थे। तब वे छतीसगढ़ के सीएम रमन सिंह की विकास यात्रा में हिस्सा लेने गए थे और वहां उन्होंने कहा था कि ‘अपनी जवान बेटियों को लोग दिल्ली न भेजें,क्योंकि वहां मनमोहन सिंह बैठे हुए हैं। अब नरेंद्र […]

  • 230620143
    इतिहास सवाल करेगा कि… (पलासी से विभाजन तक के बहाने)
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    –अनिल यादव- नई सरकार आने के बाद पिछले दिनों ‘पलासी से विभाजन तक’ नामक किताब को आरएसएस के अनुषांगी संगठन विद्या भारती के महामंत्री दीनानाथ बत्रा द्वारा कानूनी नोटिस भेजा गया है। न्यूजीलैण्ड के विक्टोरिया विश्वविद्यालय के प्रो.शेखर वंद्योपाध्याय द्वारा लिखी गयी यह पुस्तक आधुनिक भारत के इतिहास की एक बेहतरीन पुस्तक है। इसकी गंभीरता […]

  • 230620144
    जयजयकार के बीच ऑंकड़ों के झरोखों से ताक झाँक
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    – वीरेन्द्र जैन- अगर आमचुनाव का कुल मतलब किसी व्यक्ति विशेष या किसी दल विशेष के पास सत्ता पहुँचना होता हो तो वह काम पूरा हो चुका है और पिछले पच्चीस वर्षों की संख्यागत विसंगतियों के विपरीत अधिक आदर्श चुनाव परिणाम आये हैं। पर यदि लोकतांत्रिक आदर्शों के अनुरूप आम चुनावों का मतलब जनता के […]

  • 230620145
    उत्तरपूर्व को कैसे संभालेंगे नरेन्द्र मोदी ?
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    – एल.एस.हरदेनिया- उत्तरपूर्व भारत की समस्याएं कितनी गंभीर हैं वह इस बात से महसूस होता है कि उस क्षेत्र के मामलों की देखरेख के लिये केन्द्र में एक पृथक मंत्रालय का गठन किया गया है। उत्तरपूर्व भारत में स्थित सभी राज्यों में कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर रहती है। त्रिपुरा ही शायद ऐसा […]

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