Farming

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    आखिर किसान क्यों परेशान हैं? – योगेन्द्र सिंह परिहार
    Posted in: किसान, खेती

    आखिर किसान क्यों परेशान हैं? योगेन्द्र सिंह परिहार मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती। इन शब्दों का मतलब तो यही हुआ कि धरती पर उगने वाला अनाज हीरे-मोती से कम नही। लेकिन धरती से सोना उगाने वाले काश्तकार इतने परेशान क्यूं हैं? क्या ये अनाज किसान के खलिहान […]

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    कृषि संकट की जड़ें – जावेद अनीस
    Posted in: किसान, खेती

    कृषि संकट की जड़ें —– जावेद अनीस —— आज भारत के किसान खेती में अपना कोई भविष्य नहीं देखते हैं, उनके लिये खेती-किसानी बोझ बन गया है हालात यह हैं कि देश का हर दूसरा किसान कर्जदार है. 2013 में जारी किए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आंकड़े बताते है कि यदि कुल कर्ज का […]

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    अलग से बने कृषि बजट और कृषि सेवा
    Posted in: किसान, खेती

    ——सुनील अमर——– देश की 58 प्रतिशत आबादी को रोजगार तथा लगभग समूची आबादी को भोजन उपलब्ध कराने वाली भारतीय कृषि की दयनीय हालत का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इसके लिए अलग से बजट बनाने का प्राविधान नहीं है। देश में रेलवे के लिए अलग से बजट बन सकता है लेकिन खेती […]

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    अन्नदाता से मजदूर में तब्दील होता किसान
    Posted in: किसान, खेती

    ——-जगजीत शर्मा——— देश का अन्नदाता भूखा है। उसके बच्चे भूखे हैं। भूख और आजीविका की अनिश्चितता उसे खेती किसानी छोड़कर मजदूर या खेतिहर मजदूर बनने को विवश कर रही है। विख्यात कथाकार मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘पूस की एक रात’ का ‘हल्कू’ आज भी इस निर्मम और संवेदनहीन व्यवस्था का एक सच है। यह […]

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    मिलों पर केन्द्र-राज्य दोनों मेहरबान, गन्ना किसान हलकान
    Posted in: किसान, खेती

    —-सुनील अमर—– छह महीने के भीतर तीसरी बार गन्ना मिलों पर सरकारों की उदारता की बरसात हुई है। दशकों से किसानों का हजारों करोड़ रुपया दबाए बैठी इन मिलों को सरकार से सख्ती के बजाय तमाम तरह के उपहार मिल रहे हैं। अज़ब है कि उच्च अदालतें सरकार से मिलों पर सख्ती कर किसानों का […]

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    अलग से बने कृषि बजट और कृषि सेवा
    Posted in: किसान, खेती

    —–सुनील अमर—– देश की 58 प्रतिशत आबादी को रोजगार तथा लगभग समूची आबादी को भोजन उपलब्ध कराने वाली भारतीय कृषि की दयनीय हालत का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इसके लिए अलग से बजट बनाने का प्राविधान नहीं है। देश में रेलवे के लिए अलग से बजट बन सकता है लेकिन खेती […]

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    किसानों को मदद चाहिए, मधुर बोल नहीं
    Posted in: किसान, खेती

    —सुनील अमर— बीते साल अक्तूबर में महाराष्ट्र के विदर्भ में एक चुनावी रैली को सम्बोधित करते हुए प्रधानमन्त्री श्री मोदी ने कहा था कि एक किसान सरकार से सिर्फ पानी माॅगता है और बदले में वह मिट्टी से सोना पैदा करने की क्षमता रखता है लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो किसान पूरे देश को […]

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    ऐसे हालात में कौन करेगा किसानी
    Posted in: किसान, खेती

    —शशांक द्विवेदी— कृषि के लिए देश में बेहतर माहौल बनाने की जरुरत पिछले दिनों करनाल में बारहवीं कृषि विज्ञान कांग्रेस में खेत-किसान से जुड़ी चिंताओं पर चिंतन हुआ । चार दिन तक चले इस सम्मेलन में देश –विदेश के करीब लगभग 1500 डेलीगेट्स कृषि कांग्रेस का हिस्सा बनें और करीब  70 शोध पत्र प्रस्तुत हुए […]

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