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  • 280720145
    अल्पसंख्यक कल्याण : कहां तक पहुंचा है कारवां ?
    Posted in: समाज, सरकार

    – सुभाष गाताडे- अल्पसंख्यक कल्याण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का हाल पिछले दिनों संसद के सामने पेश हुआ। पता चला कि इस सिलसिले में आठ साल पहले शुरू की गयी प्रधानमंत्री की 15 सूत्रीय योजना के कई बिन्दुओं पर अभी काम भी नहीं शुरू हो सका है। इतना ही नहीं […]

  • 280720146
    शरियत पर अदालत का फैसला- सुधार की दिशा में बड़ा एक कदम
    Posted in: धर्म, न्यायपालिका

    –जावेद अनीस- 2005 की बात है 28 वर्षीय इमराना के साथ उसके ससुर ने बलात्कार किया, जब यह मामला शरियत अदालत के पास पहुंचा तो उन्होंने फतवा जारी करते हुए कहा,चूंकि इमराना के ससुर ने उससे शारीरिक संबंध स्थापित कर लिए हैं,लिहाजा वह ससुर को अपना पति माने और पति को पुत्र। शरीयत अदालतों द्वारा […]

  • 280720147
    विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करने वाला एक खतरनाक कदम
    Posted in: मध्य प्रदेश, शिक्षा, सरकार

    – एल. एस. हरदेनिया- मध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा में एक ऐसा विधेयक पारित किया है, यदि वह कानून का रूप ले लेता है तो उससे मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्वायक्तता पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने वे सारी शक्तियां जिनके कारण विश्वविद्यालय स्वायक्त होते हैं स्वयं में निहित […]

  • 280720148
    गंगा के विनाश की तैयारी
    Posted in: पर्यावरण

    –डॉ. महेश परिमल- सरकार ने गंगा को प्रदूषणमुक्त करने की दिशा में पहल करनी शुरु कर दी है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने प्रदूषण फैलाने वाली करीब 48 कारखानों को बंद करने का आदेश दिया है। गंगा नदी के इस मामले में ही पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में जल संसाधन, […]

  • 280720149
    अच्छे दिन आने एवम् सुशासन के नाम पर जन मानस से छलावा
    Posted in: राजनीति

    – विजय कुमार जैन- भारत की जनता ने नरेन्द्र मोदी को अच्छे दिन लाने,सुशासन देने के लोक लुभावन वायदे के आधार पर चुना है। देश के मात्र 31प्रतिशत मतदाताओं के मत से यह सरकार बनी है। विगत दो माह में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने ऐसा कोई ठोस निर्णय लेने का प्रयास […]

  • 2807201410
    कथित विकास पर सवाल
    Posted in: आर्थिक जगत, गरीबी

    -शशांक द्विवेदी  – पिछले दिनों सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के बेहद गरीब लोगों में से एक तिहाई भारत में रहते हैं तथा यहां पांच साल से कम उम्र में मौत के मामले सबसे अधिक होते हैं। इस रिपोर्ट ने देश के कथित विकास पर बड़े सवाल […]

  • 2807201411
    यह संवेदनशीलता है या प्रहसन!
    Posted in: समाज

    –वरुण शैलेश- इसे चालबाजी कहें या संवेदनशीलता? सवाल कठिन है। इसे नए दौर का बाजारु उपभोक्तावाद नाम देकर हल्के में भी तो नहीं लिया जा सकता। लखनऊ के बाहरी इलाके में बर्बर बलात्कार कांड के बाद पीड़ित महिला की खून से लथपथ निर्वस्त्र लाश की तस्वीर सोशल मीडिया पर जिस तरह प्रसारित हुई उस पर […]

  • 2807201412
    साहित्य सिर्फ साहित्य और साहित्यकार सिर्फ साहित्यकार होता है
    Posted in: महिला, समाज

    -अंजलि सिन्हा- हाल में नोबेल पुरस्कार विजेती दक्षिण अफ्रीकी साहित्यकार नादिन गोर्दिमेर का देहान्त हो गया। दक्षिण अफ्रीका के रंगभेदी शासन के खिलाफ न केवल अपने साहित्य के जरिए बल्कि अन्य सक्रियताओं के जरिए विरोध करनेवाली नादिन के बारे में यह बात मशहूर है कि उन्होंने लेखिकाओं के लिए आरक्षित पुरस्कार से अपना एक उपन्यास […]

  • 2807201413
    ‘प्रयत्न’ जैसी संस्थाएं संवार सकती हैं निर्धन बच्चों की तक़दीर
    Posted in: बच्चे, शिक्षा, समाज

    -डॉ. गीता गुप्त- भले ही भारत में चौदह वर्ष तक के बच्चों के लिए नि:शुल्क अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लागू हो, मगर अभी भी लाखों बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। रोज़ी-रोटी की तलाश में गांव से शहर की ओर प्रस्थान करने वाले श्रमिक परिवारों के ऐसे बच्चे हमें अपने आसपास ही देखने को मिल जाते हैं, […]

  • 210720141
    आतंकवाद पर मोदी का बुध्दिविलास
    Posted in: आंतंकवाद

    – हरे राम मिश्र  – हाल ही में ब्राजील में संपन्न हुए छठवें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान, वैष्विक आतंकवाद की चुनौती पर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आतंकवाद को पनाह और समर्थन करने वाले राष्ट्रों पर वैष्विक बिरादरी द्वारा सामूहिक दबाव बनाया जाना चाहिए,जिससे कि वे इसे […]

  • 210720142
    दो महीने का कोई एक अच्छा काम तो बताइए
    Posted in: राजनीति, सरकार

    –विवेकानंद- सरकार का पहला महीना पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लॉग लिखकर कहा था कि उन्हें हनीमून का मौका ही नहीं मिला, सरकार में बैठते ही उनकी आलोचना शुरू हो गई थी। अब दूसरा महीना खत्म होने को आया, लेकिन इन 60 दिनों में ऐसा एक भी काम दिखाई नहीं देता जिसकी प्रशंसा […]

  • 210720143
    चुनाव जिताने का मापदण्ड और एक भिन्न दल होने का दावा
    Posted in: राजनीति

    –वीरेन्द्र जैन- एक व्यक्ति के चार बेटे थे। पहला बेटा डाक्टर था, दूसरा वकील था, तीसरा इंजीनियर और चौथा कोई अवैध काम करता था। डाक्टर और वकील की प्रैक्टिस सामान्य थी व इंजीनियर नौकरी पाने के लिए भटक रहा था। चौथा बेटा घर में सबसे ज्यादा सम्मानित और प्रिय था क्योंकि घर उसी की कमाई […]

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