Democracy

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    ईवीएम पर अविश्वास, दोराहे पर लोकतंत्र – वीरेन्द्र जैन
    Posted in: लोकतंत्र

    ईवीएम पर अविश्वास, दोराहे पर लोकतंत्र —– वीरेन्द्र जैन —– दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का विशेषण ढोने वाले देश में अबोध लोकतंत्र दोराहे पर खड़ा हो गया है और उसकी प्रचलित प्रणाली अविश्वास के घेरे में है। डाले गये वोटों का बहुमत कुर्सी पर बैठा देता है किंतु वह जन भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता […]

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    चुनावी राजनीति बनाम भारतीय लोकतंत्र
    Posted in: चुनाव

    चुनावी राजनीति बनाम भारतीय लोकतंत्र —– जावेद अनीस —— जिस रोज भारत का सर्वोच्च न्यायालय फैसला दे रहा था कि धर्म, जाति, समुदाय, भाषा के नाम पर वोट मांगना गैरकानूनी है उसी दिन लखनऊ में बीजेपी की रैली थी और वहां उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य “जय श्री राम” का नारा लगाते हुए […]

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    लोकतांत्रिक गणराज्य की राह पर नेपाल
    Posted in: राजनीति

    ——-अरविंद जयतिलक——— हिमालय की गोद में बसे पड़ोसी देश नेपाल से अच्छी खबर है कि सात साल के राजनीतिक उठापटक के बाद आखिकार उसे अपना नया लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और गणतंत्रात्मक संविधान मिल गया। नेपाल के 601 सदस्यों की संविधान सभा ने 25 के मुकाबले 507 मतों से संविधान को पारित किया है। इस अर्थ में […]

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    दलों की अधिमान्यता के नियमों में सुधार की आवश्यकता
    Posted in: चुनाव, लोकतंत्र

    —-वीरेन्द्र जैन—- हमारे देश में लगभग 1807 पंजीकृत दलों में से छह  राष्ट्रीय और 64 प्रादेशिक दल अधिमान्य हैं। इन दलों की अधिमान्यता का कुल मतलब इतना है कि आम चुनावों के समय इन दलों के प्रत्याशियों को समान चुनाव चिन्ह आरक्षित रहता है, और सरकारी मीडिया पर इन्हें अपनी बात कहने के लिए कुछ […]

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    संघ और काॅरपोरेट का कदमताल
    Posted in: राजनीति, लोकतंत्र

    —राजीव कुमार यादव— भारतीय लोकतंत्र जिस वेस्टमिनिस्टर प्रणाली पर आधारित है उसमें दो सदन होते हैं। जनता द्वारा सीधे चुने गए लोगों का निचला सदन यानी लोकसभा और विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा चुने गए लोगों का उच्च सदन यानी राज्य सभा। कोई भी कानून बनने की प्रक्रिया इन दोनों सदनों-पहले लोकसभा फिर राज्यसभा से हो […]

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    अध्यादेशों पर राष्ट्रपति की चिंता
    Posted in: लोकतंत्र

    –प्रमोद भार्गव– सात माह के कार्यकाल में केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेशों के जरिए कानून बनाने की प्रक्रिया पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गंभीर चिंता जताई है। राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक होने के नाते अभिभावक की भूमिका में भी रहते हैं। इसलिए उनकी चिंता पर गौर करने की जरूरत है। महामहिम ने केंद्रीय विष्वविद्यालयों और […]

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    सामाजिक आदर्श और हमारा लोकतंत्र
    Posted in: राजनीति, लोकतंत्र

    -वीरेन्द्र जैन- हाल ही के लोकसभा चुनावों में एक करोड़ इक्यासी लाख वोट लेकर तामिलनाडु में अपनी पार्टी को 95 प्रतिशत सीटें जिताने वाली सुश्री जय ललिता को आय से अधिक सम्पत्ति रखने के आरोप में जेल जाना पड़ा, और वे ऐसी पहली मुख्यमंत्री नहीं है जिन्हें अदालत के फैसले के बाद पद त्यागने को […]

  • 061020146
    लोकतंत्र के लिए चुनौती भरे दिन
    Posted in: आंतंकवाद, राजनीति, सांप्रदायिकता

    -गुफरान सिद्दीकी- समझौता एक्सप्रेस, मालेगांव और मक्का मस्जिद में हुए आतंकवादी हमले की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ​सिंह ठाकुर के साथ, लगभग पांच साल पहले किसी गोपनीय वैठक में अपनी तस्वीर के सार्वजनिक हो जाने से चर्चा में रह चुके राजनाथ सिंह एक बार फिर गलत कारणों से चर्चा मे हैं। बेशक इस बार देश के […]

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    भारतीय राजनीति की दिशाहीनता
    Posted in: राजनीति, लोकतंत्र

    – वीरेन्द्र जैन हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का दावा करते हैं, और संख्या की दृष्टि से यह सच भी है। किंतु हमारा लोकतंत्र गत 62 वर्षों से चुनावी प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ है और विविधिताओं से भरे हुये हम दुनिया के दूसरे अनेक […]

  • प्रजातंत्र को खतरा है संघ और नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से
    Posted in: Uncategorized, राजनीति

    एल.एस.हरदेनिया देश के दो प्रतिष्ठित समाचार पत्रों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी के संबंधा में विस्तृत लेख प्रकाशित किये हैं। ये दो समाचार पत्र हैं ”दी हिन्दू” और ”दी इंडियन एक्सप्रेस”। एक्सप्रेस में प्रकाशित लेख उसके मुख्य संपादक शेखर गुप्ता ने लिखा है और  ”हिन्दु” में प्रकाशित लेख हरीश खरे […]

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