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  • 1905201411
    मातृभाषा की मानसिकता से उबरें
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    –शशिमान शुक्ला- शिक्षा के माध्यम को लेकर अभी हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने स्पष्ट कहा है कि राज्य सरकारें भाषाई अल्पसंख्यक शिक्षक संस्थानों में क्षेत्रीय भाषाओं को नहीं थोप सकतीं। अदालत का यह फैसला अत्यन्त महत्वपूर्ण है […]

  • 1905201412
    संदर्भ-: सर्वोच्च न्यायालय ने पंढरपुर के विठोवा मंदिर में दलित एवं महिला को दिया पूजा का अधिकार। दलितों को मिला मंदिर में पूजा का अधिकार
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    –प्रमोद भार्गव- महाराष्ट्र के 900 साल पुराने पंढरपुर के विठोवा मंदिर में अब निचली जाति के पुरूष एवं महिला पुरोहित पूजा कर सकेंगे। दलितों को यह अधिकार सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है विट्ठल रूक्मिाणी मंदिर न्यास के अध्यक्ष अन्ना डेंगे ने इस आदेश पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि यह मंदिरों में पूजा और […]

  • 1905201413
    देश की सौ होटलें बिकने को तैयार! बोलो खरीदोगे?
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    –डॉ. महेश परिमल  – देश की कई होटलें इस समय सुस्त चल रहीं हैं। अभी तो वह अपना खर्च भी नहीं निकाल पा रहीं हैं। कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं दे पा रहीं हैं। इस स्थिति में एक नहीं, दो नहीं, बल्कि पूरे सौ होटलें हैं। इनके मालिक इन्हें बेचने की तैयारी कर […]

  • 120520141
    स्मृतिशेष भाजपा और मोदी सेना के गठन की पृष्ठभूमि
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    –वीरेन्द्र जैन- 2014 के आमचुनावों में मोदी मोदी के नाम का इतना प्रायोजित जयकारा लगाया गया कि विवेक की आवाज दब कर रह गयी। अपने अप्रिय चरित्र को छुपाने के लिए गुजरात के विकास और सुशासन का ऐसा नक्कारा बजाया गया कि कुपोषित बच्चों की करुण पुकार को अनसुनी कर दी गयी। यह विडम्बना ही […]

  • 120520142
    जतिगत ध्रुवीकरण का प्रयास है अमित शाह का बयान
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    –हरे राम मिश्र- पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर और समृध्द माने जाने वाले जिलों में से एक, आजमगढ़ को लेकर भाजपा उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी व गुजरात के पूर्व गृहमंत्री अमित शाह ने आम चुनाव के वक्त आतंकवाद का मुद्दा पूर्वांचल की राजनीति में एक बार फिर से उछाल दिया है। आजमगढ़ के […]

  • 120520143
    मोदी की राजनीति – कुछ खतरनाक पहलू
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    –अखिल विकल्प- ”लोग पता नहीं क्यों, मोदी जी के पीछे हाथ धोकर पड़े हैं?” यह प्रश्न अक्सर मोदी जी के समर्थकों द्वारा उठाया जाता है। प्रश्न भी वाजिब है, बाकियों में भी कम-ज्यादा बुराइयां हैं तो मोदी ही क्यों? इस प्रश्न के उत्तर में मोदी की राजनीति के कुछ खास पहलू उजागर करने जरूरी हैं। […]

  • 120520144
    मोदी का ही उपहास क्यों?
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    –सुनील अमर- भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेन्द्र मोदी कोई पहले व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें उनकी पार्टी ने प्रधानमन्त्री पद का दावेदार घोषित कर चुनाव लड़ाया है। इससे पूर्व इसी पार्टी से श्री अटल बिहारी वाजपेयी और श्री लालकृष्ण आडवाणी भी तत्कालीन लोकसभा चुनावों में घोषित उम्मीदवार ही थे। इनसे भी पहले वर्ष 1989 के […]

  • 120520145
    अपने ‘नमो’ को जानो : ‘गुजरात मॉडल’ में दलित की खोज
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    – सुभाष गाताड़े- क्या जनाब मोदी और गुजरात में विगत तेरह सालों से उनकी अगुआई में चल रही सरकार अपनी बुनियादी अन्तर्वस्तु में दलित विरोधी हैं ? केरल की सभा में अपने आप को ‘अस्पृश्यता का शिकार’ बताने वाले मोदी ( और बाद में बिना संकोच तमिलनाडु की एक ऐसी पार्टी से चुनावी गठबन्धन के […]

  • 120520146
    चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में मोदी ने राम और दुर्गा माता की शरण ली
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    –एल.एस.हरदेनिया- ऐसा लगता है कि चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में नरेन्द्र मोदी ने अपनी रणनीति बदल दी है। अभी तक वे विकास के नाम पर वोट मांग रहे थे और मतदाताओं को अपने गुजरात मॉडल के सहारे प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे। परंतु चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में उन्होंने राम का […]

  • 120520147
    असम जातीय हिंसा की जड़ कहां है
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    –जाहिद खान- असम के कोकराझार और बक्सा जिले में फैली जातीय हिंसा ने अब तक 40 से ज्यादा बेगुनाह और मासूम लोगों की जान ले ली है। ये संख्या और भी बढ़ सकती है,क्योंकि लाशें मिलने का सिलसिला अभी रुका नहीं है। हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि उसे संभालने के लिए स्थानीय प्रशासन […]

  • 120520148
    संदर्भ – भ्रष्टाचार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का अहम् फैसला सीबीआई के शिंकजे में आला अधिकारी
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    –प्रमोद भार्गव- भ्रष्टाचार पर शिंकजा कसने की दृष्टि से सर्वोच्च न्यायालय ने अहम् फैसला दिया है। हालांकि भ्रष्टाचार मुक्त शासन-प्रशासन देने की जवाबदेही विधायिका की है,लेकिन जब विधायिका भ्रष्टाचार पर पर्दा डाले रखने के काम में लग जाए, तब न्यायालय की यह पहल अनुकरणीय है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की ताकत में विस्तार किया है। […]

  • 120520149
    पक्षपाती आपराधिक कानून कभी भी लोक की सुरक्षा की गारंटी नहीं हो सकते
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    –शैलेन्द्र चौहान- मनोवैज्ञानिकों के अनुसार व्यक्ति में नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रकार की प्रवृत्तिायां मौजूद रहती हैं। समाज में शांति और व्यवस्था के लिए आवश्यक है नकारात्मक प्रवृत्तिायों का शमन तथा सकारात्मक वृत्तिायों की रक्षा एवं प्रोत्साहन। धर्मानुग्राही न्याय-प्रणाली का सहारा लेकर इस देश का अभिजन वर्ग सहस्राब्दियों तक समाज के शीर्ष पर विराजमान रहा […]

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