Environment

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    प्लास्टिक कचरे से गहराता संकट – फ़िरदौस ख़ान
    Posted in: पर्यावरण

    प्लास्टिक कचरे से गहराता संकट फ़िरदौस ख़ान प्लास्टिक ज़िन्दगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। अमूमन हर चीज़ के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है, वो चाहे दूध हो, तेल, घी, आटा, चावल, दालें, मसालें, कोल्ड ड्रिंक, शर्बत, सनैक्स, दवायें, कपड़े हों या फिर ज़रूरत की दूसरी चीज़ें सभी में प्लास्टिक का इस्तेमाल […]

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    पर्यावरण और इंसान की दोस्त है गौरैया – प्रभुनाथ शुक्ल
    Posted in: पर्यावरण

    पर्यावरण और इंसान की दोस्त है गौरैया प्रभुनाथ शुक्ल गौरैया हमारी प्राकृतिक सहचरी है। कभी वह नीम के पेड़ के नीचे फूदकती और बिखेरे गए चावल या अनाज के दाने को चुगती। कभी प्यारी गौरैया घर की दीवार पर लगे आइने पर अपनी हमशक्ल पर चोंच मारती दिख जाती है। लेकिन बदलते वक्त के साथ […]

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    पहाड बनता प्लास्टिक अपशिष्ट ? – प्रभुनाथ शुक्ल
    Posted in: पर्यावरण, प्रदूषण

    पहाड बनता प्लास्टिक अपशिष्ट ? —— प्रभुनाथ शुक्ल ——- आर्थिक उदारीकरण और उपभोक्तावाद की संस्कृति ने महानगरों से निकले वाले अपशिष्ट को पहाड़ के ढे़र में बदल दिया है। मानव सभ्यता के लिए यह खतरे की घंटी है। अभी तक वारिश और भूस्खलन की वजह से पहाड़ों का खींसकना और यातायाता का प्रभावित होना आम […]

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    स्टीफन हाॅकिंग की चेतावनी को समझने की जरूरत
    Posted in: पर्यावरण

    स्टीफन हाॅकिंग की चेतावनी को समझने की जरूरत —— प्रमोद भार्गव —— ब्रिटिष भौतिक विज्ञानी स्टीफन हाॅकिंग ने मानव अस्त्वि के खतरे से जुड़े व्यापक पर्यावरणीय परिप्रेक्ष्य में जो चेतावनी दी है, उसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। हाॅकिंग ने कहा है कि मानव समुदाय इतिहास के सबसे खतरनाक समय का सामना कर रहा […]

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    जलवायु समझौते की ओर दुनिया
    Posted in: पर्यावरण

    ——प्रमोद भार्गव——- जलवायु परिवर्तन में नियंत्रण के लिए पेरिस मे बारह दिनी जलवायु सम्मेलन शुरू  हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के 195 सदस्य देश इसमें भागीदारी कर रहें हैं। इस बैठक में कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने पर वैष्विक सहमति बनने की उम्मीद इसलिए है क्योंकि अमेरिका, चीन और भारत जैसे औद्योगिक देषों ने कार्बन […]

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    बढ़ते तापमान का वर्षा चक्र पर प्रभाव
    Posted in: पर्यावरण

    —-प्रमोद भार्गव—– जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब वैष्विक फलक पर  स्पश्ट रूप से देखने में आने लगा है। हालांकि विष्व स्तर पर धरती के बढ़ते तापमान को लेकर दुनिया जलवायु सम्मेलनों में चिंतित दिखाई दे रही है,किंतु परिवर्तन के प्रमुख कारक औद्योगिक व प्रौद्योगिक विकास को नियंत्रित करने में नाकाम हो रही है। नतीजतन वायुमंडल […]

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    इस भीषण गर्मी से कुछ सीखा हमने…
    Posted in: पर्यावरण, प्रदूषण

    —-डॉ. महेश परिमल—- एक महीने से पूरे देश में हीटवेव एक्सप्रेस जिस गति से दौड़ रही हैं, इसके पहियों में आकर अब तक देश भर में 2100 मौतें हो चुकी हैं। आंध्र और तेलंगाना तो झुलस रहे हैं। क्या इससे नहीं लगता है कि वृक्षों की अंधाधुंध कटाई कर हमने गलती की। यदि वृक्षों को सहेजकर […]

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    जलवायु परिवर्तन और किसान की बर्बादी
    Posted in: पर्यावरण

    सामयिक : विश्व पृथ्वी दिवस 22nd April —-शशांक द्विवेदी—- दुनिया भर के देशों की जलवायु और मौसम में परिवर्तन हो रहा है।  पिछले दिनों बेमौसम बरसात और बर्फबारी से देश के कई हिस्सों में फसल को भारी नुकसान पहुँचा है । उत्तर भारत के अधिकांश किसान बर्बादी के कगार पर खड़े है और सैकड़ों ने […]

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    ध्वनि प्रदूषण रोकने को जरुरी है प्रभावी कानून
    Posted in: प्रदूषण

    — सुनील अमर — देश में ध्वनि प्रदूषण का स्तर चिंतनीय ढ़ॅग से बढ़ा है और इस सम्बन्ध में विशेषज्ञों का कहना है कि जल और वायु प्रदूषण जितना ही खतरनाक ध्वनि प्रदूषण भी है और इससे होने वाली बीमारियों में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है। इसके निवारण के लिए देश में जो कानून […]

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    पर्यावरण के लिए खतरा, अस्पताल का कचरा
    Posted in: पर्यावरण

    – अमिताभ पाण्डेय – अस्पताल का काम बीमारों का उपचार और बीमारी को खत्म करने का हेै लेकिन यदि अस्पताल ही बीमारी बढाने, प्रदूषण फेलाने पर्यावरण को बिगाडने का काम करने लगे तो फिर नई नई बीमारियों का बढना और इनसे लोगों को पीडित होने से कौन रोक सकता है? हाल ही में प्रदूषण कंट्रोल […]

  • Crow
    श्राद्ध के लिए ढूंढ़ते रह जाओगे कागा
    Posted in: पर्यावरण, विशेष

    – नरेन्द्र देवांगन ऊंची-ऊंची इमारतों की छत पर लगे टी.वी.एंटीना के कोने पर अब कौए नहीं बैठते। उनकी कांव-कांव का शोर अब कानों को नहीं बेधता। एक समय था जब कौए सभी जगह आसानी से दिखाई दे जाते थे, किंतु आज इनकी तेजी से घटती संख्या के कारण ही अब इनकी गणना एक दुर्लभ पक्षी […]

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