Rape

  • maxresdefault
    आम आदमी की सिर्फ अर्ज़ियां पहुंचती हैं, उम्मीदें नहीं ! – अब्दुल रशीद
    Posted in: बच्चे, महिला

    आम आदमी की सिर्फ अर्ज़ियां पहुंचती हैं, उम्मीदें नहीं ! अब्दुल रशीद दुनियाभर में होने वाली हिंसा का सबसे विभत्स  रूप है बलात्कार। बलात्कार एक ऐसा लफ्ज़ है, जिसे सुनते ही रूह कांप उठती है।समाज में ऐसे लफ्जों के सुनने का मतलब है,मानवता का पतन। अफ़सोस आजकल यह लफ़्ज हमारे कानों में अक्सर टीस देता […]

  • ghg
    आखिर हो क्या गया है हमारे देश को, हमारी सभ्यता और संस्कृति ऐसी तो नही है! – योगेन्द्र सिंह परिहार
    Posted in: विशेष, समाज

    आखिर हो क्या गया है हमारे देश को, हमारी सभ्यता और संस्कृति ऐसी तो नही है! योगेन्द्र सिंह परिहार कठुआ, उन्नाव में बालात्कार की घटनाओं से देश दहल उठा और इन घटना में शिकार हुई बेचारी मासूमों की अंत्येष्टि की आग अभी ठंडी भी नही हुई थी कि फिर एक दिल दहला देने वाली खबर […]

  • 22-Child-protest
    बच्च्यिां कहीं सुरक्षित नहीं, न घर में, न बाहर
    Posted in: बच्चे, महिला, समाज

    ——–जगजीत शर्मा———– बच्चियां कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। चाहे वह देश की राजधानी दिल्ली हो, कोलकाता हो, मुंबई हो, लखनऊ, भोपाल, पटना, रांची, चंडीगढ़ या फिर देश के किसी दूरस्थ इलाके में बसा कोई गांव ही हो। बच्चियों..और बच्चियों ही क्यों, पूरी स्त्री जाति ही सुरक्षित नहीं है। अब तो गांवों में भी 60-65 साल […]

  • Supreme-Court
    गल्तियों की बारम्बारिता आखिर कब तक
    Posted in: कानून, न्यायपालिका

    —–आकाश भारद्वाज—– पिछले दिनों न्याय की सर्वोच्च संस्था के द्वार से एक निर्णय आया, जिसने यथास्थितिवाद में बने रहने की निचली अदालतों की ख्वाहिशों पर विराम लगाते हुए उन्हें नैतिकता की वास्तविकताओं से एक परिचय करने का आदेश दिया गया है. दरअसल परिचय करने के इस आदेश की आवश्यकता उस घटना से पड़ी जिसमें मध्यप्रदेश […]

  • 290654-uber
    बलात्कार के संस्कारों की पड़ताल
    Posted in: महिला, समाज

    – ओ.पी.शर्मा – दिल्ली में टैक्सी से जा रही युवती के साथ उसी टैक्सी के ड्राइवर द्वारा कार में बलात्कार किये जाने की घटना के मीडिआ में आने से एक बार फिर देश शर्मसार है। पूरा देश इस घटना के बाद एक बार फिर उस  “निर्भया” को स्मरण करने को विवश है जिसके बलिदान ने देश में पूरब से पश्चिम […]

  • women-india
    समाज का स्वरूप: महिलाओं की स्थिति
    Posted in: महिला, समाज

    – फरहाना रियाज – नेपोलियन बोनापार्ट ने कहा था ‘’तुम मुझे एक योग्य माता दो, मैं तुमको एक योग्य राष्ट्र दूंगा ‘’ किसी भी समाज का स्वरूप वहां महिलाओं की स्थिति पर निर्भर करता है , अगर उसकी स्थिति सुदृढ़ और सम्मानजनक है तो समाज भी दृढ़ और मजबूत होगा  अगर हम इस बात को […]

  • 2807201411
    यह संवेदनशीलता है या प्रहसन!
    Posted in: समाज

    –वरुण शैलेश- इसे चालबाजी कहें या संवेदनशीलता? सवाल कठिन है। इसे नए दौर का बाजारु उपभोक्तावाद नाम देकर हल्के में भी तो नहीं लिया जा सकता। लखनऊ के बाहरी इलाके में बर्बर बलात्कार कांड के बाद पीड़ित महिला की खून से लथपथ निर्वस्त्र लाश की तस्वीर सोशल मीडिया पर जिस तरह प्रसारित हुई उस पर […]

Humsamvet Features Service

News Feature Service based in Central India

E 183/4 Professors Colony Bhopal 462002

0755-4220064

editor@humsamvet.org.in